इतिहास

3 मई का इतिहास : 9 रमज़ान सन 853 हिजरी क़मरी को विश्व विख्यात खगोल शास्त्री उलुग बेग का निधन हुआ!

ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 3 मई वर्ष का 123 वाँ (लीप वर्ष में यह 124 वाँ) दिन है। साल में अभी और 242 दिन शेष हैं।

3 मई की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
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1919 – अमानुल्ला खान द्वारा ब्रिटिश भारत पर आक्रमण।
1998 – ‘यूरो’ को यूरोपीय मुद्रा के रूप में स्वीकार करने का यूरोपीय नेताओं का ऐतिहासिक फैसला।
2002 – अमेरिकी मीडिया ने परवेज मुशर्रफ़ के जनमत संग्रह को ‘शर्मनाक जनमत संग्रह’ बताया।
2003 – आस्ट्रेलिया के स्टीव वॉ टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बने।
2004 – वेस्टइंडीज ने छठे एक दिवसीय मैच में इंग्लैंड को चार विकेट से परास्त किया।
2006 – पाकिस्तान और ईरान ने 3 देशों की गैस पाइप लाइन परियोजना से भारत को अलग करने के उद्देश्य से द्विपक्षीय गैस पाइप लाइन करार पर दस्तखत किए। शिक्षाविद कमलेश पटेल को ब्रिटेन के हाउस आफ़ लार्ड्स में ग़ैर दलीय पीयर नियुक्त किया गया।
2008 -टाटा स्टील लिमिटेड को ब्रिटेन में कोयला खनन करने का पहला लाइसेंस प्राप्त हुआ।
पाकिस्तानी जेल में सज़ा काट रहे भारतीय क़ैदी सरबजीत सिंह की फाँसी की सज़ा अनिश्चित समय तक टाली गई। नेपाली प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला संविधान सभा के लिए चुने गये। दक्षिणी चिली के लास लगासे क्षेत्र में हज़ारों साल से निष्क्रिय पड़ा एक ज्वालामुखी फटा।
2016- 63वें राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्‍कारों की घोषणा; मनोज कुमार, अमिताभ बच्चन और कंगना रानौत हुए सम्मानित।

3 मई को जन्मे व्यक्ति
1977 – मरियम मिर्ज़ाख़ानी – गणित की दुनिया का प्रतिष्ठित सम्मान ‘फील्ड्स मेडल’ पाने वाली पहली महिला गणितज्ञ थीं।
1896 – वी. के. कृष्ण मेनन – भारतीय राष्ट्रवादी, राजनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ और भारत के पूर्व रक्षा मंत्री।
1935 – सी. के. जैन – भूतपूर्व लोकसभा महासचिव हैं।
1930 – सुमित्रा सिंह – राजस्थान की प्रसिद्ध महिला राजनीतिज्ञ।
1955 – उमा भारती – प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ
1955 – रघुवर दास – झारखण्ड के छठवें मुख्यमंत्री
1951 – अशोक गहलोत – प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ

3 मई को हुए निधन
1969 – डाक्टर ज़ाकिर हुसैन – भारत के तीसरे राष्ट्रपति (जन्म 1897)
1981 – नर्गिस – भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री
2005 – जगजीत सिंह अरोड़ा, भारतीय सेना के कमांडर
2006 – प्रमोद महाजन – भारत के राजनीतिज्ञ (जन्म 1949)

3 मई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता दिवस

3 मई सन 1429 ईसवी को फ़्रांस की देश भक्त संत जोन ऑफ़ आर्क ने फ़्रांस के कुछ क्षेत्रों के ब्रिटेन के अतिग्रहण से निकालने के लिए अपना ऐतिहासिक विद्रोह आरंभ किया।

उन्होंने ने उस सेना की कमान संभाली थी जो फ़्रांस के नरेश ने उनके हवाले की थी। उन्होंने साहस के साथ युद्ध किया और ब्रिटेन की सेना को उत्तरी फ़्रांस के ओरलियान क्षेत्र से बाहर खदेड़ दिया।

पेरिस पर अधिकार का प्रयास करते समय जोन ऑफ़ आर्क गिरफ़तार कर ली गयीं। उनपर ब्रिटेन के एक गिरजाघर में दिखावटी मुकद्दमा चला। उन पर गिरजाघर ने नास्तिक और जादूगर होने का आरोप लगाया। इस आरोप के कारण सन 1431 ईसवी में 19 वर्ष की आयु में उन्हें ज़िन्दा जला दिया गया। इस प्रकार जोन ऑफ़ आर्क फ़्रांस की महानायिका बन गयीं। उनकी याद में फ़्रांसीसी हर वर्ष मई के महीने में समारोह का आयोजन करते हैं।

