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गृहयुद्ध और विभाजन की ओर जा रहा है अमरीका : ट्रम्प ख़ुद एक संकट है : रिपोर्ट

अमरीका के मशहूर राजनैतिक टीकाकार थामस फ़्रेडमैन ने कहा कि अमरीका इस समय गृह युद्ध की ओर जा रहा है और बदक़िस्मती यह है कि इस समय अब्राहम लिंकन जैसा राष्ट्रपति नहीं है।

न्यूयार्क टाइम्ज़ में छपने वाले अपने लेख में थामस फ़्रेडमैन ने लिखा कि अमरीका के आने वाले राष्ट्रपति चुनावों को लेकर उन्हें बड़ी गहरी चिंता है, अमरीका के भविष्य को लेकर सबसे ख़तरनाक विकल्प इस समय व्यवहारिक हो चुका है, अब मुझे यक़ीन नहीं रहा कि शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता का हस्तांतरण हो पाएगा और नवम्बर में पारदर्शी चुनावों का आयोजन होगा।

पिछले हफ़्ते से चल रहे प्रदर्शनों के बारे में राष्ट्रपति ट्रम्प का रवैया बेहद आपत्तिजनक रहा है, इस समय अमरीका विभाजन के ख़तरे में आ गया है और ट्रम्प को यह रणनीति सुझायी दी कि उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस से हमला करवा दिया और पुलिस ने पूरी ताक़त इस्तेमाल करके प्रदर्शनकारियों को इसलिए हटाया कि ट्रम्प वाइट हाउस के क़रीब मौजूद चर्च में जा सकें और सामने खड़े होकर तसवीरें खिंचवा लें।

ट्रम्प ने बाइबल और चर्च का भी अपमान किया क्योंकि उन्होंने बाइबल की एक भी पंक्ति नहीं पढ़ी और चर्च के भीतर क़दम नहीं रखा। ट्रम्प ने बस हाथ में बाइबल पकड़ी और तसवीरें खिंचवा कर ख़ुश हो गए। इस तरह शायद बाइबल पर आस्था रखने वाले गोरों का उन्हें समर्थन मिल जाए।

हमें अब वह नेतृत्व कहां से मिलेगा जिसकी बहुत ज़्यादा ज़रूरत है और जो वर्तमान हालात के असली कारणों से निपटने में सक्षम हो।

सेनेट में रिपब्लिकन सांसदों से तीन साल पहले यह उम्मीद थी कि वह ट्रम्प पर लगाम लगा सकेंगे मगर यह उम्मीद भी बेबुनियाद साबित हुई। यह सांसद भी किराए के टट्टू बनकर रह गए हैं उसके लिए काम करते हैं जो सदन के भीतर बने रहने में इन सेनेटरों की मदद करें और उनके आर्थिक हितों का ख़याल रखें।

फ़ेसबुक के सीईओ मार्क ज़ुकरबर्ग वास्तव में राबर्ट मरदोख़ की तरह हो गए हैं वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नाम लेकर अपने कायरतापूर्ण विकल्प का तर्क देते हैं जबकि उनकी नज़रें सिर्फ़ कमाई पर टिकी हुई हैं।

इन हालात में वाइट हाउस पर तो कोई भरोसा नहीं किया जा सकता कि वह इस संकट को कंट्रोल करने के संदर्भ में कुछ करेगा क्योंकि ट्रम्प तो ख़ुद संकट का हिस्सा बन गए हैं इसलिए अब ज़रूरी हो गया है कि ट्रम्प को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया जाए अब केवल आर्थिक क्षेत्र की बड़ी हस्तियों से और नए उभरते स्थानीय नेताओं से ही उम्मीद रह गई है कि वह कुछ करें।

स्रोतः न्यूयार्क टाइम्ज़+अलजज़ीरा

ट्रम्प पर लगा अबतक सबसे बड़ा आरोप, अमेरिकी के पूर्व रक्षा मंत्री के बयान से मचा हड़कंप

अमरीका के पूर्व रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प पर आरोप लगाया है कि वे देश में विभाजन की आग भड़का रहे हैं और अपने पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा कि ट्रंप ने जिस तरह हालिया घटनाओं को हैंडल किया है, उससे वे नाराज़ हैं और आश्चर्यचकित भी हैं। मैटिस ने कहा कि ट्रम्प के रवैये से ऐसा लगता है कि वह अमेरिका को टुकड़ों में बांटना चाहते हैं। बता दें कि सीरिया से अमरीकी सैनिकों को हटाने के ट्रम्प के फ़ैसले के बाद जेम्स मैटिस ने साल 2018 में अपना पद छोड़ दिया था। उसके बाद से वे ज़्यादातर मामलों में ख़ामोश ही रहे हैं। लेकिन बुधवार को द अटलांटिक मैगज़ीन में उन्होंने ट्रम्प सरकार पर जमकर अपनी भड़ास निकाली। इस बीच मैटिस के बयान से ग़ुस्साए ट्रम्प ने कई ट्वीट्स किए और दावा किया कि उन्होंने जेम्स मैटिस को हटाया था। एक ट्वीट में उन्होंने कहा, मुझे उनका नेतृत्व पसंद नहीं था, कई लोग मेरी इस बात से सहमत होंगे, मुझे ख़ुशी है कि वे चले गए।

