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भारत और चीन तनाव चरम पर : भारतीय सीमा में घुसकर चीनी सैनिकों ने बनाए कैंप : स्थिति तनावपूर्ण होने जा रही है : रिपोर्ट

लद्दाख सीमा पर चीन और भारत के दरमियान इस समय तनाव चरम पर है

– भारत का चीन के साथ तनाव है
– भारत का नेपाल के साथ तनाव है
– भारत का पाकिस्तान के साथ तनाव है
– मैंम्मार और भूटान चीन की गोद में बैठे हैं
– भारत और बांग्लादेश के रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन चीन और बांग्ला देश के रिश्ते बहुत अच्छे हैं
– भारत श्रीलंका के सम्बन्ध अच्छे हैं, लेकिन श्रीलंका का झुकाव पूरी तरह से चीन की तरफ है
– मालदीव से भारत से ज़यादा अच्छे सम्बन्ध चीन के हैं
– मॉरीशस से भारत के मधुर सम्बन्ध हैं लेकिन चीन और मारीशश आपस में ज़यादा करीब हैं

इस तरह से हम देखते हैं कि इस समय भारत के अपने पडोसी देशों से सम्बन्ध कोई ज़यादा अच्छे नहीं हैं बल्कि ख़राब ही हैं

लद्दाख और सिक्किम के आलावा तक़रीबन एक दर्ज़न स्थानों पर भारत और चीन के बीच शदीद तनाव है, नार्थ ईस्ट में चीन डोकलाम में पहले भी घुसपैठ करता रहा है और यहाँ उसने भारत की काफी ज़मीन पर कब्ज़ा जमा रखा है, डोकलाम में चीन ने सड़क मार्ग, हैलीपैड और छोटी हवाई पट्टियां भी बना रखी हैं

लद्दाख सीमा पर चीन और भारत के दरमियान इस समय तनाव चरम पर है, चीनी सैनिकों की बड़ी तादाद यहाँ तैनात की गयी है, चीनी सैनिक भारत के सैनिकों पर पत्थर बरसा रहे हैं, लाठियों से हमले कर रहे हैं, और कटीले तारों से हमला कर रहे हैं, सूत्रों के मुताबिक चीनी सैनिकों ने भारत की सीमा के अंदर अपने 100 से ज़यादा टैण्ट लगा रखे हैं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने भी चीनी दादागिरी का सख्ती के साथ जवाब देते हुए सड़क निर्माण जारी रखने का एलान कर दिया है साथ ही 430 युद्धक टैंक सीमा पर तैनात कर दिए हैं

भारत और चीन विश्व के दो बड़े देश हैं, दोनों देशों की आबादी तक़रीबन 300 करोड़ है, जो कि विश्व की कुल आबादी का तक़रीबन 40 फीसद है, दोनों देश बड़ा बाजार रखते हैं, आपस में दोनों के बीच साझा सरोकार हैं तो मतभेद भी हैं, दोनों देशों की 3500 किलोमीटर से ज़यादा लम्बी सीमा है,


भारत अखंड भारत का सपना देखता है जिसमे बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, श्रीलंका, तज़ाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान आदि देशों को मिला कर एक देश ”अखंड भारत” बनता है, भारत के भगवाधारी कट्टरपंथी संगठन को अखण्डभारत के लिए तमाम पडोसी देशों की ज़मीन पर अपना अधिकार चाहिए लेकिन उन देशों में बसने वाले मुस्लमान नहीं चाहिए, अखण्डभारत संघ के हिन्दू राष्ट्र की कल्पना का ‘अंत’ है

भारत की ही तरह चीन का भी विस्तारवादी रवैया है, चीन ताइवान, हांगकांग के आलावा नेपाल, भूटान को चीनी राष्ट्र के राज्यों की तरह समझता है, चीन की नज़र भारत के पूर्वोत्तर के इलाकों पर है, ”कामराज” को चीन अपना भाग कहता रहा है, कामराज पूर्व समय में नार्थ ईस्ट के जो 8 राजय हैं को कहा जाता था, चीन लद्दाख के इलाकों में भी भारत की ज़मीन को हड़पना चाहता है

देश की विस्तारवादी नीतियों की वजह से अनेक देशों के बीच झगडे बने हुए हैं, भारत और चीन, भारत और नेपाल, भारत और पाकिस्तान, भारत और बांग्लादेश, के भी सीमा को लेकर विवाद हैं, इन को हल करने की कोशिशें कम ही होती हैं इनके ज़रिये ‘मुर्दे’ को ज़िंदा रख कर, विलाप कर दुनियां को अपनी तकलीफों को बताने का काम किया जाता है

दुनियां के सभी बड़े देश कई दशकों से जंग कर रहे हैं इनकी ये जंग अपनी ज़मीन पर नहीं लड़ी जा रही है, ये अभी तक अरब देशों में लड़ी जा रही थी, अफ़ग़ानिस्तान में लड़ी गयी थी, इराक, सीरिया, यमन, अफ़ग़ानिस्तान में सीधे सीधे अमेरिका की शिकश्त ने अमेरिका को अपनी नीति बदलने पर मजबूर कर दिया है, पहले इराक में ISIS/दाइश की ईरानी सेना, इराकी सेना, तुर्की की सेना और पाकिस्तान की ISI के हाथों बुरी हार, फिर सीरिया में रूस, ईरान, तुर्की, और ISI के हाथों अमेरिका और उसके गठबंधन की करारी शिकस्त के बाद अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के हाथों अमेरिका और उसके 48 सहियोगी देशों पर पड़ी मार ने अमेरिका की कमर तोड के रख दी है, अमेरका अफ़ग़ानिस्तान पर अपना कब्ज़ा हमेशा के लिए रखना चाहता था, मगर तालिबान ने अमेरिकी गठबंधन को एक दिन भी चैन से नहीं बैठने दिया, आखिर में आके तो हालात ऐसे बन गए थे कि अमेरिकी सैनिक तालिबान के हमलों की सूरत में अपनी छावनियां छोड़ कर फरार हो जाते थे, अमेरिका की समझ में आ चुका था कि यहाँ पैर जमने वाले नहीं हैं उल्टा अपना ही नुक्सान और हो रहा है, रिपोर्ट के मुताबिक तक़रीबन 22 अमेरिकन सैनिक जो अफ़ग़ानिस्तान में तैनात रहे हैं खुदकशी कर लेते हैं, तक़रीबन 9 लाख अमेरिकन सैनिक मानसिक बीमारियों का शिकार हो चुके हैं और 3 लाख अमेरिकी सैनिकों को उनके परिवार वालों ने घरों से निकाल दिया है जोकि शेल्टर होम्स में जीने को मजबूर हैं, अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका जिस मकसद से आया था वो उसे हुआ बल्कि अंतरष्ट्रीय बेइज़्ज़ती, शर्मिन्दिगी उसके हिस्से में आयी है