3 मई सन् 1616 को लाऊंदू समझौते के बाद फ्रांस का गृहयुद्ध समाप्त हुआ।
3 मई सन् 1660 में स्वीडन, पोलैंड, ब्रैंडेनबर्ग और ऑस्ट्रिया ने ओलिवा शांति समझौते पर हस्ताक्षतर किये।
3 मई सन् 1765 को यूएस का पहला मेडिकल कॉलेज फिलाडेलफिया में खुला।
3 मई सन् 1830 में दुनिया में भाप इंजन से चलने वाली पहली नियमित यात्री रेलगाड़ी चलनी शुरू हुई।
3 मई सन् 1837 में एथेंस विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।
3 मई सन् 1845 में चीन के कैंटन में थियेटर में आग लगने से 1600 लोगों की मौत हुई।
3 मई सन् 1913 को पहली भारतीय फीचर फिल्म राजा हरिश्चन्द्र प्रदर्शित हुई।
3 मई सन् 1919 को अमेरिका में पहली यात्री उड़ान न्यूयार्क और अटलांटिक सिटी के बीच संचालित हुई।
3 मई सन् 1939 में नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की।
3 मई सन् 1945 में प्रसिद्ध जर्मन भौतिकशास्त्री वर्नर हाइजनबर्ग को गिरफ्तार किया गया।
3 मई सन् 1947 में विश्व युद्ध के बाद जापान में नया संविधान लागू हुआ।
3 मई सन् 1961 में कमांडर ऐलन शेपर्ड अंतरिक्ष में जाने वाले पहले अमरीकी यात्री बने।
3 मई सन् 1965 में कंबोडिया ने अमेरिका के साथ राजनयिक संबंध समाप्त किए।
3 मई सन् 1993 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की घोषणा की थी।
3 मई सन् 1998 में ‘यूरो’ को यूरोपीय मुद्रा के रूप में स्वीकार करने का यूरोपीय नेताओं का ऐतिहासिक फैसला हुआ।
3 मई सन् 2002 में अमेरिकी मीडिया ने परवेज़ मुशर्रफ़ के जनमत संग्रह को ‘शर्मनाक जनमत संग्रह’ बताया।
3 मई सन् 2008 में टाटा स्टील लिमिटेड को ब्रिटेन में कोयला खनन करने का पहला लाइसेंस प्राप्त हुआ।
3 मई सन् 2008 को दक्षिणी चिली के लास लगासे क्षेत्र में हज़ारों साल से निष्क्रिय पड़ा एक ज्वालामुखी फटा।
3 मई सन् 2013 में चीन में लगभग 16 करोड़ साल पुराना डायनासोर का जीवाश्म मिला।
3 मई सन 1701 ईसवी को फ़्रांस के गणितज्ञ और विख्यात पर्यटक कोन्डामैन का पेरिस में जन्म हुआ। युवाकाल में उन्हें गणित और भूगोल के विषयों से गहरा लगाव था। इस क्षेत्र में अपने अध्ययनों और कडे परिश्रम से उन्होंने स्वंय को विद्वानों की पंक्ति में शामिल कर दिया।

सन 1774 ईसवी में कोन्डामैन का निधन हुआ।

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3 मई सन 1968 ईसवी को पेरिस में फ़्रांसीसी छात्रों का व्यापक आंदोलन आरंभ हुआ। इन फ्रांसीसी छात्रों को सरकार की शिक्षा संबंधी नीतियों पर आपत्ति थी। थोड़े ही समय बाद फ़्रांस के श्रमिक भी जो अपनी कम मज़दूरी से अप्रसन्न थे छात्रों के अभियान में शामिल हो गये। इस आंदोलन ने बड़ी तेज़ी के साथ राजनैतिक रूप धारण कर लिया और दूसरे देशों जैसे जर्मनी, ब्रिटेन, इटली, स्पेन और अमरीका में भी इसका गहरा प्रभाव हुआ।

विरोधी छात्रों की मांग थी कि कम आय वाले वर्ग के हित में सामाजिक सुधार किये जाएं तथा योरोप में अमरीका का प्रभाव कम किया जाए।

मई महीने के अंत तक इस आंदोलन के चलते फ़्रांस में ढेरो प्रदर्शन और हड़तालें हुई और पुलिस के हस्तक्षेप से हिंसात्मक घटनाएं भी घटीं।

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तीन मई वर्ष 1525 ईसवी को पुर्तगाली युद्धपोट ने ईरान के द्वीप हुर्मुज़ पर आक्रमण करके इसे अपने नियंत्रण में ले लिया। इसके साथ ही मध्यपूर्व में पश्चिमी साम्राज्य के हस्तक्षेप का काल आरंभ हो गया। यह द्वीप फ़ार्स की खाड़ी को ओमान सागर से मिलाता है। उस समय तक चूंकि ईरान की नौसेना अनुभवी तथा आधुनिक शस्त्रों से लैस नहीं थी इसलिए पुर्तगाली साम्राज्य ने 1521 ईसवी तक ईरान के फ़ार्स की खाड़ी में स्थित अन्य द्वीपों पर भी नियंत्रण जमाए रखा। पुर्तगाली साम्राज्य के इस क़ब्ज़े और उसकी ओर से किए जाने वाले षड्यंत्रों के विरुद्ध ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में जनत के मध्य आक्रोश फैल गया और जनता ने इस के विरुद्ध आवाज़ उठाई। अंततः ईरान की नौसेना के गठन और उसके सशक्तिकरण के बाद वर्ष 1652 ईसवी तक ईरान के समस्त द्वीप धीरे धीरे पुर्तगाली वर्चस्व से छुड़ाए गये।

