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भारत नेपाल सीमा पर तनाव है : जो 70 साल में कभी नहीं हुआ वो अब मोदी के राज में हो रहा है : रिपोर्ट

भारत और नेपाल सदियों पुराने साथी हैं, दोनों देशों के सम्बन्ध हमेशा ही बहुत अच्छे रहे थे, भारत से नेपाल जाने के लिए कोई वीज़ा, पासपोर्ट की ज़रूरत नहीं रहती है, नेपाल के लाखों नागरिक भारत के कोने कोने में मौजूद हैं, ये रिश्ता बहुत गहरा और प्यारा था मगर फिलहाल दोनों देशों के बीच तल्खी पैदा चुकी हैं, भारत का बड़े भाई का किरदार, नेपाल की समझ से बाहर से परे की बात रहा है, नेपाल ने अब बड़े भाई की आँखों में आँखें दाल कर एलान कर दिया है कि वो अब जो चाहेगा करेगा, भारत से नेपाल की दोस्ती अब समाप्त हो चुकी है, यहाँ पूरी ग़लती भारतीय पक्ष की है, नेपाल जैसे जैसे शानदार दोस्त को भारत समझा नहीं पाया, ये विदेश नीति का खोट है, कोई भी इंसान हो या जानवर, हर कोई इज़्ज़त और मुहब्बत चाहता है, नेपाल के साथ जो भी मसले थे उन पर भारत को खुद पहल कर सुलझाना चाहिए था, अब वक़्त गुज़र चुका है, नेपाल ने अपनी राह पकड़ ली है, उसका रास्ता सीधे चीन की तरफ जाता है,

भारत-नेपाल के बीच बढ़ते तनाव ने उन लोगों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, जिनके संबंध बॉर्डर के दोनों तरफ़ रह रहे लोगों से हैं.

दोनों ही देशों ने सुरक्षा की दृष्टि से सीमाओं पर सेना की तैनाती कर दी है. सीमा पर रहने वाले कई लोंगों के रिश्तेदार बॉर्डर के उस पार रहते हैं, अब उनका मिलना-जुलना मुश्किल हो गया है.

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इस दौरान कुछ हिंसक घटनाओं की भी ख़बरें आईं.

सीतामढ़ी की घटना
इसी महीने की 13 तारीख को सीतामढ़ी की एक अचला नाम की महिला से मारपीट की ख़बर आई. महिला कथित रूप से बॉर्डर पर अपने माता पिता से मिलने गई थी जो नेपाल में रहते हैं. मुलाक़ात के दौरान नेपाली पुलिस ने आपत्ति जताई. इसके बाद ग्रामीणों से बहस हो गई और फ़ायरिंग भी हुई.

गोलीबारी की घटना में जानकी नगर के बिकेश कुमार की मौत हो गई जबकि दो अन्य लोग घायल हो गए.

अचला कहती हैं, “अगर मुझे पता होता कि मेरे माता-पिता से मिलने पर ऐसा बखेड़ा खड़ा हो जाएगा तो मैं कभी मिलने नहीं जाती. मैं ठीक से मिल भी कहाँ पाई! पुलिस लाठियाँ बरसाने लगी. हम लोगों को किसी तरह जान बचाकर भागना पड़ा.”

अचला एक छोटे बच्चे की माँ हैं. वो कहती हैं, “मेरे बेटे को देखने के लिए ही उसके नाना-नानी ने सीमा पर बुलाया था. सीमा पर मुलाक़ात तय थी. पुलिस ने परमिशन भी दी थी लेकिन थोड़ी ही देर में पुलिस हमें वहाँ से हटाने लगी. गाँववालों ने सवाल किया तो पुलिस उनके साथ उलझ गई.”

अचला के सुसर लगन राय को नेपाली पुलिस ने कथित रूप से अपने कब्जे में ले लिया था और 24 घंटे बाद रिहा किया.

