इतिहास

24 मई का इतिहास : 24 मई 1875 में सर सैयद अहमद ख़ां ने अलीगढ़ में मोहमडन एंगलो ओरियंटल स्कूल की स्थापना की!

ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 24 मई वर्ष का 144 वाँ (लीप वर्ष में यह 145 वाँ) दिन है। साल में अभी और 221 दिन शेष हैं।

24 मई की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
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1994 – मीना (सऊदी अरब) में हज से जुड़े एक समारोह के समय भगदड़ मच जाने से 250 लोगों से भी अधिक हाजियों की मृत्यु।
2000 – दक्षिण लेबनान से 22 साल का ख़ूनी दौर समाप्त कर इस्रायली सेना वापस लौटी।
2002 – नेपाल में नेपाली कांग्रेस ने प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा को नेपाली कांग्रेस पार्टी से निलंबित किया।
2003 – इस्रायल के प्रधानमंत्री एरियल शैरोन ने पश्चिम एशिया शांति योजना को स्वीकार किया।
2005 – एनबी इंकबेयर मंगोलिया के राष्ट्रपति चुने गये।
2007 – एमा निकोलसन रिपोर्ट यूरोपीय संघ की संसद में पारित।
2008- उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों का मंहगाई भत्ता छह प्रतिशत बढ़ाने का फ़ैंसला किया।

24 मई को जन्मे व्यक्ति
1819 – महारानी विक्टोरिया – ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैण्ड की महारानी
1896 – करतार सिंह सराभा – भारत के प्रसिद्ध क्रान्तिकारियों में से एक।
1952 – रंजन मथाई – भारत के पूर्व ‘भारतीय विदेश सचिव’।
1954 – बछेंद्री पाल – माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली प्रथम भारतीय महिला।
1928 – जन कृष्णमूर्ति – 2001 से 2002 तक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।
1920 – नीलमणि राउत्रे – भारतीय राजनीतिज्ञ तथा उड़ीसा राज्य के भूतपूर्व मुख्यमंत्री थे।
1899 – काज़ी नज़रुल इस्लाम – प्रसिद्ध बांग्ला कवि, संगीत सम्राट, संगीतज्ञ और दार्शनिक थे।

24 मई को हुए निधन
2000 – मजरूह सुल्तानपुरी, हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध गीतकार और शायर।
1999 – गुरु हनुमान – भारत के महान् कुश्ती प्रशिक्षक (कोच) व पहलवान।
1905 – प्रतापचंद्र मज़ूमदार – ब्रह्मसमाज के प्रसिद्ध नेता।
1990 – के. एस. हेगड़े- भारतीय विधिवेत्ता, राजनीतिज्ञ और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष
1879 – विलियम लायड गैरिसन – अमेरीकी दासता विरोधी आंदोलन के नेता
1543 – निकोलस कॉपरनिकस – प्रसिद्ध यूरोपिय खगोलशास्त्री व गणितज्ञ थे

24 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
राष्ट्रमंडल दिवस
विश्व तपेदिक दिवस


24 मई सन 1543 ईसवी को पोलैंड के विख्यात खगोलशास्त्री निकोलस कॉपरनीकस का 70 वर्ष की आयु में निधन हुआ।

माध्यमिक शिक्षा प्राप्ति के बाद उन्होने इटली में खगोल शास्त्र की शिक्षा प्राप्त की। कॉपरनीक्स ने अपनी आयु के अंतिम दिनों में अपनी विख्यात पुस्तक आकाश की चीजें लिखी। पुस्तक ने उस समय के खगोलशास्त्र के मत्र में क्रान्ति उत्पन्न कर दी। क्योंकि इस पुस्तक में उन्होंने विख्यात खगोलशास्त्री बत्लमयूस के बहुत से नियमों को नकार दिया था। वे योरोप के पहले विद्वान थे जिन्होंने इस बात का पता लगाया कि पृथ्वी सूरज के चारों ओर चक्कर काटती है। इससे कई शताब्दियां पहले ईरान के विद्वान अबु रेहान बीरुनी ने इस वास्तविकता का पता लगा लिया था। उन्होंने अपनी एक पुस्तक में इस ओर संकेत भी किया था।

