साहित्य

कोई बजुर्ग महिला अर्धनग्न अवस्था मे सड़क पर घूम रही है

Progressive DALIT
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अपनी सलवार को बाएं हाथ से थामे वो बुज़ुर्ग महिला चलती जा रही थी कच्चा टैंक के फुटपाथ पे, मनोरोगी प्रतीत होती थी। विचलित कर देने वाला दृश्य था। हमारे समाज के ये अभागे सदस्य जो मनोरोगी हो जाते हैं, नग्न घूमते हैं, कूड़ेदान में से खाते पाए जाते हैं, किस की ज़िम्मेदारी होने चाहिए? मैंने गुंनुघाट पुलिस चौकी में फोन किया, बताया कि ऐसे कोई बजुर्ग महिला अर्धनग्न अवस्था मे सड़क पर घूम रही है, वो बोले आप किसी NGO से सम्पर्क करो, हमारे पास प्रावधान नहीं है। शिमला आकर मैंने RTI के तहत सूचना मांगी, क्योंके ये उस व्यक्ति की सुरक्षा से सम्बंधित था और पुलिस ही वो संस्था है जिसे ऐसी परिस्थिति में एक्शन लेना चाहिए। पता चला इस देश मे एक मेन्टल हेल्थ एक्ट भी है जिसमे पुलिस को निर्देश है कि ऐसे असहाय मनोरोगियों को सुरक्षा में लेकर अदालत से उनकी चिकित्सा और पुनर्वास सम्बंधित आदेश लें। मगर पुलिस को ये समझाना सम्भव नहीं लगा, मैंने मुख्य न्यायाधीश महोदय को एक पत्र लिखा, समस्त तथ्यों सहित मैंने प्रार्थना की कि मेरे पत्र को जनहित याचिका करार देते हुए असहाय मनोरोगियों की सुरक्षा की जाए। कुछ ही दिनों में समाचार पत्रों में खबर आई कि हिमाचल हाई कोर्ट ने प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि सभी असहाय मनोरोगियों को सुरक्षा में लेकर उपचार हेतु अदालत में पेश करें। मेरे पत्र को जनहित याचिका करार दिया गया था (CWPIL 18/ 2011) पूरे प्रदेश में बहुत से मनोरोगियों को सुरक्षा में लिया गया और उन्हें मनोचिकित्सा हेतु मनोरुग्नल्या में दाखिल किया गया, और आज भी किया जा रहा, मेरे अंदर का एक्टिविस्ट बहुत खुश था, हम सभी के अंदर ये एक्टिविस्ट होता है जो कि परिस्थिति विशेष में सक्रिय हो उठता है। ज़रूरत है उसको जगाने की। प्रार्थना है कि यदि किसी मनोरोगी को असहाय आवारा घूमते देखें तो तुरंत पुलिस को सूचना दें, और उपरोक्त प्रावधानों के तहत उनके लिए सुरक्षा की मांग करें।

#मनोरोगी #नाहन #MentalhealthAct

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