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पाँच दिन बाद क्या होने जा रहा है?

Shamsher Ali Khan
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पाँच दिन बाद क्या होने जा रहा है ?

कोरोना की दहशत और अमेरिका में सियाहफाम शख़्स जॉर्ज (George Floyd) की मौत के बाद फूटने वाले नस्ली फ़सादात का फ़ायदा उठाते हुए, इस्राईल PM #नेतन्याहू ने ऐलान किया है, की वह इंतिखाबी वादे को पूरा करते हुए 1967 ईस्वी में उरदन से छीने जाने वाले मग़रिबी किनारे (West Bank) के इलाके को एक जुलाई 2020 ईस्वी को कानूनी तौर पर इस्राईल में शामिल कर लेगा, यानी आज से ठीक पाँच दिन बाद, यह सानेहा (हादसा) रोनुमा होने वाला है !! और #उम्मत_ए_मुस्लिमा के सत्तावन मुमालिक में किस कदर ख़ामोशी और बेहिसी है, नेतन्याहू इन यहूदी रहनुमाओं में से एक है जो पहले दिन ही से #फ़लस्तीनी रियासत के तसव्वुर का मुख़ालिफ़ था, वह समझता है कि मग़रिबी किनारे का थोड़ा सा इलाका भी अगर इस्राईल के कंट्रोल में न रहा, तो इस्राईल की सलामती और सिक्युरिटी ख़तरे में पड़ जाएगी, गुज़िश्ता सत्तर साल से अमेरिका में यही नज़रिया मुसलसल बेचा जा रहा है, जिसकी बुनियाद पर अमेरिका की अवाम का सरमाया इस्राईल की सिक्यूरिटी पर खर्च किया जा रहा है !!

मग़रिबी किनारा दरअस्ल वोह इलाका है कि जब जंगे अज़ीम अव्वल (first world war) में #ख़िलाफ़त_ए_उस्मानिया पर फ़तह के बाद फ्राँस, बर्तानिया और अमेरिका के दरमियान 1920 ईस्वी में (San Remo Conference) के मुआहिदे तहत तक़सीम हुई तो इस इलाके को बर्तानिया अमलदारी में दे दिया गया ताकि एक #फ़लस्तीनी रियासत क़ायम की जा सके, अंग्रेजो ने गद्दारी के सिले में शरीफे मक्का के बेटे को इस इलाके से मुतस्सल (जुड़ा हुआ) इलाका उरदन की सूरत सौंप दिया था, इस शख़्स अमीर अब्दुल्लाह अव्वल बिन उल हुसैन ने यह दावा किया कि वह #बनू_हाशिम से है, जिन्हें अरब की असल क़यादत का हक़ है, इसलिए वोह तमाम अरब इलाको को जमा करेगा और इसने इस इलाके पर अपना अव्वलीन दावा 1920 ईस्वी में ही कर दिया, दूसरी जानिब बर्तानिया ने इससे चार साल पहले ही ख़ुफ़िया तौर पर 1916 ईस्वी में बालफोर डिक्लेरेशन (Balfour Declaration) पर दस्तख़त कर चुका था, जिसके तहत वोह इस्राईल के क़याम, यहूदियों को एक क़ौम मानना और इनके अपनी अर्ज़े मुक़द्दस में वापस लौटने का हामी और मददगार था, यह क़दीम शहर युरोशलम इसी इलाके में वाक़ेअ है, जंगे अज़ीम दोम (second world war) के बाद अक़वामें मुत्तहिदा (UN) क़ायम हुई तो इलाको और मुल्क़ों की नए सिरे से हद बन्दी हुई तो 1947 ईस्वी में मग़रिबी किनारे से सटे हुए इलाको को तीन हिस्सों में तक़सीम कर दिया गया,

(1) अरब रियासत

(2) यहूदी रियासत

(3) और आलमी इंतजामिया के तहत आज़ाद शहर “#युरोशलम”।

जैसे ही इस्राईल का क़याम 1948 ईस्वी अमल में आया, तो अरब इस्राईल जंग शुरू हो गई, इस जंग के दौरान यह इलाका न तो इस्राईल के नक़्शे में शामिल था और न ही उरदन के नक़्शे में मौजूद था,,

