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टाइटानिक की तरह डूब जाएगा अमरीका : ह्यूस्‍टन पुलिस प्रमुख ने कहा, अपना मुंह बंद रखें ट्रम्प!

3 जून इमाम खुमैनी की बरसी है, इस दिन इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम खुमैनी का स्वर्गवास हुआ और विशेषज्ञ संसद ने आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई को इमाम खुमैनी का उत्तराधिकारी और क्रांति का नेता चुना।

इमाम खुमैनी और वरिष्ठ नेता के विचार में हमेशा ही, अमरीकी नेतृत्व में साम्राज्यवाद से मुक़ाबले को प्राथमिकता दी है और दोनों ने अपने बयानों में अमरीका के पतन की बात बार-बार की है।

इस साल इमाम खुमैनी की बरसी ऐसे समय में मनायी जा रही है कि जब अमरीक जनता ने इस देश की सरकार के नस्लभेद के खिलाफ संघर्ष का संकल्प ले लिया है।

आज अमरीका में जो कुछ हो रहा है वह वास्तव में उसके कमज़ोर होने का चिन्ह है। 30 साल पहले इमाम खुमैनी ने पूर्व सोवियत संघ के तत्तकालीन राष्ट्रपति गोर्वाचोफ के नाम जो एतिहासिक पत्र लिखा था उसमें केवल कम्यूनिज़्म ही नहीं बल्कि इस बात पर भी बल दिया था कि सोवियत संघ को पशिचम के भरोसा नहीं रहना चाहिए। इमाम खुमैनी ने उस पत्र में लिखा थाः

” आज अगर आप यह चाहें कि सोशलिज़्म और कम्यूनिज़्म की समस्याओं का समाधान पश्चिमी पुंजीवाद के सहारे हल करे तो इससे न केवल यह कि आप के समाज की किसी समस्या का निवारण नहीं होगा बल्कि दूसरों लोगों को आप की गलतियों को सुधारने के लिए आगे आना पड़ेगा। क्योंकि आज अगर मार्क्सवाद अर्थ व्यवस्था और समाज के स्तर पर बंद गली में पहुंच गया है तो पश्चिम भी दूसरी तरह से इसी प्रकार की समस्याओं में फंसा हुआ है। श्रीमान गोर्वाचोफ को सच्चाई का सामना करना चाहिए। आप के देश की मुख्य समस्या, स्वामित्व और स्वतंत्र अर्थ व्यवस्था नहीं है, आप की समस्या, ईश्वर में सही आस्था का न होना है। यही वह समस्या है जिसकी वजह से पश्चिम अश्लीलता और बंद गली में फंस गया है। आप की समस्या इस सृष्टि के रचयता ईश्वर से लंबी और निरर्थक लड़ाई है।”

इमाम खुमैनी के इस खत को जब सोवियत संघ के तत्कालीन राष्ट्रपति गोर्वाचोव के हवाले किया गया उसके दो साल बाद कम्यूनिज़्म के पतन की इमाम खुमैनी की भविष्यवाणी सच हो गयी और आज हम अमरका के पतन की प्रक्रिया का आरंभ देख रहे हैं।

आज केवल ईरान में नहीं बल्कि दुनिया के बहुत से देशों में अमरीका के पतन की बात तार्किक बतायी जा रही है। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली खामेनई ने भी बार बार अमरीका के पतन की बात की है। दो साल पहले उन्होंने अपने एक बयान में कहा थाः” अमरीका, आज 40 साल पहले की तुलना में अधिक कमज़ोर है। “

वरिष्ठ नेता ने अमरीका के ” सॉफ्ट पावर ” के बारे में बात करते हुए कहा थाः ” अन्य देशों को अपनी अपनी बात मनवाने की अमरीकी शक्ति इस समय बहुत कमज़ोर है विशेषकर वर्तमान राष्ट्रपति के सत्ता संभालने के बाद से युरोप की जनता ही नहीं सरकारें भी, चीन , रूस, भारत , अफ्रीका और लेटिन अमरीका भी अमरीकी फैसलों का खुल कर विरोध करते हैं। इस समय न केवल यह कि अमरीका का ” सॉफ्ट पावर ” पतन की ओर बढ़ रहा है बल्कि अमरीका के वर्तमान राष्ट्रपति के विचित्र क़दमों की वजह से लेबरल डेमोक्रेसी का भी सम्मान खत्म हो गया है जो वास्तव में पश्चिमी सभ्यता की नींव है। सैन्य और अर्थ व्यवस्था के क्षेत्र में भी अमरीका की शक्ति का पतन हो रहा है। उनके पास सामरिक साधन हैं लेकिन अपने सैनिकों में अवसाद, निराशा, बौखलाहट और असमंजस की वजह से अन्य देशों में अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ब्लैक वाटर जैसी अपराधी संस्थाओं की मदद लेना पड़ती है। “

हालिया दिनों में अमरीका में जो अशांति फैली है उससे यह सिद्ध हो गया कि अमरीका मुर्दाबाद का ईरानी राष्ट्र का नारा अब केवल ईरान, इराक़, फिलिस्तीन , सीरिया, लेबनान, यमन और वेनेज़ोएला की जनता का ही नारा नहीं है बल्कि अब अमरीका में भी यह नारा लगाया जाता है और यह वह वास्तविकता है जिसका उल्लेख करते हुए वरिष्ठ नेता ने कहा थाः