Press Trust of India
@PTI_News
Prime Minister Narendra Modi is not in “good mood” over border row with China: US President Donald Trump

नवम्बर महिने में अमेरिका में चुनाव होने वाले हैं, ट्रम्प किसी भी सूरत में चीन से सीधे युद्ध करने की हिम्मत नहीं रखता है, अगर हिम्मत होती तो वो अफ़ग़ानिस्तान में मार खा के निकलने के लिए पाकिस्तान की खुशामद न करता, चीन और अमेरिका में कोरोना वायरस को लेकर तनातनी है और इसका असर साउथ चाइना सी, ताइवान में देखने को मिल रहा है जहाँ अमेरिका आग भड़काने की कोशिशों में लगा हुआ है, चीन और अमेरिका में व्यापारिक युद्ध जारी रहेगा, साथ ही अमेरिका अपनी लड़ाई एशिया में भारत से लड़वाना चाहता है,

सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी विदेशमंत्री पोम्पिओ ने भारत से साउथ चीन सी में चीन को रोकने के लिए कार्यवाही करने के लिए कहा था, जिसे भारतीय नीतिकारों ने रद्द कर दिया, जानकार सूत्रों के मुताबिक भारत चीन से साउथ चाइना सी में भिड़ना नहीं चाहता है, वहां पर भारतीय हितों से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं है, लिहाज़ा भारत ने अमेरिकी प्रशासन को आगाह करवा दिया है कि भारत PoK को वापस लेने के लिए कार्यवाही करना चाहता है, PoK से होकर चाइना का one road, one belt/ सी पैक गुज़र रहा है, सी पैक तैयार हो जाने के बाद चीन और पाकिस्तान की आर्थिक लाभ बहुत अधिक होगा, अमेरिका शुरू से चीन के इस कार्यक्रम के खिलाफ है, भारत चूँकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को भारत मानता है इसलिए भारत भी ऐतराज़ करता रहा है
फिलहाल भारत, चीन, नेपाल, पाकिस्तान बहुत सक्रिय हैं और साथ में सक्रिय हैं इस्राईल, UK, फ्रांस और अमेरिका

यहाँ फिर तालिबान पर आते हैं, तालिबान का अशरफ ग़नी, अब्दुल्ला अब्दुल्लाह से सम्पर्क बना हुआ है, आगे के मज़ाकिरात का फार्मूला तैयार हो रहा है, भारत ने चुनावों में अशरफ ग़नी और अब्दुल्ला अब्दुल्ला दोनों पर खूब खर्च किया था, भारत चाहता है कि तालिबान से कोई करार हो जाये ताकि अफ़ग़ानिस्तान में भारत के हितों को नुक्सान न पहुंचे, सूत्रों के मुताबिक तालिबान को ISI ने पहले ही समझा दिया है कि तालिबान भारत के मामले में कोई नरमी न बरतें

जून के आखिर में या जुलाई के मध्य तक एशिया के देशों में एक बड़ा युद्ध होने के बहुत इमकान हैं, चीन सी पैक पर कोई आंच नहीं आने देगा और भारत, अमेरिका सी पैक को पूरा होने नहीं देना चाहते हैं, इसराइल, फ्रांस, UK के एजेंसियां जो अभी तक अफ़ग़ानिस्तान में ठिकाने बनाये हुए थीं वो अब कश्मीर में मौजूद हैं, सूत्रों के मुताबिक इस्राईल और फ्रांस के अनेक रक्षा विशेषज्ञ, पायलेट कश्मीर में पनाह लिए हुए हैं, ये कश्मीर में क्यों ठहरे हुए हैं समझना मुशिक नहीं है

अगर भारत का चीन से युद्ध होता है तो उसमे पाकिस्तान हर हाल में शामिल हो जायेगा, और अगर भारत पाकिस्तान का युद्ध होता है तो उसमे पाकिस्तान की तरफ से चीन हर सूरत में लड़ेगा,

सुरते हाल भयानक हो जायेगी, भारत के साथ अमेरिका, इस्राइल, फ्रांस, UK व् अन्य देश युद्ध में शामिल होंगे जबकि चीन/पाकिस्तान के साथ ईरान, तुर्की, सीरिया, सऊदी अरब, तालिबान, रूस, नार्थ कोरिया आदि,,,यहां अगर युद्ध भड़का जिसकी के इस समय पूरी सम्भावना है तो वो युद्ध विश्व युद्ध का रूप धारण कर सकता है,,,परवेज़ ख़ान

स्थिति तनावपूर्ण होते जा रही है

भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव खत्म होता नहीं दिख रहा है। लद्दाख और सिक्किम के कुछ क्षेत्रों में चीन की लगातार बढ़ रही सैन्य गतिविधियों और चीनी सेना द्वारा भारत के निर्माण कार्य में अवरोध उत्पन्न करने के इरादे से इलाके में स्थिति तनावपूर्ण होते जा रही है।

रविवार को समाचार एजेंसी पीटीआई ने सेना के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि 25 दिनों से पूर्वी लद्दाख के विवादित क्षेत्रों में चल रहे विवाद के बीच भारत और चीन की सेनाएं सैन्य अड्डों पर भारी उपकरण और तोप व युद्धक वाहनों समेत हथियार प्रणालियों को पहुंचा रहे हैं।

इस क्षेत्र में दोनों सेनाओं द्वारा युद्ध की क्षमता में वृद्धि तब आई है जब दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक स्तरों पर बातचीत के माध्यम से विवाद को हल करने के अपने प्रयासों को जारी रखा है। सूत्रों ने कहा कि चीनी सेना धीरे-धीरे पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब अपने ठिकानों पर अपने तोपखाने की तोपों, पैदल सेना के लड़ाकू वाहनों और भारी सैन्य उपकरणों के साथ पहुंच रही है।