लगन राय बताते हैं, “मुझे घसीट कर उस पार ले जाया गया. लाठी, डंडे, बेल्ट से मारा गया, धमकाया गया और यह स्वीकार करने का दबाव बनाया गया कि भारत की तरफ से सैकड़ों लोगों का हुजूम नेपाल में लूट-पाट करने आ रहा था और मैं भी उसी में शामिल था.”

राय आगे कहते हैं, “मैं हर बार मना करता गया लेकिन वे लोग मारते रहे. आख़िर में एक पुलिस अफ़सर आए. उन्होंने भी मुझसे चार-पांच बार पूछा, लेकिन मेरे मना करने के बाद उन्होंने अपने जवानों से मुझे वापस बॉर्डर पर छोड़ देने के लिए कहा. इतनी मार पड़ी कि शरीर का दर्द अभी तक ख़त्म नहीं हुआ है.”

इस घटना के बाद से लोगों में डर बना हुआ और वो अपने रिश्तेदारों से मिलने में हिचकिचा रहे हैं.

दोनों तरफ़ की पुलिस का क्या कहना है
झड़प और गोलीबारी की घटना के बाद से गाँव में तनाव तो है, लेकिन सशस्त्र सीमा बल और सीतामढ़ी की पुलिस की चौकसी के कारण दोबारा हिंसा की घटना नहीं हुई.

सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार बीबीसी से कहते हैं, “मामला लॉकडाउन के उल्लंघन का था. लेकिन यहाँ के लोगों ने मॉब बनाकर नेपाली एपीएफ़ के साथ लड़ाई कर ली. झड़प जिस जगह पर हुआ, वह नेपाल का इलाक़ा पड़ता है. इसका मतलब है हमारे यहाँ के लोगों ने नो मेन्स लैंड पार कर लिया था.”

नेपाली पुलिस पर लगन राय से मारपीट करने के आरोपों पर सीतामढ़ी के एसपी कहते हैं, “लगन राय के वापस आने के बाद हमने उनकी मेडिकल चेकअप कराया था. कोई गंभीर बात नहीं थी, इसलिए उन्हें घर जाने दे दिया गया.”

एसपीअनिल कुमार ने बताया, “तनाव तो है लेकिन शांति है. हम स्थानीय लोगों को उधर जाने से रोक रहे हैं. पुलिस सीमावर्ती गाँवों में लगातार गश्त कर रही है.”

नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ गोलीबारी की घटना और लगन राय को लेकर दोनों संबंधित ज़िलों के स्थानीय प्रशासन के बीच बातचीत हुई थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए बयान में नेपाली आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स के इंस्पेक्टर जनरल नारायण बाबु थापा ने कहा था, “भारत की तरफ़ के ग्रामीणों ने मॉब बनाकर पुलिस पर हमला किया था. यहाँ तक कि उन्होंने हमारे जवानों से हथियार भी छीने. हमने पहले दस राउंड हवाई फायरिंग की उसके बाद हमें आत्मरक्षा में ओपेन फायरिंग करनी पड़ी.”

 

‘पहली बार लग रहा दो देश हैं’

इलाक़े में रहने वाले शंभू कहते हैं, “उस घटना के बाद से दोनों तरफ़ के लोगों में आक्रोश है. जब लॉकडाउन चल रहा था, तब भी हमलोग नेपाल के साइड में चले जाते थे क्योंकि उधर अपने खेत हैं, अपने लोग रहते हैं. लेकिन पिछले 15-16 दिनों से कोई आ-जा नहीं पा रहा है. पहली बार लग रहा है कि उस तरफ के लोग दूसरे देश के हैं, वरना पहले इसका अहसास भी नहीं था.”

शंभू की माँ और चाची नेपाल में रहती हैं वो बताते हैं, “मेरा ही नहीं, यहाँ के हर परिवार का संबंध नेपाल से है. आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ था कि हम अपने रिश्तेदारों से नहीं मिल पाए.”