24 मई सन् 1653 में जर्मन संसद ने फर्डिनेंड द्वितीय को ऑस्ट्रिया का राजा घोषित किया।
24 मई सन् 1798 में यूनाइटेड आयरिशमैन ने ब्रिटिश शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह की शुरुआत की।
24 मई सन् 1830 में अमेरिका में पहली बार यात्री रेलरोड सेवा की शुरुआत हुई।
24 मई सन् 1875 में सर सैय्यद अहमद खां ने अलीगढ़ में मुहम्मदीन एंग्लो ओरिएंटल स्कूल की स्थापना की जो वर्तमान में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के नाम से प्रसिद्ध है।
24 मई सन् 1883 में ब्रुकलिन और मैनहट्टन को जोड़ने वाले ब्रुकलिन ब्रिज को यातायात के लिए खोला गया।
24 मई सन् 1915 में थॉमस अल्वा एडिशन ने टेलीस्क्राइब का अविष्कार किया।
24 मई सन् 1930 में एमी जॉनसन नामक महिला ने अकेले विमान उड़ाकर लंदन से ऑस्ट्रेलिया पहुंची।
24 मई सन् 1985 में बांग्लादेश में आये चक्रवाती तूफान से दस हजार लोग मरे।
24 मई सन् 2002 में रूस और अमेरिका ने मास्को संधि पर हस्ताक्षर किया।
24 मई सन् 2004 में उत्तर कोरिया ने मोबाइल फोन पर प्रतिबंध लगाया।
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24 मई सन 1822 ईसवी को तीन शताब्दियों तक स्पेन के अतिग्रहण में रहने के बाद एकवाडोर देश को स्वतंत्रता मिली। एकवाडोर लैटिन अमेरिका का देश है जो वेनेज़ोएला के विख्यात क्रान्ति कारी नेता साइमन बोलिवर के प्रयासों से स्वतंत्र हुआ। और कोलम्बिया संघ में शामिल हो गया किंतु कुछ ही समय बाद यह संघ भंग हो गया और इसके सदस्य देश अलग हो गये। दूसरे देशों की भांति एकवाडोर ने भी प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था का चयन किया।

स्वतंत्रता के बाद एकवाडोर को अपने पड़ोसी देशों विशेषकर पेरू से कई लड़ाइयां लड़नी पड़ीं। यह देश दक्षिणी अमरीका महाद्वीप में स्थित है इसका क्षेत्रफल 2लाख 83 हजार वर्ग किलोमीटर है।

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24 मई वर्ष 1875 में भारत के नगर अलीगढ़ में मोहमडन एंगलो ओरियंटल स्कूल की स्थापना हुई। सर सैयद अहमद ख़ां वर्ष 1869 ईसवी में ब्रिटेन गये और वहां शिक्षा व्यवस्था का निकट से अध्ययन किया तो उनके मन में भारतीय मुसलमानों को आधुनिक शिक्षा से सुस्ज्जित करने की इच्छा उत्पन्न हुई स्वदेश वापसी के बाद एक ओर उन्होंने तहज़ीबुल अख़लाक़ के नाम से एक पत्रिका प्रकाशित किया तो दूसरी ओर एक एसी शिक्षण संस्था की स्थापना की योजना बनानी आरंभ की जहां विश्व के मुसलमान बच्चे नये ज्ञान हासिल कर सकें। अंततः 24 मई वर्ष 1875 ईसवी को मोहमडन एंगलो ओरियंटल स्कूल का उद्घाटन हुआ जिसमें जून वर्ष 1875 ईसवी को शिक्षा आरंभ हुई। लगभग दो वर्ष के बाद 8 जनवरी वर्ष 1877 को मोहमडन एंगलो ओरियंटल कालेज का आधार रखा गया और 17 दिसम्बर वर्ष 1920 को यही कालेज मुस्लिम विश्वविद्यालय का रूप धारण कर गया जो वर्तमान समय में भारतीय उप महाद्दुप का शिक्षा की एक महत्त्वपूर्ण संस्था है।

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24 मई वर्ष 1884 ईसवी को उर्दू भाषा के शायर,पत्रकार व साहित्यकार नियाज़ फ़त्हपूरी का जन्म हुआ। उन्होंने आरंभिक शिक्षा अपने पैतृक गांव फ़त्हपुर में प्राप्त की और फिर अपने पिता के साथ लखनऊ चले गये। शिक्षा पूरी होने के बाद पुलिस विभाग में काम करने लगे किन्तु वर्ष 1902 में पुलिस की नौकरी छोड़ कर अध्यापक बन गये। वर्ष 1915 ईसवी में वे भोपाल गये और वहीं से निगार पत्रिका आरंभ की। वर्ष 1927 में नियाज़ फ़त्हपुरी लखनऊ चले गये और वहां से निगार पत्रिका आरंभ की और फिर इस पत्रिका के चरम का नया चरण आरंभ हुआ। भारतीय उप महाद्वीप के विभाजन के बाद नियाज़ फ़त्हपुरी भारत में ही रहे और भारत सरकार ने उनकी महान सेवाओं को सराहते हुए उन्हें पद्मभूषण के सम्मान से सम्मानित किया। बाद में वे पाकिस्तान चले गये और कराची में रहे और वहां से निगार पत्रिका प्रकाशित करते रहे।

