इतिहास

2 मई का इतिहास : 2 मई 1911 को भारतीय उपमहाद्वीप के प्रसिद्ध विद्वान सैयद अली बिलगिरामी का स्वर्गवास हुआ, वह पटना में जन्मे थे!

ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 2 मई वर्ष का 122 वाँ (लीप वर्ष में यह 123 वाँ) दिन है। साल में अभी और 243 दिन शेष हैं।

2 मई की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
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1986 – सं.रा. अमेरिका की 30 वर्षीया एन. बैन्क्राफ़ उत्तरी ध्रुव पर पहुँचने वाली प्रथम महिला बनीं।
1997 – ब्रिटेन में 18 वर्षों बाद लेबर पार्टी सत्ता में, उसके नेता टोनी ब्लेयर ब्रिटेन के संसदीय इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बने।
1999 – मिरया मोस्कोसो पनामा की प्रथम महिला राष्ट्रपति नियुक्त।
2002 – पाकिस्तान के इंजामामुल हक ने न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ 329 रन बनाये।
2004 – मारेक बेल्का पोलैंड के नये प्रधानमंत्री बने।
2008 -अनिल अम्बानी ग्रुप की फर्म रिलायंस पावर लिमिटेड ने इण्डोनेशिया में तीन कोयला खदानों का अधिग्रहण किया।
ब्रिटेन के स्थानीय चुनाव में सत्तारुढ़ लेबर पार्टी की हार हुई। अमेरिका ने म्यांमार पर नए प्रतिबन्ध लगाये।
2010 – सेवी का प्राथमिक पूंजी बाज़ार में नए इश्युओं की ख़रीद के लिए आवेदन करते समय संस्थागत निवेशकों को भी खुदरा निवेशकों की तरह शत प्रतिशत भुगतान करने का निर्देश प्रभावी हो गया।

2 मई को जन्मे व्यक्ति
1929 – विष्णु कांत शास्त्री – भारतीय राजनीतिज्ञ एवं साहित्यकार थे।
जिग्मे दोरजी वांग्चुक – भूटान के तीसरे राजा थे।
1922 – विल्सन जोन्स – भारत के पेशेवर बिलियर्ड्स खिलाड़ी थे।
1921 – सत्यजित राय ऑस्कर पुरस्कार सम्मानित फ़िल्म निर्माता, निर्देशक और लेखक

2 मई को हुए निधन
1519 – लिओनार्दो दा विंची, इटलीवासी, महान चित्रकार।
1975 – पद्मजा नायडू – प्रसिद्ध भारतीय राजनीतिज्ञ श्रीमती सरोजिनी नायडू की पुत्री।
1985 -बनारसीदास चतुर्वेदी- प्रसिद्ध पत्रकार और साहित्यकार।

Syed Ali Bilgrami
Birthdate: estimated between 1814 and 1874
Death:
Immediate Family:
Son of Khan Bahadur Syed Zainuddin Hussain
Father of Zehra Bilgrami; Ruquaiya “Lulu” Bilgrami; Private; Mushtaba Bilgrami and Mohsin Bilgrami
Brother of Imad-ul-Mulk Syed Hussain Bilgrami and Fatima Begum Bilgrami

Syed Ali Bilgrami Shams ul Ulema
Syed Ali Bilgrami was born in 1851. He was a distinguished scholar and a linguist. His ancestors came from Mesopotamia, situated between Baghdad and Basra. He served the Nizam’s Government in various capacities: Director of Public Instruction, Home Secretary, Inspector General of Mines and Secretary, Public Works Department. He was also a great author and among his books which may be mentioned are “Monograph on the book of Kalila and Dama”, “Relative merits of the study of Persian and Sanskrit”. He translated Atharva Veda.

In 1891, the Government of India gave him the title “Shams-ul-Ulama” which literally means “Light of the Learning”.

From Sidduma — Siddiqua Syed (Bilgrami):

Syed Ali Bilgrami, brother of Imad-ul Mulk, was a man of letters and wrote ‘Tammadun-e-Hind’ and ‘Tammadun-e-Arab’, two well known works at the time. He had a chair, and taught Sanskrit at Oxford University and a street in Oxford is named ‘Bilgrami Street’ after him. Gen. Abid Bilgrami was his grand-son and nephew of Lulu Aunty. He used to dress up as Father Christmas at Hashim’s birthdays organised by Lulu Aunty, which some of us surely remember. How we loved those parties !