जंग के दौरान उरदन ने अक़वामें मुत्तहिदा के तक़सीम के प्लान के मुताबिक इस इलाके पर क़ब्ज़ा कर लिया और 1950 ईस्वी में इसे उरदन का कानूनी हिस्सा करार दे दिया,

अपने क़याम के 19 साल बाद, जून 1967 ईस्वी में इस्राईल अपनी पूरी जंगी तैयारी के साथ हमलावर हुआ, इस छः रोज़ा जंग में इस्राईल ने मग़रिबी किनारे (West Bank) पर क़ब्ज़ा कर लिया और साथ ही मशरिकी युरोशलम पर भी क़ब्ज़ा कर लिया, मग़रिबी युरोशलम पर वो 1948 ईस्वी की जंग में पहले ही क़ब्ज़ा कर चुका था, अब #युरोशलम का मुक़द्दस शहर मुक़म्मल तौर पर इसके क़ब्ज़े में आ गया,, युरोशलम की मशरिकी हिस्से की ही अस्ल अहमियत है, क्यूँकि इसमें यहूदियों का सबसे मुक़द्दस मकाम #दीवारे_गिर्या, मुसलमानों की #मस्जिदे_अक़्सा और ईसाइयों के मुताबिक वो मकाम जहाँ हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को सलीब से उतारकर दफ़्न किया गया था, फिर वह वही से दोबारा ज़िन्दा होकर आसमानों की सिमट चले गए है, यह मक़बरा आज भी खाली कब्र की सूरत है, जिस पर गिरजाघर तामीर किया गया है,,

#युरोशलम का क़दीम शहर भी मशरिकी युरोशलम में ही है, जिसकी गलियों में सैय्यदना ईसा अलैहिस्सलाम और इनसे पहले आने वाले लातादाद पैगम्बर रहते रहे, इस शहर से #सय्यदुल_अम्बिया_ﷺ मेराज पर तशरीफ़ ले गए थे, इस इलाके में वक़्त तक़रीबन बीस (20) लाख मुसलमान आबाद है और 1967 ईस्वी से लेकर अब तक इस्राईल ने दुनियाभर से चार (4) लाख यहूदियों को यहाँ लाकर आबाद किया है, इन बीस लाख मुसलमानों के अलावा अस्ल इस्राईल में भी इस वक़्त 16 लाख मुसलमान आबाद है, जबकि यहूदियों की तादाद 73 लाख है, अंग्रेजो ने अपने वफ़ादार कादियानियों को भी 1920 ईस्वी में यहाँ लाकर आबाद किया था, जिनकी तादाद इस वक़्त 2500 है, इस तरह शियाओ के फ़िरके के अल्वी और दरोज़ भी ढाई लाख के करीब यहाँ रहते है, इन सब पर यहूदियों क़ब्ज़ा और ग़लबा गुज़िश्ता सत्तर साल से बरकरार है।

आज से पाँच दिन बाद इस्राईल इस मुतानाज़ा इलाके को अपना हिस्सा बनाना शुरू कर देगा, ऐन मुमकिन है कि फ़ौरन सिर्फ चन्द फ़ीसद इलाके का ऐलान किया जाए और दुनिया का रद्दे अमल देखकर फिर कोरोना का भरपूर फ़ायदा उठाया जाए, मुस्लिम दुनिया पर इस वक़्त कोरोना वबा तो बहुत कम है, लेकिन इनमें मुद्दत से बेहिसी और मगलुबियत का वाइरस सराहत कर चुका है, इस्राईल अगर एक ही दिन में तमाम मग़रिबी किनारों और युरोशलम को ज़म करने का ऐलान कर दे, तो लगता फिर भी मुसलमानों की गैरत नही जागेंगी, शायद कोई एक मुर्दा सी आवाज़ भी #उम्मत_ए_मुस्लिमा से बरामद न हो सकी, लेकिन याद रखे ! अहादीस के मुताबिक अब एक ऐसा वक़्त शुरू होने जा रहा है, जिसकी आतिश की तपिश से शायद कोई एक मुसलमान घर भी ऐसा न हो जो बच जाए, हर मुसलमान को इस #आलमी_जंग के दौर से गुजरना ही पड़ेगा, यही #तक़दीरें_ईलाही है और यही #सय्यदुल_अम्बिया_ﷺ की पेशगोई है….

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