बता दें कि काफी संख्या में चीनी सैनिक इस महीने के शुरू में वस्तुत: सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे और तबसे पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी में बने हुए हैं। भारतीय सेना ने चीनी जवानों के इस अतिक्रमण का तीव्र विरोध किया और उनके तत्काल वहां से वापस लौटने तथा शांति व यथास्थिति बहाल करने की मांग की। चीनी सेना ने डेमचोक और दौलतबेग ओल्डी में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई थी। ये दोनों संवेदनशील क्षेत्र हैं और पूर्व में यहां दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हो चुकी है।

माना जा रहा है कि चीन ने पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी में करीब 2500 सैनिकों को तैनात किया है और धीरे-धीरे अस्थायी ढांचा और हथियारों को बढ़ा रहा है। हालांकि संख्या को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।

चीन लगातार कोशिश कर रहा है कि भारत इन क्षेत्रों में निर्माण कार्य पर रोक लगाए जबकि वो खुद यहां तेजी से सड़क निर्माण समेत कई ढ़ांचाओं का निर्माण कर रहा है। हालांकि इस बार भारत ने भी चीन के सामने झुकने से इंकार कर दिया है। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैन्य अधिकारियों से साफ़ कर दिया है कि भारत अपने इलाके में हो रहे निर्माण कार्य को जारी रखे। सिंह ने शनिवार को कहा कि चीन के साथ विवाद को सुलझाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर द्विपक्षीय बातचीत चल रही है।

चीन ने इन्हीं इलाकों में अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ाई है

गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो के आसपास के कई इलाकों में तनाव जारी है। चीन ने इन्हीं इलाकों में अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ाई है

पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच तनाव जारी है। चीन ने यहां पर फौज की संख्या बढ़ा दी है, तो भारत ने भी अपने सैनिकों की तैनाती में इजाफा कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन ने लद्दाख में जिस तरह इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया है, उसके मद्देनजर भारत को भी तेजी से अपने हिस्से में सड़कें, अपग्रेड वाहन और हथियारों पर ध्यान देना होगा।

लद्दाख में लंबे समय तक तैनात रहे आईटीबीपी के पूर्व डीआईजी जेवीएस चौधरी के अनुसार, यहां पर हम कोई प्वाइंट खाली नहीं छोड़ सकते। चीन ने वहां सड़कों का जाल बिछा रखा है।

ऐसे में भारत को भी अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम करना होगा। जब दोनों देश इस ओर आगे बढ़ रहे हैं तो यह संभव है कि वहां लंबे समय तक भारत चीन की फौज आमने-सामने खड़ी रह सकती हैं।
 
गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो के आसपास के कई इलाकों में तनाव जारी है। चीन ने इन्हीं इलाकों में अपने सैनिकों की तैनाती बढ़ाई है। इन जगहों पर चीन निर्माणकार्य भी कर रहा है।

पूर्व डीआईजी जेवीएस चौधरी कहते हैं कि चीन के इस गतिरोध का कोई मतलब है। यह एक ऐसा देश है जो बोलता कुछ है, दिखाता कुछ है, सोचता कुछ है और करता कुछ है।

वह सौ साल आगे की बात सोचकर कदम बढ़ाता है। लद्दाख में चीन की तरफ ज्यादातर इलाका समतल है। वहां बर्फ भी ज्यादा नहीं पड़ती। दूसरी तरफ, सख्त मौसम के चलते हमें वहां रूकने में भी दिक्कत आती है।

आईटीबीपी वहां फ्रंट फुट पर रहती है। हम वहां पर कोई क्षेत्र खाली नहीं छोड़ सकते। हमें ज्यादा से ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना होगा। सड़कों के निर्माण में तेजी लानी पड़ेगी।

चीन ने जिस तरह से वहां अपने संसाधन बढ़ाए हैं, उसे देखते हुए हमें आधुनिक उपकरण, जैसे नए हथियार और अपग्रेड वाहन लेने होंगे।

भारी वजन वाली 4X4 गाड़ियां एवं एटीवी खरीदनी चाहिए। साथ ही, हैवी ड्यूटी ट्रैक्टर भी बहुत जरूरी हैं।

दोनों देशों ने शुरू किए कूटनीतिक प्रयास

दोनों देशों के बीच चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए कमांडिंग ऑफिसर और ब्रिगेड कमांडर्स के बीच बातचीत हो रही है। इसका अभी तक कोई सार्थक नतीजा नहीं निकला है।

कूटनीतिक स्तर पर भी विवाद सुलझाने का प्रयास हो रहा है। हालांकि भारत की ओर यह साफ कर दिया गया है कि चीन ने जिस तरह सैनिकों की तैनाती बढ़ाई है, भारत भी उसी तरह अपने सैनिकों की संख्या बढ़ाएगा।

चीनी सेना सीमा के निकट अपने इलाके में तोप और दूसरे हथियार जमा कर रही है। यह जगह भारतीय सीमा से ज्यादा दूर नहीं है। पूर्वी लद्दाख में एलएसी के करीब चीनी सेना के क्लास ए वाहनों की आवाजाही का पता चला है।

ये वाहन एक घंटे में भारतीय सीमा करीब पहुंच सकते हैं।ची न की मांग है कि भारत अपने हिस्से में निर्माणकार्य बंद कर दे। हालांकि भारत ने अपना कोई भी निर्माण कार्य बंद नहीं किया है, बल्कि सेना की रिजर्व डिवीजन को लद्दाख में उतार दिया गया है।

इस डिवीजन को ऊंचाई और पहाड़ी वाले इलाकों में जंग की खासी महारत हासिल है।

– पिछले करीब 25 दिनों से दोनों सेनाओं के बीच तनाव की स्थिति है
– भारतीय और चीनी सेनाएं अपने बेस पर हथियार और जंग के मैदान में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियां ला रही हैं
– यहां तक कि आर्टिलरी गन भी सेनाएं अपने बेस पर ला रही हैं
– भारतीय वायुसेना भी इस इलाके का लगातार सर्विलांस कर रही है

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव की स्थिति बरकरार है। इस बीच सेना के कुछ सूत्रों ने बताया है कि भारतीय और चीनी सेनाएं अपने बेस पर हथियार, टैंक और जंग के मैदान में इस्तेमाल होने वाली अन्य भारी वाहन ला रही हैं। साथ ही, एलएसी पर आर्टिलरी गन भी लाए जा रहे हैं। भारत और चीन की सेनाएं 5 मई से ही आमने-सामने डटी हैं।