” अमरीकी सरकार, किसी भी देश में किसी भी राष्ट्र के निकट, अच्छी छवि नहीं रखती। अमरीका मुर्दाबाद अब केवल ईरानी राष्ट्र का ही नारा नहीं है, अब दुनिया के बहुत से देशों में लगाया जाता है। अत्याचार, युद्ध, हथियारों के भंडारण, अन्य राष्ट्रों पर वर्चस्व, धौंस, हर जगह हस्तक्षेप की समर्थक सरकार इस तरह से बदनाम हो गयी है, यह भी एक चिन्ह है, इस आधार पर विश्व स्तर पर यह बदलाव सह ठोस सच्चाई है। “

वरिष्ठ नेता ने कहा थाः

” जिस तरह से प्रसिद्ध जहाज़ टाइटानिक को उसका वैभाव उसे डूबने से नहीं बचा पाया, उसी तरह सामने से देखने वाला अमरीकी वैभव भी उसे डूबने से नहीं रोक पाएगा और अमरीका डूब कर रहेगा”

इमाम खुमैनी और वरिष्ठ नेता के अलावा भी आज दुनिया के बहुत से विशेषज्ञ हालात की वजह से अमरीका के पतन की भविष्यवाणी कर रहे हैं और ट्रम्प का बड़बोलापन और पोम्पियो की मूर्खता इस प्रक्रिया को और तेज़ कर रही है। अमरीका में नस्लभेद के खिलाफ जो आग लगी है वह हो सकता है अभी बुझ जाए लेकिन इसकी चिंगारी सुलगती रहेगी।


ट्रम्प अगर अपना मुंह बंद रखे तो यह अधिक उपयुक्त हैः ह्यूस्‍टन के पुलिस प्रमुख

 

अमेरिका के मिनियापोलिस में निहत्थे अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की निर्मम हत्‍या के बाद पूरे अमरीका में विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है।

अमेरिका के मिनियापोलिस में निहत्थे अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की निर्मम हत्‍या के बाद इस देशभर में जारी हिंसा से हालात इतने खराब हो गए हैं कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को सेना तैनात करनी पड़ी है।

अमरीका में किये जा रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच ट्रंप ने कहा है कि हिंसा, लूट, अराजकता और अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वाइट हाउस की प्रेस सचिव कैली मैकनैनी ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि राष्ट्रपति ने साफ कर दिया है कि हम अमेरिका की सड़कों पर जो देख रहे हैं वह अस्वीकार्य है। अश्वेत व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की हिरासत में मौत के बाद से हो रहे प्रदर्शनों में दंगों और लूट का उल्लेख करते हुए ट्रम्प ने कहा कि यह बहुत ही साधारण और साफ बात है कि यह प्रदर्शन, आपराधिक कृत्य हैं प्रदर्शन नहीं हैं। ट्रम्प के अनुसार यह अभिव्यक्ति भी नहीं है बल्कि यह तो अपराध हैं जो बेकसूर अमेरिकी नागरिकों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

ज्ञात रहे कि अमरीकी पुलिस के हाथों अश्वेत अमरीकी फ्लॉयड की मौत के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों की आग अब अमेरिका के 140 शहरों तक पहुंच गई है। अमरीका के 24 राज्यों में नैशनल गार्ड के लगभग 17,000 सैनिकों की तैनाती की गई है। उन्होंने कहा कि कुल 3,50,000 नैशनल गार्ड उपलब्ध हैं तथा अराजकता के लिए और कदम उठाए जाएंगे। अमरीका में किये जा रहे हालिया प्रदर्शनों को इस देश में पिछले कई दशकों की सबसे खराब नागरिक अशांति माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि ट्रंप के इस बयान के बाद ह्यूस्‍टन के पुलिस प्रमुख आर्ट एक्‍वेडो ने उन्‍हें अपना मुंह बंद रखने की सलाह दी है। ह्यूस्‍टर के पुलिस प्रमुख ने कहा है कि मैं देश के पुलिस चीफ की ओर से अमेरिका के राष्‍ट्रपति से बस इतना कहना चाहूंगा कि अगर आपके पास कहने के लिए कुछ नहीं है तो कृपया अपना मुंह बंद रखिए। इससे पहले एक जून को राज्‍यों के गवर्नर के साथ कॉन्‍फ्रेंस कॉल में डोनाल्‍ड ट्रंप ने उन्‍हें सलाह दी थी कि वे प्रदर्शनकारियों पर अपना प्रभुत्‍व स्‍थापित करें। उन्‍होंने कहा था कि अगर आप अपना प्रभुत्‍व स्‍थापित नहीं करेंगे तो फिर आप, अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।

अमरीका में घटने वाली घटनाओं पर न जाने क्यों चुप हैं पश्चिमी देश?

 

अमरीका में होने वाले राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के संबन्ध में यूरोपीय सरकारों की चुप्पी पर ईरान ने प्रश्न चिन्ह लगाया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके अमरीकी जनता के प्रदर्शनों के हिंसक दमन पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि आप यह सोचिए कि इस प्रकार की घटना यदि किसी पश्चिमी देश में न होकर संसार के किसी भी अन्य देश में होती तो उसपर पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया क्या होती?

ईरानी विदेश मंत्रालय ने अपने ट्वीट संदेश में कहा है कि अमरीकी पुलिस के हाथों एक अश्वेत अमरीकी की निर्मम हत्या और इस हत्या के विरोध में होने वाले प्रदर्शनों के दमन के बावजूद पश्चिमी सरकारों ने अभी भी मौन धारण कर रखा है। इस समय वे मानवाधिकारों के हनन की बात भूल चुके हैं। यही घटनाएं अगर कहीं और घटी होतीं तो फिर मानवाधिकारों के हनन की दुहाई का दुखड़ा शुूरू हो जाता। इससे पहले ईरान के न्यायपालिका प्रमुख ने कहा था कि मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप में अमरीका पर अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय में अवश्य मुक़द्दमा चलना चाहिए।

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