विशेष

Zee के आतंकवादी कोरोना फैला रहे है : Zee न्यूज़ जीता जागता कॅरोना बम है!

Shamsher Ali Khan
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एक और कथा
#send_hindus_back_to_modi के अंतर्गत

ये प्रोफ़ेसर नीरज बेदी हैं। ये सउदी अरब के जज़ान यूनिवर्सिटी में कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रोफ़ेसर थे और एपिडीमीआलजी के हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट थे। इनकी सैलरी 35000/- सउदी रियाल यानी लगभग 700000/- (सात लाख) रुपए प्रतिमाह थी। सउदी अरब में रहकर ये बहुत अच्छे से कमा-खा रहे थे। कोरोना संक्रमण के बाद भारतीय मीडिया ने मुसलमानों के ख़िलाफ़ जो नफ़रत का बीज बोया था उस ने प्रोफ़ेसर नीरज बेदी जैसे पढ़े लिखे इंसान के दिल में भी असर करना शुरू कर दिया। और प्रोफ़ेसर नीरज बेदी उस ज़हर को अपने ट्विटर हैंडल पर उगलने लगे। ये मीडिया द्वारा पैदा किए गए भ्रम में पड़कर मुसलमानों और इस्लाम धर्म के ख़िलाफ़ ट्वीट करने लगे। जिसका नतीजा ये हुआ की ये जल्द ही नज़र में आ गए।

जब इनकी शिकायत सउदी अरब के जज़ान यूनिवर्सिटी में पहुँची तो जज़ान यूनिवर्सिटी ने इनको नौकरी से निकाल दिया है। अब ये भारत लौटने की तैयारी कर रहे हैं। जैसे ही सउदी से भारत के लिए फ़्लाइट ओपन होगी इन्हें भारत भेज दिया जाएगा।

लेकिन सवाल ये हैं की प्रोफ़ेसर नीरज बेदी जैसे न जाने कितने और भी लोग हैं जो सोशल मीडिया पर नफ़रत फैलाने के कारण अपनी अच्छी ख़ासी नौकरी से हाथ धो चुके हैं। कभी गौर कीजिएगा की इसके ज़िम्मेदार कौन लोग हैं। क्या आपको नहीं लगता की टीवी स्टूडियो में बैठकर दिन-रात हिंदू मुस्लिम पर डिबेट करने वाले गोदी मीडिया के कोट-पैंट और टाई वाले बौद्धिक आतंकवादी इस सब के ज़िम्मेदार नहीं हैं ?? या यहाँ भारत में रह रहे स्वघोषित “कट्टर हिंदू” जो दिन रात सोशल मीडिया के माध्यम से नफ़रत फैलाते हैं वो इस सब के ज़िम्मेदार नहीं हैं ??? यही वो लोग हैं जो दिन रात हिंदू-मुस्लिम करके लोगों के दिलों में ज़हर भरते हैं और प्रोफ़ेसर नीरज बेदी जैसे असंख्य लोग इनकी इस नफ़रत में अपना बहुत कुछ गँवा बैठते हैं।

Ravish Kumar

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जी न्यूज़ के 28 मीडियाकर्मियों के कोविड 19 से संक्रमित होने की ख़बर सुनी। अच्छा नहीं लगा। सभी के जल्द से जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ। इस वक्त उनके परिवार के सदस्य भी तनाव और घबराहट में होंगे। उन सभी की चिन्ता है। भरोसा रखना चाहिए कि सब जल्दी ठीक होगा।

आगरा से भी पत्रकार साथियों के संक्रमित होने की ख़बर ने चिन्ता में डाला था। उम्मीद है वे सभी अब ठीक हो चुके होंगे।

मीडियाकर्मी अपनी तरफ़ से खूब सावधानी बरतें। इस वक्त बहादुरी का एक ही मतलब है। सावधानी और सुरक्षा। इससे कोई समझौता न करें। उन्हें भी सतर्कता में ढील नहीं देनी है जो बाहर नहीं जा रहे हैं। इस महामारी में आफिस जाने वालों में हो सकता है कि यह भावना आ जाए कि कुछ नहीं होगा। बस यहीं से हमारी सतर्कता कमजोर पड़ने लगती है। सफ़ाई और देह से दूरी बरतने में कोई संकोच न करें। यह सही है कि कोई कब तक करे, यह भाव मन में आ सकता है। जब भी यह भाव आए, अपने मन को याद दिलाइये कि अब हमेशा करना है। कोरोना योद्धा वह है जो पहले खुद सतर्क है। एक बार फिर से सभी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूँ।

 