भारतीय सीमा में घुसकर चीनी सैनिकों ने बनाए कैंप
सूत्र बताते हैं कि इस महीने की शुरुआत में चीनी सेना ने भारतीय सीमा में घुसकर पैंगोंग सो और गालवान घाटी में कैंप बनाने शुरू कर दिए। भारतीय सेना ने इसका कड़ा विरोध करते हुए चीनी सैनिकों से तुरंत पीछे हटने को कहा ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। चीन ने डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी में भी अपनी सेना की संख्या बढ़ा दी है।

2500 चीनी सैनिक पैंगोंग में तैनात
खबर है कि करीब 2,500 चीनी सैनिक पैंगोंग सो और गलवान घाटी में तैनात किए गए हैं। साथ ही वह अस्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर और हथियार भी जमा कर रहे हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। सूत्रों ने कहा है कि सैटेलाइन इमेज से साफ हो रहा है कि चीन ने अपनी सीमा में डिफेंस इन्फ्रास्टक्चर भी बनाना शुरू कर दिया है। हालांकि, भारतीय सेना का अब तक यह मान रही है कि चीन ये सब सिर्फ भारत पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है।

चीन के साथ सीमा विवाद के हल के लिए राजनयिक व सैन्य वार्ता जारी : शाह

नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि मौजूदा सीमा विवाद को लेकर चीन के साथ कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत चल रही है तथा उन्हें उम्मीद है कि इस मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा। इसके साथ ही पाकिस्तान को स्पष्ट चेतावनी में, शाह ने कहा कि भारत अपनी सीमाओं पर किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगा और ऐसे कदमों का उचित जवाब दिया जाएगा। उन्होंने ‘रिपब्लिक भारत’ टीवी के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘अभी कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर संवाद चल रहे हैं और मुझे विश्वास है कि यह मुद्दा हल हो जाएगा।’’ शाह लद्दाख और कुछ अन्य क्षेत्रों में चीन के साथ सीमा विवाद तथा दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़पों के वीडियो और तस्वीरों के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे। गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को कमजोर नहीं होने देगी और देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए सभी कदम उठाएगी। ‘‘इस संबंध में किसी को भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए।” सीमा पर पाकिस्तान की हरकतों के बारे में पूछे जाने पर, शाह ने कहा कि भारत ने कभी भी विस्तारवादी नीति नहीं अपनायी है लेकिन वह अपनी सीमाओं पर किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगा।शाह ने कहा, ‘‘अगर कोई ऐसा करने की कोशिश करता है, तो हम मुंहतोड़ जवाब देंगे। यह हमारा कर्तव्य और जिम्मेदारी है।”कोविड-19 के खिलाफ चल रही लड़ाई का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार इस महामारी के प्रकोप का मुकाबला करने में सफल रही है। उन्होंने कहा, “यह पता नहीं है कि टीके और दवा कब तक आएगी। लोग कब तक अपने घरों में रहेंगे? मैं कह सकता हूं कि भारत और नरेंद्र मोदी की कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई अब तक सफल रही है।” शाह ने कहा कि पूरा देश एक साथ और एक दिमाग से लड़ रहा है, इसलिए कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई सफल रही है। उन्होंने कहा, “जहां तक ​​अनलॉक-1 (सोमवार से शुरू) की बात है, राज्य, जिले, पंचायत, आशा कार्यकर्ता तैयार हैं। कोविड से लड़ने के लिए एक सेना तैयार है।” गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री और वह खुद इस बात से दुखी थे कि कुछ प्रवासी मजदूरों को पैदल घर जाना पड़ा जबकि उनके परिवहन के लिए व्यवस्था की जा रही थी।उन्होंने कहा, “हो सकता है कि यह गलत संचार या जागरूकता की कमी के कारण हुआ। लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि रेलवे द्वारा लगभग 4,000 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं, जिनसे यात्रा कर 50 लाख से अधिक लोग अपने-अपने घरों तक पहुंच चुके हैं। इसके अलावा करीब 40 लाख लोगों ने अपने गंतव्यों तक पहुंचने के लिए बसों का उपयोग किया।’’ शाह ने कहा,‘‘मैं रेलवे को बधाई देना चाहता हूं कि रूट ड्राइवर नहीं होने के बावजूद वे इतनी सारी श्रमिक ट्रेनें चलाने में कामयाब रहे।’’ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना किए जाने के बारे में पूछे जाने पर, शाह ने कहा कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई हो या चक्रवात से निपटना, पश्चिम बंगाल में चीजें सही आकार में नहीं थीं। उन्होंने कहा, “एक बात निश्चित है कि आने वाले दिनों में भाजपा पश्चिम बंगाल में सरकार बनाएगी। बंगाल के लोग बदलाव की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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पूर्वी लद्दाख में भारतीय व चीनी सैनिकों के बीच कोई हिंसा नहीं

 

नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) भारतीय सेना ने भारत और चीन के सैनिकों के बीच टकराव का कथित वीडियो सामने आने के बाद रविवार को कहा कि पूर्वी लद्दाख में वर्तमान में दोनों पक्षों के बीच कोई हिंसा नहीं हो रही है। इसने सोशल मीडिया पर चल रहे उस वीडियो को खारिज किया जिसमें पूर्वी लद्दाख में चीनी और भारतीय सैनिक कथित तौर पर आपस में भिड़ते दिखाई देते हैं। सेना ने एक बयान में कहा, ‘‘वीडियो में दिख रही चीजें प्रामाणिक नहीं हैं। इसे उत्तरी सीमाओं पर स्थिति से जोड़ने का प्रयास दुर्भावनापूर्ण है। वर्तमान में कोई हिंसा नहीं हो रही है।’’ हालांकि, सेना ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या यह वीडियो पूर्व में हुए किसी टकराव का है। बयान में कहा गया कि दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन पर स्थापित प्रोटोकॉल के तहत दोनों पक्षों के बीच मतभेदों का सैन्य कमांडरों के बीच वार्ता के माध्यम से समाधान किया जा रहा है। बिना तारीख वाले वीडियो में पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिक कथित रूप से आपस में भिड़ते दिखाई देते हैं। भारतीय सैनिकों को पहुंची चोट दिखाने वाली अप्रमाणित तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर आई हैं। सेना ने कहा, ‘‘दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन पर स्थापित प्रोटोकॉल के अनुरूप सैन्य कमांडरों के बीच वार्ता के माध्यम से मतभेदों का समाधान किया जा रहा है।’’ बयान में कहा गया, ‘‘हम राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव डालने वाले मुद्दों को सनसनीखेज बनाने के प्रयासों की कड़ी निंदा करते हैं। मीडिया से आग्रह है कि वह दृश्य सामग्री को प्रसारित न करे जिससे सीमाओं पर मौजूदा स्थिति के खराब होने की आशंका है।’’ पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो, गलवान घाटी, देमचोक और दौलत बेग ओल्डी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच तीन सप्ताह से अधिक समय से गतिरोध जारी है जिसे 2017 के डोकलाम गतिरोध के बाद सबसे बड़ी सैन्य तनातनी माना जा रहा है। स्थिति तब बिगड़ गई जग पैंगोंग त्सो क्षेत्र में पांच मई की शाम भारत और चीन के लगभग 250 सैनिकों के बीच हिंसक टकराव हुआ जिसमें दोनों देशों के 100 से अधिक सैनिक घायल हो गए। पैंगोंग त्सो के आसपास फिंगर क्षेत्र में भारत द्वारा एक महत्वपूर्ण सड़क बनाए जाने और गलवान घाटी में दारबुक-शयोक-दौलत बेग ओल्डी को जोड़ने वाली एक और महत्वपूर्ण सड़क के निर्माण पर चीन का कड़ा विरोध टकराव का कारण बना। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि विवाद के समाधान के लिए चीन के साथ सैन्य और राजनयिक स्तर पर द्विपक्षीय वार्ता जारी है।