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2 मई वर्ष 1911 को भारतीय उपमहाद्वीप के प्रसिद्ध विद्वान सैयद अली बिलगिरामी का स्वर्गवास हुआ।

वह 10 नवम्बर वर्ष 1851 को पटना में जन्मे थे। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और फिर सिविल सर्विस की परिक्षा बात की। बाद में वे यूरोप चले गये। जहां उन्होंने भू- विज्ञान खनिज, रसायन, प्रकृति आदि की शिक्षा प्राप्त की। वे कई भाषाओं में निपुण थे जिनमें अरबी, फ़ारसी, अंग्रेज़ी, जर्मनी, फ़्रांसीसी, संस्कृति, बंगाली, तेलगू, मराठी, गुजराती और हिंदी शामिल हैं। कहा जाता है कि भारत में इतनी भाषा में निपुण बहुत कम लोग गुज़रे हैं। वर्ष 1893 में उन्हें भारत सरकार की ओर से शमसुल ओलमा की उपाधि प्रदान की गयी। उनकी महत्त्वपूर्ण पुस्तकों में बाबर नामा, इल्मुल लेसान, तिलस्म अज़ाए इन्सानी, नूजुमुल फ़ुरक़ान और मग़ारातुल वरा का नाम लिया जा सकता है।

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2 मई वर्ष 2011 को कुख्यात चरमपंथी ओसामा बिन लादेन मारा गया। 10 मार्च वर्ष 1957 ईसवी को सऊदी अरब में उसका जन्म हुआ। उसके पिता का नाम मोहम्मद बिन लादेन था। वह मुहम्मद बिन लादेन के 52 बच्चों में से 17वां था। मोहम्मद बिन लादेन सऊदी अरब का अरबपति बिल्डर था जिसकी कंपनी ने देश की लगभग 80 प्रतिशत सड़कों का निर्माण किया था। जब ओसामा के पिता की 1968 में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हुई तब वो युवावस्था में ही करोड़पति बन गया। सऊदी अरब के शाह अब्दुल्लाह अज़ीज़ विश्वविद्यालय में सिविल इंज़ीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान वह कट्टरपंथी शिक्षकों और छात्रों के संपर्क में आया। पाकिस्तान के एब्टाबाद नगर में हुए अमरीकी सेना के अभियान में 2 मई 2011 को उसे मार डाला गया। ओसामा बिन लादेन की मौत के 12 घंटे के बाद अमरीका के विमान वाहक पोत यूएसएस कार्ल विन्सन पर शव को एक सफ़े चादर में लपेट कर एक बड़े थैले में रखा गया और फिर अरब सागर में फेंकर दिया गया। अमरीकी अधिकारी के अनुसार, सऊदी अरब ने शव लेने से इनकार कर दिया था। अमरीका का दावा है कि ओसामा बिन लादेन के अलक़ायदा संगठन ने ही 11 सितम्बर वर्ष 2001 को अमरीका के न्यूयार्क नगर के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आक्रमण किया था। ज्ञात रहे कि अमरीका ने सोवियत संघ के विरुद्ध युद्ध करने के लिए अलक़ायदा का गठन किया था ताकि अलक़ायदा के तथाकथित मुजाहिद सोवियत संघ के विरुद्ध युद्ध करके सोवियत सेना को अफ़ग़ानिस्तान से निकाल दें।

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13 उरर्दीबहिश्त वर्ष 1186 हिजरी शम्सी को ईरान के प्रसिद्ध कवि मिर्ज़ा हबीबुल्लाह क़ा आनी का जन्म हुआ। वे ईरान के शीराज़ नगर में पैदा हुए। वे शीक्षा प्राप्ति के लिए पवित्र नगर मशहद गये। वहीं उन्होंने शेर कहना आरंभ किया। क़ाआनी ने दस वर्ष के परिश्रम के पश्चात व्याकरण, साहित्य, खगोलशास्त्र, तर्कशास्त्र, दर्शनशास्त्र तथा शायरी में दक्षता प्राप्त कर ली। कुछ समय बाद वे क़ाजार शासक नासिरूद्दीन शाह के राजदरबार में काम करने लगे। वे क़ाजारी शासकों और राजकुमारों की प्रशंसा में कविताएं कहते रहे। हबीबुल्लाह क़ाआनी पहले ईरानी कवि हैं जिन्होंने फ़्रांसीसी भाषा सीखी। काव्य रचना के अतिरिक्त उनकी एक पुस्तक परेशान के नाम से भी मौजूद है। क़ाआनी का 47 वर्ष की आयु में निधन हुआ और उनको रेय नगर में हज़रत अब्दुल अज़ीम के मक़बरे के निकट दफ़्न कर दिया गया।

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8 रमज़ान 675 हिजरी क़मरी को प्रसिद्ध ईरानी विद्वान व खगोलशास्त्री नजमुद्दीन अली दबीरान का देहान्त हुआ। वह कातेबी के नाम से प्रसिद्ध थे। उनके जीवन के आरंभिक वर्षों के बारे में अधिक जानकारी नहीं है किन्तु उनके हालात से पता चलता है कि प्रसिद्ध खगोलशास्त्री ख़्वाजा नसीरुद्दीन तूसी ने कातेबी से मराग़ा की प्रसिद्ध वेधशाला में उनका सहयोग करने का निवेदन किया था। कातेबी ने वर्षों मराग़ा की वेधशाला में काम किया। यूं तो कातेबी ने कई किताबे लिखीं हैं किन्तु जामेउद्दक़ाएक़ और हिकमतुल ऐन उनकी उल्लेखनीय किताबें हैं।

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