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24 मई सन 1991 ईसवी को जायोनी शासन ने सुलैमान सैनिक कार्रवाई करके इथोपिया के 14 हजार 400 यहूदियों को फिलिस्तीन पहुंचाया। इससे पहले भी जायोनी शासन ने मूसा कार्रवाइ करके हजारों इथोपियायी यहूदियों को फिलिस्तीन पहुंचाया था। यह यहूदी जायोनीशासन के अधिकारियों द्वारा उनकी आर्थिक स्थिति को अच्छा बनाने के वचन के बाद फिलिस्तीन गये। किंतु वहॉ आर्थिक स्थिति के बेहतर होने के बजाए उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है अब तक उन लोगों ने कई बार विरोध प्रदर्शन करके स्वदेश लौटने की मांग की है।

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24 मई सन 1993 ईसवी को पूर्वोत्तरी अफ्रीका का एरीट्रिया देश इथोपिया से स्वतंत्र हुआ। सन 1953 में इटली ने एरीट्रिया को जो इथोपिया का एक भाग समझा जाता था और जिस पर इटली ने सन 1936 में अधिकार किया था दोबारा इथोपिया को लौटा दिया। किंतु एरीट्रिया के अधिकांश लोगों ने जो स्वतंत्रता के इच्छुक थे इथोपिया के विरुदू संघर्ष आरंभ कर दिया। सन 1991 ईसवी में इथोपिया के स्वतंत्रता प्रेमियों और इथोपिया के क्रान्तिकारियों ने इथोपिया में हायला मरियम के 14 वर्षीय तानाशाही शासन का अंत कर दिया और फिर यह तय हुआ कि एरीट्रिया में जनमत संग्रह कराके इसके भविष्य का निर्धारण किया जाए। इस जनमत संग्रह में भाग लेने वालों ने एरीट्रिया को अलग देश बनाने के पक्ष में वोट डाले और यह देश फिर स्वतंत्र हो गया।

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24 मई वर्ष 1884 ईसवी को उर्दू भाषा के शायर,पत्रकार और साहित्यकार नियाज़ फ़त्हपूरी का जन्म हुआ। उन्होंने आरंभिक शिक्षा अपने पैतृक गांव फ़त्हपुर में प्राप्त की और फिर अपने पिता के साथ लखनऊ चले गये और शिक्षा पूरी होने के बाद पुलिस विभाग में काम करने लगे किन्तु वर्ष 1902 में पुलिस की नौकरी को छोड़ दिया और अध्यापक बन गये। वर्ष 1915 ईसवी में भोपाल गये और यहीं से निगार पत्रिका आरंभ की। वर्ष 1927 में नियाज़ फ़त्हपुरी लखनऊ चले गये और वहां से निगार पत्रिका आरंभ की और फिर इस पत्रिका के चरम का नया चरण आरंभ हुआ। हिंद महासागर के विभाजन के बाद भारत में ही रहे और भारत सरकार ने उनकी महान सेवाओं को सराहते हुए उन्हें पद्मभूषण के सम्मान से सम्मानित किया। फिर वह पाकिस्तान चले गये और कराची में रहे और वहां से निगार पत्रिका प्रकाशित करते रहे।

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आज पहली शौवाल ईद है यह इस्लाम धर्म में बड़ी ख़ुशियों वाला दिन है। इस दिन मुसलमान जश्न मनाते हैं। इस्लाम के नियमानुसार फिरा अर्थात निर्धनों की सहायता के लिए निर्धारित मात्रा में अनाज या उसका मूल्य ग़रीबों को देते हैं।

पैग़म्बर इस्लाम स ने इस दिन के बारे में कहा है लोगों आज वो दिन है जिसमें सहदाचारियों को उपहार और मेहनताना मिलता है। और दुराचारियों को हानि होती है। रमज़ान के महीनें में रोज़ा रखने वालो को इस दिन फरिशता शुभसूचना देता है कि मुम्हारे पिछले पाप और गलतियां ईश्वर ने क्षमा कर दीं। तो अब सावधान रहो अपनी शेष आयु में ईश्वर को प्रसन्न करने का प्रयास करो।

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