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भारत, चीन ने पूर्वी लद्दाख के निकट अपने अड्डों पर भारी उपकरण और हथियार प्रणाली पहुंचाए

 

नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) भारत और चीनी सेनाओं के बीच 25 दिन से भी ज्यादा समय से जारी गतिरोध के बीच दोनों देश पूर्वी लद्दाख के विवादित क्षेत्र के पास स्थित अपने सैन्य अड्डों पर भारी उपकरण और तोप व युद्धक वाहनों समेत हथियार प्रणालियों को पहुंचा रहे हैं। सैन्य सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी । दोनों सेनाओं द्वारा क्षेत्र में अपनी युद्धक क्षमताओं को बढ़ाने की यह कवायद ऐसे वक्त हो रही है जब दोनों देशों द्वारा सैन्य व कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के जरिये इस मुद्दे को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि चीनी सेना पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अपने पीछे के सैन्य अड्डों पर क्रमिक रूप से तोपों, पैदल सेना के युद्धक वाहनों और भारी सैन्य उपकरणों का भंडारण बढ़ा रही है।उन्होंने कहा कि भारतीय सेना भी चीनी सेना की बराबरी के लिए इस क्षेत्र में अतिरिक्त जवानों के साथ ही उपकरणों और तोप जैसे हथियारों को वहां पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि जबतक पैंगोंग त्सो, गलवान घाटी और कई अन्य इलाकों में यथा स्थिति बरकरार नहीं होती तब तक भारत पीछे नहीं हटेगा। भारतीय वायुसेना विवादित क्षेत्र में कड़ी निगरानी कर रही है। काफी संख्या में चीनी सैनिक इस महीने के शुरू में वस्तुत: सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में घुस आए थे और तबसे पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी में बने हुए हैं। भारतीय सेना ने चीनी जवानों के इस अतिक्रमण का तीव्र विरोध किया और उनके तत्काल वहां से वापस लौटने तथा शांति व यथास्थिति बहाल करने की मांग की। चीनी सेना ने डेमचोक और दौलतबेग ओल्डी में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई थी। ये दोनों संवेदनशील क्षेत्र हैं और पूर्व में यहां दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हो चुकी है। माना जा रहा है कि चीन ने पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी में करीब 2500 सैनिकों को तैनात किया है और धीरे-धीरे अस्थायी ढांचा और हथियारों को बढ़ा रहा है। हालांकि संख्या को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है। सूत्रों ने कहा कि उपग्रह से ली गई तस्वीरों में नजर आ रहा है कि चीन ने मानक सीमा के अपनी तरफ रक्षा आधारभूत ढांचे में तेजी से इजाफा किया है जिसमें पैंगोंग त्सो इलाके से करीब 180 किलोमीटर दूर एक सैन्य हवाईअड्डे का निर्माण भी शामिल है।भारतीय सेना के आकलन के मुताबिक इसका उद्देश्य भारत पर दबाव बनाना है। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमें चीनी हथकंडों के बारे में अच्छे से पता है। भारतीय सेना अपने रुख पर अडिग है और हम इलाके में यथास्थिति के बहाल होने से कम पर राजी नहीं होने वाले।”रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि चीन के साथ विवाद को सुलझाने के लिये सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर द्विपक्षीय बातचीत चल रही है। भारत द्वारा पैंगोंग त्सो झील के पास के इलाके में सड़क निर्माण और गलवान घाटी में डरबुक शायोक-दौलत बेग ओल्डी मार्ग का चीन द्वारा विरोध गतिरोध का मुख्य कारण है। सूत्रों ने कहा कि चीन भी एक सड़क का रनर्माण कर रहा है जिस पर भारत को आपत्ति है। सूत्रों ने कहा कि अतिरिक्त जवानों, वाहनों और तोपों को भारतीय सेना ने पूर्वी लद्दाख में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिये भेजा है, जहां चीनी सैनिक आक्रामक रुख अपना रहे हैं।

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Ashok Swain
@ashoswai
Professor of Peace and Conflict Research, Uppsala University, Sweden.
@UU_Peace
Uppsala, Sweden

 

Ashok Swain
@ashoswai
This what Chinese soldiers have done to Indian soldiers in Ladakh!
Why is Modi silent? Why no demand by Indian media for surgical strike? Where is Mohan Bhagwat’s RSS ‘Army’?


Ashok Swain
@ashoswai
Bhakts – Don’t threaten me! It has NOT worked for 6 years, why do you think it will work now?

Ashok Swain
@ashoswai
‘All Lives Matter’ is just a Hindu Upper Caste privilege in India!

Ashok Swain
@ashoswai
·
May 30
Before sending me an invitation to speak or comment, please remember:
I criticize the regime not the country;
I criticize Hindutva not Hindus;
I criticize Brahminism not Hinduism!


Ashok Swain
@ashoswai
·
May 30
Only a vulture feasts when people die!
#COVID19

Ashok Swain
@ashoswai
·
May 30
True, 6 decades undone in 6yrs
1 India’s economy worst in 42yrs
2 Jobless rate 45yrs high
3 Top9 #Coronavirus-hit countries
4 Migrant workers dying in hordes
5 India kills a crow, Pakistan captures a pilot
6 China captures territory, India begs kindness

Ashok Swain
@ashoswai
· May 30
China has 288 million migrant workers while India has only 40-60 million. Have you heard a single migrant worker dying in China for #COVID19 lockdown? In India, migrant workers dying in hordes due to hunger, exhaustion and regime’s barbaric policies!