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तीन मई वर्ष 1449 ईसवी को क्रिस्टोफ़र कोलंबस ने अपनी शोध यात्रा के तीसरे चरण में जमाइका द्वीप का पता लगाया और उसको स्पेन का एक भाग बना दिया। दो शताब्दियां गुज़रने के बाद यह द्वीप ब्रिटिश साम्राज्य के नियंत्रण में चला गया और ब्रिटिश संसद ने वहां अपने दृष्टिगत एक सरकार का गठन कर दिया। वर्ष 1962 में इस द्वीप की सरकार गवर्नर जनरल दारा सेचालित सरकार में परिवर्तित हो गयी। उसका क्षेत्रफल ग्यारह हज़ार वर्गकिलोमीटर है और यह कैरेबियन सागर के उत्तर और क्यूबा के दक्षिण में स्थित है। किंग्स्टन इसकी राजधानी है।

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तीन मई वर्ष 2010 को जापान की निसान कंपनी के साथ मिलकर बजाज रेनो नामक छोटी कार बनाने वाली कंपनियों बजाज ऑटो व फ्रांस की रेनॉल्ट ने अपनी छोटे कार के मूल्य टाटा की नैनो से भी कम 2500 डॉलर अर्थात् लगभग 1.10 लाख रूपए रखने का निर्णय किया।

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14 उर्दीबहिश्त सन 1362 हिजरी शम्सी को ईरान में इस्लामी क्रान्ति के विरुद्ध विद्रोह की पूर्व सोवियत संघ की योजना में ईरान के तूदे दल की भूमिका का भांडाफोड़ होने के बाद यह पार्टी भंग हो गयी। ईरान में अपने हितों का अंत होता देख पूर्व सोवियत संघ ने ईरान के भीतर अपने पिट्ठुओं के सहारे विद्रोह करवाकर इस्लामी शासन व्यवस्था को समाप्त करने का प्रयास किया किंतु सेना में मोमिन अर्थात दृढ़ विश्वास रखने वाले तत्वों की पैनी नजरों ने इस षडयंत्र को भांप कर इसे विफल बना दिया।

यह दल सन, 1320 हिजरी शम्सी में कम्युनिज़्म की ओर झुकाव के साथ अस्तित्व में आया और थोड़े ही समय में यह दल ईरान में सोवियत संघ के वकील के रुप में परिवर्तित हो गया। इसी कारण जनता ने उसका कभी स्वागत नहीं किया।

बाद में जांच पड़ताल से पता चला कि इस दल के तेहरान में रुसी राजदूत से निकट संबंध थे और रुसी राजदूत ही इस दल की केंद्रीय समिति के निर्णयों की अंतिम पुष्टि किया करते थे। यह पता चलने के बाद ईरान ने रूस के 18 राजनयिकों को बाहर निकाल दिया था।

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9 रमज़ान वर्ष 1325 हिजरी क़मरी को ईरान के एक वरिष्ठ धर्मगुरू आयतुल्लाह शैख़ मुहम्मद बहारी हमदानी का निधन हुआ। वे 13 वीं और १४वीं हिजरी क़मरी के वरिष्ठ धर्मगुरू और विख्यात तत्वदर्शी थे। आरंभिक शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात आयतुल्लाह शैख़ मुहम्मद बहारी हमदानी उच्च शिक्षा की प्राप्त के लिए पवित्र नगर नजफ़ गए। वहां पर वरिष्ठ धर्मगुरूओं से शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने पढ़ाने का कार्य आरंभ किया। उनकी रचनाओं को तज़केरतुल मुत्तक़ीन नामक संग्रह में एकत्रित किया गया है।

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9 रमज़ान सन 853 हिजरी क़मरी को विख्यात खगोल शास्त्री उलुग बेग का निधन हुआ। उनका जन्म सन 796 हिजरी क़मरी में ईरान के पश्चिमी नगर सुल्तानिया में हुआ उनका पालन पोषण तैमूरी शासन श्रृंखला की नींव डालने वाले उनके दादा तैमूर के दरबार में हुआ। 16 वर्ष की आयु में उनहें मेसोपोटामिया के क्षेत्र का गवर्नर नियुक्त किया गया जो उस समय ईरान का भाग था। तैमूर के विपरीत उलुग़ बेग को सीमा विस्तार से कोई लगाव नहीं था वे अधिकतर समय अध्ययन और अनुसंधान में लगे रहते थे। उन्होंने एक स्कूल की स्थापना की जहॉं खगोल शास्त्र को बहुत अधिक महत्व दिया जाता था। उन्होंने सन 828 हिजरी क़मरी में इस्तंबूल में वेधशाला का निर्माण करवाया। खगोल शास्त्र में उनके बहुत से शोध आज भी माने जाते हैं।

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