Naveen Singh Payaal

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ZeeNews में शुक्रवार को पहला कोरोना पेसेंट मिला। लेकिन कंपनी बंद नहीं हुईं उल्टा CEO ने बाकी कर्मचारियों को मेल भेज के काम पे बुलाया।

नॉएडा की ही सीजफायर कम्पनी में पेसेंट मिला, कंपनी सील हुईं, सारे कॉन्टेक्ट तुरँत कोरन्टाइन करके जांचे गए।
आगरा, पारस हॉस्पिटल में पेसेंट मिला, उसने हॉस्पिटल 2 दिन बंद नहीं किया तो उसपे फिर हुईं और हॉस्पिटल सील हुआ।

ZeeNews में सुना है 2500 कर्मचारी काम करते हैँ, कॉन्ट्रेक्ट बेसिस, फ्रीलांसर अलग। मात्र 51 के टेस्ट में 28-29 पॉजिटिव आ गए आगे कहानी बाकी है। इन सबका जिम्मेदार ZeeNews और उसका मालिक सुभाष चंद्रा पर केस क्योँ नहीं होना चाहिए ? ऑफिस बंद करने की बजाय सुधीर चौधरी ट्विटर ट्रेंड करा रहा है ? इसपे देश के क़ानून लागू नहीं होते ?

#कालचक्र

Rajender Chauhan Journalist
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उज्ज्वला योजना के तहत तीन माह जरूरतमंदों को मिलेंगे निःशुल्क सिलेंडर।
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भिवानी हलचल/लोहारू
18 मई ।वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के दौरान उज्ज्वला योजना के तहत समाज के गरीब परिवारों को अप्रैल-मई-जून माह के दौरान घरेलू रसोई गैस कनेक्शन धारकों को नि:शुल्क सिलेंडर मिलेंगे। जिसके तहत सभी पात्र कनेक्शन धारकों के बैंक खातों में प्रतिमाह राशि भेजी जा रही है। जिससे कनेक्शन धारक संबंधित एजेंसी पर भुगतान कर अपना सिलेंडर प्राप्त कर सकता है।

जिला भिवानी में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के 46473 उपभोक्ता लाभार्थी है
ज़िला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस की योजना के तहत जिला भिवानी में 46473 माताएं-बहनें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत रसोई गैस कनेक्शन धारक है। जिला में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार की हिदायतों के अनुसार लॉकडाउन की घोषणा की गई है। जिसके चलते गरीब व जरूरतमंद परिवारों के घरों में खाने-पीने की कमी न हो, घर का चूल्हा जलता रहे इसके लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना कारगर साबित हो रही है। इस योजना के तहत अप्रैल, मई और जून माह के लिए सिलेंडर रिफील कराने के लिए सरकार की ओर से उपभोक्ताओं को राशि प्रतिमाह भेजी जाएगी।

हर महीने उठाना होगा योजना का लाभ:-
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर संदीप श्योराण ने बताया कि इस योजना के तहत अप्रैल माह की राशि संबंधित उपभोक्ताओं के खाते में भेजी जा चुकी है। जिस उपभोक्ता ने इस राशि से अप्रैल माह में अपना सिलेंडर रिफील करा लिया उन्हीं उपभोक्ताओं को मई माह के लिए राशि जारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि जिला के सभी एलपीजी वितरकों को आदेश जारी कर दिए है कि उज्ज्वला योजना के लाभाॢथयों को अधिक से अधिक इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया जाए। इस योजना के तहत सरकार ने तीन माह तक गैस सिलेंडर रिफील कराने में मदद का निर्णय लिया ताकि उपभोक्ता को लॉकडाउन में घर के चूल्हा-चौका की चिंता न करनी पड़े।
शाहिद रामकुमार गैस सेवा के संचालक देवेंद्र लं।बा व साहिल गैस एजेंसी के संचालक पवन कुमार ने बताया कि सभी उपभोक्ताओं को इस योजना के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि वे इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठा सके । उन्होंने अनुरोध किया कि वे प्रति माह इस योजना का लाभ उठाएं । सभी उपभोक्ताओं को नियमानुसार गांव मेष डिलीवरी दी जा रही है।
सरकार की मदद से रसोई की चिंता खत्म:-
लॉकडाउन के दौरान घर की आमदनी प्रभावित होने का सबसे ज्यादा असर रसोई पर पड़ता है लेकिन सरकार की इस योजना ने चूल्हा जलाने की चिंता को खत्म कर दिया है। यह मानना है सुनीता का । उसने बताया कि सरकार की इस योजना से अब तीन महीने तक सिलेंडर के खर्च से निजात मिली है। संतोस, बाला, मोनिका , ममता आदि ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत उन्होंने सिलेंडर रिफिल कराया है। सरकार से मिली मदद के जरिए इस बार सिलेंडर भरवाने में एक रुपया भी खर्च नहीं करना पड़ा ।सरकार ने गरीबो के हितों का ख्याल रखा है ।
ब्लॉक अनुसार ज़िले में एजेंसी व उपभोक्ता इस प्रकार से हैं,
1. भिवानी —- एजेंसी –11, उपभोक्ता –9974
2. बवानीखेड़ा– एजेंसी — 03, उपभोक्ता –6442
3. सिवानी — एजेंसी — 02, उपभोक्ता — 6461
4. लोहारू — एजेंसी — 02, उपभोक्ता — 4280
5. तोशाम — एजेंसी — 03, उपभोक्ता — 9196
6. केरु — एजेंसी — 03, उपभोक्ता — 5396
7. बहल — एजेंसी — 01, उपभोक्ता — 5051\\