Ashok Swain
@ashoswai
·
May 30
Y’day, speaking at TEDxDurbarMarg on India-Nepal water issues. Due to on-going tension, organizers in Kathmandu had avoided discussing border dispute. Still, India’s ‘nationalist’ sanskaris hacked the talk by putting obscene images on the screen while it was moderated by a woman.

Ashok Swain
@ashoswai
May 29
China treats Modi as a clown!

Ashok Swain
@ashoswai
·
May 29
Hindutva Gang, which was boasting to snatch American companies away from China, totally clueless now when China has even taken India’s own land. Modi did the Dokalm standoff drama & the whole Dokalm is now in China’s control. Same story going to repeat in Galwan river valley!

Ashok Swain
@ashoswai
May 29
China is fortifying its intrusion into India’s Ladakh by building new roads & bringing in heavy artillery & tanks and has stationed its fighter aircrafts nearby. Indian Army has taken defensive position and Modi is hiding.

Ashok Swain
@ashoswai
May 29
India might not survive Modi’s 2nd term!
Don’t tell that you were not warned.

China ignores India over dam project in Pakistani Kashmir

Debt-laden Islamabad gets Beijing funds for joint venture opposed by Delhi

ADNAN AAMIR, Contributing writer
May 24, 2020 15:36 JST
KARACHI — In a move that has seriously displeased India and tightened economic relations with China, Pakistan has awarded a contract to a Chinese-Pakistani joint venture to build a dam in the long-disputed Kashmir region.

The initial phase of the Diamer Bhasha dam project, worth 442 billion Pakistan rupees ($2.75 billion), has been awarded to a joint venture between Power Construction Corporation of China and the Pakistan Army’s Frontier Works Organization on a 70:30 basis.

The project is located in Gilgit-Baltistan, a northerly region 320km from the border with China. The multipurpose dam will be used for power generation, water storage and flood control. It will have a 4,500 megawatt capacity and storage for 8.1 million acre feet of water.

The dam is China’s first major infrastructure project in Kashmir, and part of the China-Pakistan Economic Corridor (CPEC), which is tied into China’s massive Belt and Road Initiative.

In 2018, China installed an 820km fiber optic cable under CPEC that cost $37.4 million and passed through the same region.

Muzammil Hussain, chairman of Pakistan’s Water and Power Development Authority (WAPDA), said his organization will provide 30% of the investment and the government of Pakistan the rest. Hussain put the total cost of the project at 1.497 trillion rupees ($8.77 billion).

The figure is contentious, however, since Hussain previously estimated the cost at about $14 billion on various occasions.

Pakistan is certainly in a financial crunch and would be unable to self-finance the project. Only last week, the government diverted $6.23 million from a COVID-19 relief fund to pay interest on energy debts.

James M. Dorsey, a senior fellow at Singapore’s S. Rajaratnam School of International Studies (RSIS), believes that China will fund the project through loans to Pakistan, but how these will be repaid remains to be seen. Dorsey told the Nikkei Asian Review that the project will serve China’s interests more than Pakistan’s because “China has the upper hand in bargaining due to its economic support to Pakistan under [CPEC].”

Some observers believe Pakistan is keen to get the dam built quickly and willing to leave financing concerns until later. “There’s no indication that Islamabad has thought through how it will cover these immense costs,” Michael Kugelman, deputy director of the Asia program at the Wilson Center in Washington D.C., told Nikkei. “Or if it has thought things through, it hasn’t released its plan to the public.”

“Since [Islamabad] will have few other funder options, it won’t have much leverage with China in terms of the structuring of a potential loan,” Kugelman said.

In November 2017, Pakistan pulled the dam proposal out of CPEC because of Beijing’s conditions, which included owning the project. Islamabad’s earlier requests to other funding sources, including the World Bank and the Asian Development Bank in 2016, were turned down because of the longstanding hostility between India and Pakistan over Kashmir.

India immediately condemned the latest development. “We have consistently conveyed our protest and shared concerns with both China and Pakistan on all such projects in the Indian territories under Pakistan’s illegal occupation,” Shri Anurag Srivastava, the official spokesperson of India’s Ministry of External Affairs said in a statement.

Beijing dismissed the Indian protest. Foreign Ministry Spokesperson Lijian Zhao described the dam as mutually beneficial with win-win potential. “China’s position on the issue of Kashmir is consistent,” said Zhao.”China and Pakistan conduct economic cooperation to promote economic development and improve the well-being of the local people.”

Observers doubt that India’s dismay will impede the project. “India cannot use diplomatic pressure to stop work on this project because world attention is toward the coronavirus pandemic,” said Dorsey.

“New Delhi has long opposed the Belt and Road Initiative because of its intended projects in disputed areas, including Gilgit-Baltistan, and that certainly hasn’t stopped Pakistan and China,” said Kugelman. “The same applies to the dam.”

pic of Ashok Swain

Ashok Swain
@ashoswai
May 29
Chair of the European Parliament’s Subcommittee
on Human Rights writes to Modi’s henchman and India’s Home Minister Amit Shah expressing serious concern over human rights violations in India, and asking for the release of imprisoned political and social activists.

Ashok Swain
@ashoswai
May 28
No end to this joke – Some say the car bomb was 20kg, some others 45 kg, this Gupta says 60kg. Why can’t they even lie properly?

Ashok Swain
@ashoswai
May 27
There is NO end to Hindutva stupidity!

Ahmedabad Mirror
@ahmedabadmirror
May 27
For first time in India, clinical trial of ayurvedic medicine derived from panchgavya (cow’s milk, butter, ghee, dung and urine) to begin in Rajkot, followed by Ahmedabad and Surat

Ashok Swain
@ashoswai
May 27
Indian Army being “pushed back, kilometre by kilometre” by Chines forces. It seems that in a month almost 35 sq km have been “lost” to China this way in a month. But, India’s ‘nationalist TV anchors’ have been told to stay away from this topic.
@bainjal

Prime Minister Imran Khan meets Crown Prince of Saudi Arabia HRH Prince Mohammad Bin Salman Al Saud at Riyadh on 15th October, 2019.

