इतिहास

18 मई का इतिहास : विख्यात चिकित्सक, गणितज्ञ, भौतिकशास्त्री, खगोलशास्त्री व दर्शनशास्त्री कुत्बुद्दीन शीराज़ी का तबरेज़ नगर में निधन हुआ!

ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 18 मई वर्ष का 138 वाँ (लीप वर्ष में यह 139 वाँ) दिन है। साल में अभी और 227 दिन शेष हैं।

18 मई की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
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राजस्थान में पंजीकृत निजी क्षेत्र में भारत के पुराने बैंकों में से एक बैंक ऑफ राजस्थान का आईसीआईसीआई बैंक में विलय होना तय हो गया।
1994 – संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1995 ‘सं.रा. सहिष्णुता वर्ष’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया, गाजा पट्टी क्षेत्र से अन्तिम इस्रायली सैनिक टुकड़ी हटाये जाने के साथ ही क्षेत्र पर फ़िलिस्तीनी स्वायत्तशासी शासन पूर्णत: लागू।
2004 – इस्रायल के राफा विस्थापित कैम्प में इस्रायली सैनिकों ने 19 फ़िलिस्तीनियों को मौत के घाट उतारा।
2006 – नेपाल नरेश को कर के दायरे में लाया गया।
2007 – कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नूर सुल्तान नजर वायेव का कार्यकाल असीमित समय के लिए बढ़ा।
2008 -पार्श्वगायक नितिन मुकेश को मध्य प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय लता मंगेशकर अलंकरण से सम्मानित किया।
भारतीय मूल के लेखक इन्द्रा सिन्हा को उनकी किताब एनिमल पीपुल हेतु कामनवेल्थ सम्मान प्रदान किया गया।

18 मई को जन्मे व्यक्ति
1959 – फग्गन सिंह कुलस्ते – भारतीय जनता पार्टी से संबद्ध राजनीतिज्ञ हैं।
1682 – शाहू – छत्रपति शिवाजी का पौत्र तथा शम्भुजी और येसूबाई का पुत्र था।
1948 – थावर चंद गहलोत – भारतीय राजनेता हैं।
1939 – सुधीर रंजन मजूमदार – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञ थे।
1914 – एस. जगन्नाथन – भारतीय रिज़र्व बैंक के दसवें गवर्नर थे।
1933 – एच डी देवगौड़ा – भारत के बारहवें प्रधानमंत्री
1881 – राम लिंगम चेट्टियार – एक वकील, राजनीतिज्ञ और संविधान सभा के सदस्य थे।

18 मई को हुए निधन
2017 – रीमा लागू – हिन्दी फ़िल्मों की शानदार अभिनेत्री थीं।
2012 – जय गुरुदेव – प्रसिद्ध धार्मिक गुरु।
1966 – पंचानन माहेश्वरी – भारत के सुप्रसिद्ध वनस्पति विज्ञानी।
2017 – अनिल माधब दवे – भारत सरकार में पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री थे।

18 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
पोखरन परमाणु विस्फोट दिवस (1974)
संग्रहालय दिवस

18 मई सन 1804 ईसवी को फ्रांस की सेनेट के समर्थन से नेपोलियन बोनापार्ट इस देश के शासक बने।

18 मई सन 1804 ईसवी को फ्रांस की सेनेट के समर्थन से नेपोलियन बोनापार्ट इस देश के शासक बने। इस प्रकार फ्रांस में क्रांति की सफतला के 15 वर्ष बाद पुन: राजशाही शासन व्यवस्था स्थापित हो गयी किंतु दस वर्ष बाद 11 अप्रैल सन 1814 ईसवी को फ्रांस में नेपोलियन की तानाशाही भी उस समय समाप्त हो गयी जब उनको योरोपीय सरकारों ने पराजित करके देशनिकाला दे दिया।

18 मई सन् 1848 में जर्मनी में पहली नेशनल एसेंबली का उद्घाटन हुआ।
18 मई सन् 1950 में उत्तरी एटलांटिक संधि पर हस्ताक्षर करने के एक साल बाद इसी दिन विश्व के 12 देशों ने अमरीका और यूरोप की रक्षा के लिए एक स्थाई संगठन पर सहमति दी थी।
18 मई सन् 1974 में आज ही के दिन राजस्थान के पोख़रण में अपने पहले भूमिगत परमाणु बम परीक्षण के साथ भारत परमाणु शक्ति संपन्न देश बना था। इस परीक्षण को‘स्माइलिंग बुद्धा’ का नाम दिया गया था।
18 मई सन् 2006 को नेपाल नरेश को कर के दायरे में लाया गया।
18 मई सन् 2007 को कज़ाकिस्तान के राष्ट्रपति नूर सुल्तान नज़र वायेव का कार्यकाल असीमित समय के लिए बढ़ा।
18 मई सन् 2009 में श्रीलंका की सरकार ने 25 साल से तमिल विद्रोहियों के साथ हो रही जंग के ख़त्म होने का एलान किया। सेना ने देश के उत्तरी हिस्से पर कब्ज़ा किया और लिट्टे प्रमुख वेलुपिल्लई प्रभाकरन को मार गिराया।