द अटलांटिक में जेम्स मैटिस ने लिखा था, ”मेरे जीवनकाल में डोनल्ड ट्रम्प ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने अमरीकी लोगों को एकजुट करने की कोशिश नहीं की है। वे ऐसी कोशिश करते दिखे भी नहीं है। वास्तव में उन्होंने हमें विभाजित करने की कोशिश की है।” उन्होंने आगे लिखा, ”हम तीन साल से उनकी तरफ़ से जान-बूझकर की जा रही कोशिशों का नतीजा देख रहे हैं। हम परिपक्व नेतृत्व के बिना तीन साल का नतीजा देख रहे हैं।” मैटिस ने अमरीका में नस्लवाद के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी अपनी चुप्पी तोड़ी है। जॉर्ज फ़्लॉयड की मौत के बाद अमरीका के कई शहर विरोध प्रदर्शन की आग में जल रहे हैं। इस मामले पर जेम्स मैटिस लिखते हैं, ”जो लोग क़ानून तोड़ रहे हैं, वे काफ़ी कम संख्या में हैं। हमें इससे भटकना नहीं चाहिए। प्रदर्शन में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया है, जो अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर सड़कों पर उतरे हैं। जो यह कह रहे हैं हमें एक देश के रूप में अपने मूल्यों पर क़ायम रहना चाहिए।”

अपने लेख में जेम्स मैटिस ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सेना के इस्तेमाल की आलोचना की। उन्होंने कहा, “मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि किसी भी परिस्थिति में अपने ही नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करते हुए सेना को आदेश दिया जाएगा। हमारी प्रतिक्रिया का सैन्यीकरण नहीं होना चाहिए जैसा कि हमने वॉशिंगटन में देखा। इससे सैनिक और आम नागरिक समाज में संघर्ष पैदा होता है।” इस बीच कई शीर्ष डेमोक्रेटिक नेताओं और धार्मिक नेताओं ने भी ट्रम्प के भड़काउ बयानों और स्थिति से निपटने के तरीक़े की आलोचना की। इन नेताओं का कहना था कि ट्रम्प जानबूझकर प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाना चाहते हैं।

 

जॉर्ज फ्लॉयड का ख़ून रंग ला रहा है,अमरीकी नस्लभेद के विरुद्ध प्रदर्शन, सीमाओं को पार कर गये, स्वीडन में ज़बरदस्त प्रदर्शन

स्वीडन की राजधानी स्टाॅकहोम में हज़ारों की संख्या में लोगों ने अमरीका में नस्ली भेदभाव और जातीवाद के विरुद्ध प्रदर्शन किए।

रोयटर्ज़ की रिपोर्ट के अनुसार स्वीडन की राजधानी स्टाॅकहोम में हज़ारों की संख्या में लोगों ने जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या और इस देश में काले नागरिकों के विरुद्ध होने वाले पुलिसिया अत्याचार के विरुद्ध व्यापक प्रदर्शन किए।

स्टाॅकहोम में कोरोना वायरस की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग और लोगों के जमा होने पर प्रतिबंध लागू है उसके बावजूद भी लोगों ने प्रदर्शन किए।

प्रदर्शनकारी ऐसे प्लेकार्ड उठाए हुए थे जिन पर लिखा हुआ था कि हम सांस भी नहीं ले सकते, काले लोगों की जान की अहम है।

ज्ञात रहे कि अमरीका में नस्लभेद और जातीवाद तथा पुलिसिया हिंसा के विरुद्ध प्रदर्शन केवल अमरीका के विभिन्न राज्यों और शहरों में ही नहीं हो रहे हैं बल्कि यह प्रदर्शन सीमाओं को पार करके दुनिया के अनेक देशों में आयोजित हो रहे हैं।

इसी प्रकार बुधवार को लंदन के हाइड पार्क में विशाल प्रदर्शन हुआ जिसमें शामिल लोग ऐसे प्लेकार्ड उठाए हुए थे जिन पर लिखा हुआ था न्याय के बिना शांति नहीं और कालों की ज़िदगी भी अहम है।

उल्लेखनीय है कि 25 मई को अमरीकी शहर मिनियापोलिस में एक श्वेत पुलिस अधिकारी ने अश्वेत अमेरिकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की गिरफ्तारी करते हुए उसके गले पर अपना घुटना बेरहमी से दबा दिया था, जिसके कारण उसकी मौत हो गई थी। तबसे अमेरिका के हर राज्य में ज़बरदस्त प्रदर्शन हो रहे हैं।

इस दौरान कई जगहों पर प्रदर्शनकारी उग्र हो गये और उन्होंने पुलिस की कई गाड़ियों को आग लगा दी और कई दुकानें लूट लीं।

वाशिंगटन डीसी में प्रदर्शनकारियों ने इसी सप्ताह एक ऐतिहासिक चर्च को जला दिया और राष्ट्रीय स्मारक और लिंकन स्मारक जैसी कुछ ऐतिहासिक धरोहरों को भी नुक़सान पहुंचाया है।

 

Enrico Ivanov Orthodox cross
@Russ_Warrior
By trying to manipulate other countries’ affairs, Washington is harming others as well as itself. As the #US still provokes instability worldwide, other countries need to insist that Washington should not meddle in their internal affairs.

Enrico Ivanov Orthodox cross
@Russ_Warrior
The #US is the empire that committed more war crimes in history and it achieved this in just few decades. The violent protests are related to the fact that Washington focused only on conquering foreign countries with all means instead of focusing on internal problems.


JUANA CARRASCO
@cubavence2019
700 #US troops from 82nd airborne div. have been moved from their base in Fort Bragg, North Carolina, to the outskirts of Washington DC, are now poised at Joint Base Andrews in Maryland and Fort Belvoir in Virginia, AP reports. Are armed, have bayonets and have riot gear,

 

 

Alexa Slomski
@AlexaSlomski
Please I can’t breathe – pleaded George Floyd
My stomach hurts – gasped Minneapolis
My neck hurts – choked Washington DC
Everything hurts – screamed New York City
They’re are going to kill me – understood the United States
SAY MY NAME – cried the world
#BlackLivesMatter #US

 

 

 

 

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