Ashok Swain
@ashoswai
May 27
What happened to Modi making India a permanent member of UN Security Council? Or, even a member of Nuclear Suppliers Group?
China & India had developed a good working relationship after Rajiv Gandhi’s visit to Beijing in 1988, but Modi ruined that signing LEMOA with USA in 2016!

Ashok Swain
@ashoswai
May 27
India has captured disputed area with Nepal and refuses to negotiate. China has captured disputed area with India and refuses to negotiate.
Law of the Jungle!

Ashok Swain
@ashoswai
May 27
To divert water from 3 Western rivers of Indus system, India needs to build more than 100+ km of underground tunnels. Till now, India’s longest ‘road’ tunnel is only 9.28 km.

Ashok Swain
@ashoswai
May 27
China clearly threatens Modi for being Trump’s poodle – Warns the border tension this time may become more intense than the Doklam standoff!

Ashok Swain
@ashoswai
May 26
Modi regime’s road construction in disputed #Kalapani area is to divert domestic attention in India from #COVID19 policy failures. However, this action has further pushed Nepal to China’s side.
My interview to
@DeepakAdk
for
@NAR

India should eschew Western views of China for border peace

By Long Xingchun

Source:Global Times
Published: 2020/5/25

India in recent days has illegally constructed defense facilities across the border into Chinese territory in the Galwan Valley region, leaving Chinese border defense troops no other options but making necessary moves in response, and mounting the risk of escalating standoffs and conflicts between the two sides.

There is no line of actual control along the China-India border that both sides recognize. Due to the improvement of infrastructure at the border area, the two countries have ramped up patrols, which have led to more frequent standoffs as a result. Yet most of them were directly and properly eased through communication among frontline officers. Only a few incidents have been exposed by media outlets. But they aroused public attention.

Unlike previous standoffs, the latest border friction was not caused by accident, but was a planned move of New Delhi. India has been clearly and definitely aware that the Galwan Valley region is Chinese territory. But according to media reports, since early May, India has been crossing the boundary line into the Galwan Valley region and entering Chinese territory. Indian soldiers have also deliberately instigated conflicts with their Chinese counterparts. If India failed to stop such provocations as soon as possible, it will impact on Beijing-New Delhi ties – and may even exceed the sort of intensity of the Doklam standoff.

In the summer of 2017, a standoff over the Doklam deteriorated bilateral ties between China and India. However, thanks to the efforts of the two governments, particularly during informal meetings between the two countries’ top leaders in April 2018 and October 2019, strategic trust was restored. The results have not come easily and should be cherished by both sides.

Some Indians believe slowed Chinese economy growth and some Western countries’ blame game on China provide them a great opportunity where the border issue will fall to their advantage amid the COVID-19 pandemic.

This may reflect the viewpoints of certain circles from the Indian government and military. However, this speculative mind-game is based on an incorrect judgment of the international order and China’s national condition. This is flawed logic and ultimately detrimental to India.

China has been the first to effectively curb the coronavirus epidemic. Businesses and people’s life in China have already returned to normal. This demonstrates the strong leadership of the Chinese government and firm social cohesion in China.

Meanwhile, the number of India’s confirmed COVID-19 cases has surpassed that of China, and the inflection point in India is yet to come. Currently, India’s top priority should be handling the epidemic and restoring economy rather than instigating border disputes.

Media reports saying that China is facing global isolation have turned out to be an illusion that represents the US interests. The current international situation is not in favor of India to take advantage of China. Some people in India and other countries believe that the international community equals the US, and that whichever country that has disputes with the US is in “international isolation.”

Although a handful of Indian media outlets and social organizations echo the Trump administration’s views, the Indian government should keep a sober head to not be used as cannon ash by the US. The World Health Assembly held on May 18 and 19 showed that it was the US, not China, that had been isolated by the international community.

Although China’s relationship with the US is tense, the international environment for China is much better than it was in 1962 when India started and crushingly defeated in a border war with China. In 1962, the national strength of China and India were comparable. Today by stark contrast, China’s GDP is about five times that of India.

Generally, US allies have not followed its strategic oppression of China. Even those pro-US Indians will not count on the Trump administration, which advocates the “America First” policy, to really back India. The Trump administration encourages India to be tough on China so as to provoke and profit from the China-India disputes.

The more the Chinese nation is exposed to external pressures, the more it will be tightly united. Hopefully, the Indian government, military, scholars and media will improve their understanding and research on China. As an ancient civilization, India is wise enough to avoid understanding China through biased US lens. It is in the interests of India to understand the real China and make correct and strategic judgments on this basis.

The author is a senior research fellow of Academy of Regional and Global Governance, Beijing Foreign Studies University and president of Chengdu Institute of World Affairs. opinion@globaltimes.com.cn


Ashok Swain
@ashoswai
May 25
Has that pigeon confessed? In which language, Urdu or Punjabi?

Press Trust of India
@PTI_News
 May 25
A pigeon, suspected to be trained in Pakistan for spying, captured along the International Border (IB) in Kathua district of Jammu and Kashmir: officials.

Nepal: Stop honoring Indian Army Chief; NC favors bill

Saturday
May 30, 2020
telegraphnepal

Kathmandu, N. P. Upadhyaya: To the utter dismay of the Indian establishment both in Delhi and the RAW Nepal-command-in-Lainchour, Kathmandu, the Nepali Congress has decided to vote favoring the Constitution amendment bill as sought by incumbent Prime Minister Oli.
A severe jolt to expansionist India under Prime Minister Modi.

The Nepali Congress party’s Central Working Committee meeting held this afternoon, Saturday, has decided to instruct the parliamentary party to vote in favor of the amendment bill to change the coat of arms in accordance with the new map which includes Limpiyadhura, Kalapani and Lipu Lekh, confirms the NC party’s spokesperson Bishwo Prakash Sharma, reports the people’s review online portal.

With the main opposition party deciding to support the bill, the Oli government has enough members for the proposal to get approved by the Nepali parliament”, writes the Kathmandu Post.
A set of the Indian academicians and diplomats take the Nepali Congress party as the “asset” of the Indian regime born 1947.

Is the Nepali Congress then the India card in Nepal? Better this question be answered by the NC itself for the sake of assuring the Nepali population and also to rebuke the India’s blunt allegation very freshly made by the Delhi residing India’s informed citizenry and diplomats.

The NC must rebuke the blame if it is not an Indian asset.
But what makes these Indian nationals to conclude that the NC was their precious asset in Nepal?