Sikander Kaymkhani
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Zee news के आतंकवादी कोरोना फैला रहे है न्यूज़ एंकर की शक्ल में

Zee न्यूज़ के रिपोर्टर जीता जागता कॅरोना बम है

Zee न्यूज़ पर देश द्रोह का मुकदमा हो

ज़ी न्यूज़ ने फैलाया भारत मे कोरोना

Zee न्यूज़ कर रही है अपने रिपोर्टरो के जरिए पूरे भारत मे कोरोना का प्रसार

Zee न्यूज़ को बन्द कर दिया जाए

पूरी zee न्यूज़ के कर्मचारियों को corontine सेंटर भेजा जाना चाहिये

ज़ी न्यूज़ के 28 कर्मचारी कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं।

● क्या ज़ी के कर्मचारी नहीं कर रहे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन?
● 2 दिन पहले खबर लीक हुई थी कि ज़ी का एक कर्मचारी पॉज़िटिव है। फिर किस साज़िश के तहत 2 दिन तक छुपाने की कोशिश की गई? क्या उसी छुपाने की कोशिश की वजह 28 लोगों तक पहुंचा कोरोना?
● क्या जी के स्टूडियो में नहीं हो रहा था सोशल डिस्टेंसिंग के गाइडलाइंस का पालन
● कितनों के सम्पर्क में आये थे यह 28 लोग?

कहीं यह सब देश विरोधी एक बड़ी साजिश का हिस्सा तो नहीं है?

ज़ी के मालिक पर देशद्रोह का मुकदमा लगना चाहिए और पूछताछ की जानी चाहिए कि जानकारी क्यों छुपाई गई।


Skand Shukla
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लगातार शोध सिद्ध कर रहे हैं कि हायड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के सेवन से कोविड-19 में कोई लाभ नहीं हो रहा। ( बल्कि कई बार हानि भी हो रही है। ) लेकिन एक महीने पहले ही इस दवा पर साधुवाद का इतना चढ़ावा चढ़ा दिया गया कि न जाने कितने ही लोगों ने इसे खरीदकर घरों में रख लिया और कुछ मूर्खों ने कई दिन तक खाया भी। ध्यान रहे , ये वे लोग हैं जो किसी भी प्रकार से कोविड-रोगियों के सम्पर्क में ही नहीं हैं। फिर भी ये घरों में हाइड्रोक्सीक्लोरक्वीन खरीदकर रख रहे थे। इनमें से कई डॉक्टर भी थे , जिनकी विवेकहीनता आश्चर्यजनक रूप से आसमानी है।

मैं और मेरे-जैसे र्यूमैटोलॉजिस्ट हायड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का सर्वाधिक प्रयोग करते हैं। र्यूमैटॉयड आर्थ्राइटिस , एसएलई व अनेक अन्य ऑटोइम्यून रोगों के हमारे मरीज़ों यह दवा मिल नहीं पा रही। रोज़ अनेक लोग फोन करते हैं और बताते हैं कि किस तरह मेडिकल स्टोरों पर भटकने के बाद भी यह दवा कहीं उपलब्ध नहीं।

अधूरा-अधपका ज्ञान तब ज़हर बन जाता है , जब वह डॉनल्ड ट्रम्प जैसे मदान्ध नेता के मुँह से झरता है। लोग उसके कहे को ही सच मानते हैं , ज्ञानी वैज्ञानिकों की नहीं सुनते।

कोविड-19 में हायड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का लगातार फ़ेल होना मदान्ध-मूर्ख नेता और अकुलायी विवेकहीन जनता के दुस्सम्बन्ध का नवीनतम उदाहरण है।

डिस्क्लेमर : इस आलेख/post/twites में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. लेख सोशल मीडिया फेसबुक पर वायरल है, इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति तीसरी जंग हिंदी उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार तीसरी जंग हिंदी के नहीं हैं, तथा तीसरी जंग हिंदी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है

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