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18 मई सन 1830 ईसवी को फ्रांस ने अलजीरिया के अतिग्रहण के लिए अपना सैनिक हमला आरंभ किया। फ्रांस के तत्कालीन अत्याचारी शासक चार्लस दसवें ने इस बहाने से हमला शुरू करने का आदेश दिया कि अलजीरिया के शासन ने इस हमले से तीन साल पहले फ्रांस से 70 लाख फ्रैंक रिण वापस लेने के लिए पेरिस सरकार को धमकी दी थी। इस आक्रमण के दौरान फ्रांसीसी अधिकारियों के अनुमान के विपरीत अलजीरिया की जनता ने अतिग्रहणकारियों का डटकर मुकाबला किया यहॉ तक कि अलजीरिया पर फ्रांस का अधिकार होने के बाद भी अमीर अब्दुल क़ादिर अलजज़ायरी ने वर्षो तक अतिग्रहणकारी सेना का मुकाबला किया। फ्रांस ने अलजीरिया पर अधिकार कर लेने के बाद इस देश के प्राकृतिक स्रोतों को लूटना आरंभ कर दिया किंतु जनता ने संघर्ष जारी रखा और 1962 में यह देश फ्रांस से स्वतंत्र हो गया।

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18 मई सन 1872 ईसवी को ब्रिटेन के गणितज्ञ और दार्शनिक बरट्रेंड रसल का जन्म हुआ। उन्होंने आरंभिक शिक्षा की प्राप्ति के बाद लंदन के कैम्ब्रिज विश्विद्यालय में प्रवेश किया। शिक्षा पूरी करने के बाद उनहोने विभिन्न मतों के बारे में अध्ययन आरंभ किया और इन धर्मों के बारे में अपना विचार लिखते गये। उन्होने प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध इसी प्रकार वियतनाम के विरूद्ध अमरीका के युद्ध का कड़ाई से विरोध किया। यहॉ तक कि उन्होने अमरीकी अधिकारियों पर उनकी उनुपस्थिति में ही मुकद्धमा चलाने के लिए एक न्यायालय की स्थापना की जो रसल न्यायालय के नाम से प्रसिद्ध है। सन 1950 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सन 1970 में रसल का निधन हुआ।

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18 मई सन 1974 ईसवी को भारत ने मरुस्थलीय क्षेत्र राजस्थान में पहली बार परमाणु परीक्षण किया। इस प्रकार सोवियत संघ, अमरीका, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन के बाद भारत छठॉ परमाणु सम्पन्न देश हो गया। इसके 24 वर्ष बाद मई सन 1998 ईसवी में भारत ने अन्य 5 परमाणु परीक्षण किए और व्यवहारिक रुप से परमाणु हथियार बनाने में सक्षम देश हो गया। भारत ने, जो पाकिस्तान का पारम्परिक प्रतिद्वंद्वी है और दक्षिणी एशिया के क्षेत्र में एक शक्तिशाली देश माना जाता है इस प्रकार अपनी सैनिक एवं राजनैतिक शक्ति बढ़ा ली। भारत का परमाणु सम्पन्न हो जाना इस बात का चिन्ह है कि जब तक परमाणु सम्पन्न बड़ी शक्तियां अपने जनसंहारक शस्त्र भंड़ार को नष्ट करने से आनाकानी करती रहेंगी विश्व में हथियारों की होड़ जारी रहेगी और दूसरे देश भी ऐसे हथियारों की प्राप्ति के लिए प्रयासरत रहेंगे।

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29 उर्दीबहिश्त 1362 हिजरी शम्सी को सद्दाम की सरकार ने सैयद मोहसिन हकीम के परिवार के 90 सदस्यों को गिरफ़्तार किया और उसके कुछ दिनों के बाद उनमें से 6 को मृत्यु दंड दे दिया। उसके कुछ दिन बाद उनके परिवार के 10 अन्य सदस्यों को मृत्यु दंड दे दिया गया। आयतुल्लाहिल उज़्मा हकीम अपने समय के इराक़ के वरिष्ठतम धर्मगुरू थे जिनका 1348 हिजरी शमसी में स्वर्गवास हो गया। उनके बेटे और परिवार के दूसरे सदस्य ज्ञान से सुसज्जित थे। चूंकि इराक़ी सरकार, लोगों के मध्य उनके परिवार के प्रभाव से भयभीत थी इसलिए उसने मोहसिन हकीम परिवार के बहुत से सदस्यों को शहीद और उन्हें जेल में बंद कर दिया था।

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24 रमज़ान सन 710 हिजरी क़मरी को ईरान के विख्यात चिकित्सक गणितज्ञ भौतिकशास्त्री खगोलशास्त्री व दर्शनशास्त्री कुत्बुद्दीन शीराज़ी का तबरेज़ नगर में निधन हुआ। वे ख्वाजा नसीरुद्दीन तूसी की शिष्यों में से थे। उन्होंने चिकित्सा विज्ञान की शिक्षा के लिए बहुत प्रयास किये। वे वर्षों तक शीराज़ के अस्पताल में रोगियो का इलाज करते रहे। उन्होने चिकित्सा विज्ञान गणित और खगोल शास्त्र के विषय में कई पुस्तकें लिखीं। क़ुत्बुद्दीन शीराज़ी ने इसी प्रकार इब्नेसीना जैसे महान विचारकों और वैज्ञानिकों की पुस्तकों की व्याख्या भी लिखी है।

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