Similarly, the present communist government, according to the men close to the RAW machinery, is a proxy of China and that China has brought the two Communist parties together.
Interestingly, the Indian Army Chief MM Naravne hurled this wild allegation that Nepal was a China’s proxy.

Narvane made these near to foolish comment and made wild observations on May 15/2020 and in doing so the Army man from India forgot that he had almost declared a war on Nepal.


Strong rumors say that the Indian soldier was told to make such a comment as instructed by his Prime Minister-Modi.

Very unfortunately, the Indian Army chief is the honorary Army chief of the Nepal Army as well. So sad it is. But the continuing tradition that it has been since the early 1960s.
High placed sources in Nepal opine that Mr. Naravne be not awarded henceforth with the customary honorary position of the Chief of the Nepal Army.

He simply doesn’t merit the high order from Nepal.
Some even suggest the Nepal government to break this Nepali tradition as the Indian Army Generals poke their nose in Nepal’s internal affairs and work to damage Nepal’s ties with friendly countries other than India.

Recall the event when General Deepak Kapur meddled in Nepal’s exclusive case when Nepal Army Chief Rujkmangad Katwal was sacked by Prime Minister Prachanda-the New Delhi sponsored Maoists of Nepal.

The Indian Army chief Kapur directly made a phone call to Nepal President to reinstate the sacked Nepal Army Chief.
So as per the Indian academicians and half-baked diplomats, if the NC is the India Card then the Communists were the China card.

The ‘strategic balance’ has thus been maintained in Nepal internally.


Knowledgeable sources in Nepal make a fun of such wild allegations such as the one/or two mentioned above.

Prior to 1947, the present day India was governed by the British India Company and yet prior to the British, the Great Mughals who came from Fargana/Bukhara in Central Asia ruled for several hundred years.
So for numerous centuries, the Indian nationals, as stated earlier, have had to compromise with slavery. This must have been a painful experience for them. Our sympathy naturally goes to the former destitute.

The so called “Indian assets” in Nepal that is the Nepali Congress has assured the Communist government in Nepal that they would vote in favor of the constitutional amendment as desired by Prime Minister Oli’s administration in order to provide the needed “constitutional guarantee” to the new political map released by the Nepali State on May 20/20202.
This makes the PM Oli’s set up more confident now.

This Nepali map is the original map of this “sovereign” nation which has been published as a befitting response to the bogus map issued by India on 2nd November 2019 which incorporated Nepali landmass in Western Nepal “unilaterally”.

The Indian map was published after forcefully changing the status of Kashmir August 5/2019.
And the ever erratic and expansionist India did yet another blunder by “unilaterally” constructing a link road to Tibet, China that gulps the Nepali land which was inaugurated by one Indian Minister on 8th May/2020. It was this event that alerted Nepal.

The bilateral dialogues have not yet been initiated and the reports are that India is trying to sort out the issue with Nepal using its assets in Nepal effectively. The under table deal trick is the best option for the Indian administration to seduce and buy loyalty from the Nepali Parliamentarians, it is widely believed.

Hopefully, the Indian Ambassador B. M Quatra is quite busy in “seducing the presumed Indian assets in Nepal, strong rumors say.
The general impression in Nepal had been that Sher Bahadur Deuba who heads the Nepali Congress party would prefer not to annoy the Indian establishment by supporting the Oli government. However, this time, the Nepali Congress appeared bit relaxed and guided by “nationalist impulse” and thus went against its declared “India tilt”. The nationalist section among the Nepali Congress appear to have put excessive pressure on the party’s high command.
In a way, the Nepali Congress has been able to dilute the Indian allegation that it is a political entity which is the blind supporter of the Indian establishment since the very first days of its inception.
The Nepali Congress, unfortunately, took its birth in India. This is the NC’s birth history. The Nepali Communists followed the suit.
And the Nepali Congress now has decided to vote in favor of the new political map through the impending constitutional amendment despite the Indian Ambassador’s Himalayan efforts to corrupt some of the high flying NC leaders. Good news for Nepal.
The envoy tried his best but has failed this time. Sorry Ambassador!!!

Those close to the sleeves/or arm pits of the Indian embassy were known India hands in Nepal including one lady who is born Indian but married to a Nepali national.
Though this online portal is not sure, however, our professional colleagues claim that those who entered the Indian embassy in Kathmandu in these days (or had been summoned by His Majesty Ambassador Binaya Mohan Quatra for tasting the India’s sweet but dark Chocolates) were Bimlendra Nidhi, Amresh Kumar Singh from the Nepali Congress.

One more name is there who reportedly had entered the Indian Embassy compound voluntarily is Ms. Sarita Giri.

Ms. Giri is born Indian but married to a Nepali national. This is meaningful in that she is the one who has never played double. She believes in what she is. Her allegiance to the Indian Union is appreciated. But her love for India must not come in the way of Nepal’s national interests.
Rumors are that this lady once even made great efforts for changing the name of this ancient country.

Now that the NC is in favor to provide the constitutional guarantee to the new Nepali map, however, insiders of the NC party also say that the party supported the Oli government this time with some political riders attached.

Knowledgeable sources say that the NC riders are that the Oli government should initiate dialogues with the Indian government on a friendly manner to seek the solutions to the border imbroglio.
This is not a rider but a friendly suggestions to the Oli administration, claim political analysts in Kathmandu.

In fact, PM Oli also believes in holding dialogues with India.

What remains yet to be seen is how the Madhes based Nepali parties extend their support to the Oli establishment and on what conditions?

The Madhesh based parties are generally believed to have “intense love and honor” for India and the establishment there.

The logic is they have ROTI, BETI ties with country across the border.

To conclude: A pretty annoyed India that has faced diplomatic debacle may think of imposing yet another inhumane economic blockade? The possibilities of a blockade can’t be ruled out as per the experienced experience of the Nepali people. But under what pretext? The inhumane Indian blockade is most welcome if India so desires. That’s all.

Brahma Chellaney
@Chellaney
May 28
Trump’s tweet on the India-China border crisis, while professing U.S. neutrality to be an arbitrator, has had three effects: 1. raised the international salience of the border standoffs. 2. made it harder for Beijing or New Delhi to play down the crisis. 3. provoked China’s ire.

Ajay Kumar
@AjayKum33330695
May 28
Sir it also sent a signal to China that it’s constant needling of India on borders was being watched by US and China couldn’t browbeat India in a standalone conflict. Though
@POTUS
suggested mediation, but it actually sent a powerful message to China an international brigand.

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