एफ़एम चैनलों पर भारत के ख़िलाफ़ गीत का आरोप

सीमावर्ती इलाक़ों में रहने वाले लोगों का आरोप है कि नेपाली एफएम चैनलों पर भारत विरोधी गाने बज रहे हैं.

सीतामढ़ी के शंभू कुमार कहते हैं, “यह भारत से जुड़े नेपाल के लोगों के मन में भारत के प्रति नफ़रत पैदा करने की साज़िश है. हमारे रिश्तेदारों से जब फ़ोन पर बात होती है तो वो आरोप लगाते हैं कि भारत ने नेपाल की ज़मीन पर कब्ज़ा किया है, लोगों के मन में आक्रोश है और हम उन्हें समझा नहीं पा रहे. हमें इस बात का बहुत दुख है.”

हालाँकि बॉर्डर के पास ही हमें नेपाल के दो छोटे बच्चे मिले. हमें देखते ही उन्होंने कहा,” हमारी बुआ यहाँ रहती हैं. उन्होंने ही बुलाया था. झोले में केवल आलू और दाल है जो उनका ही दिया है. हमें जाने दीजिए, खेतों के रास्ते चले जाएँगे.”

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with input of BBC hindi

नीरज प्रियदर्शी
सीतामढ़ी (जानकीनगर) से, बीबीसी हिंदी के लिए

 

विवाद के कुछ मुद्दे
पानी का बंटवारा दोनों मुल्कों के बीच विवाद का विषय है.
सुस्ता और कालापानी जैसी नदियों को लेकर दोनों देशों में क्षेत्रीय विवाद है.
हालिया सीमाबंदी ने दोनों देशों के रिश्तों को बिगाड़ के रख दिया था.
नेपाल ने संविधान निर्माण प्रक्रिया में भारत की दखलअंदाज़ी पर आपत्ति जताई थी.


ड्रैगन की परछाईं
भारत नेपाल से ईंधन हासिल करने वाला अकेला देश नहीं रहा.
हालिया सीमाबंदी के कारण चीन ने नेपाल से ईंधन लेने की प्रक्रिया में कुछ कदम बढ़ाए हैं.
नेपाल अपने पूर्वोत्तर पड़ोसियों के साथ व्यापार की राहें खोल रहा है.
साल दर साल नेपाल में चीनी निवेश की तादाद बढ़ती जा रही है.
नेपाल ने हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट बनाने के ‌लिए चीनी कंपनी की मदद ली.
1.6 अरब डॉलर की कीमत से ये प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है.

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (KP Sharma Oli) ने हाल ही में भारत पर आरोप लगाते हुए कहा था कि देश में कोरोना के 85% मामले भारत से आये हैं. नेपाल शुरुआत से ही भारत की वजह से संक्रमितों की संख्या में वृद्धि की बात कहता आ रहा है.

नेपाल के पीएम ओली का आरोप- भारत रच रहा मेरी सरकार गिराने की साजिश

नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली ने भारत पर अपनी सरकार गिराने का गंभीर आरोप लगाया है. ओली ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अपने पिछले कार्यकाल में चीन के साथ ट्रेड‌ एंड ट्रांजिट समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, तो उनकी सरकार गिरा दी गई थी, लेकिन अब हमारे पास बहुमत है.

नेपाल के पीएम ने भारत पर अपनी सरकार गिराने का लगाया गंभीर आरोपकहा- मेरी सरकार गिरी, तो नेपाल के पक्ष में बोलने की हिम्मत कोई नहीं करेगा
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने रविवार को एक कार्यक्रम में भारत पर अपनी सरकार गिराने का आरोप लगाया है. ओली ने कहा कि नई दिल्ली की मीडिया में होने वाली बौद्धिक बहस, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास की सक्रियता और होटलों में हो रही गतिविधियां दिखा रही हैं कि भारत का पूरा संयंत्र लगा हुआ है.

ओली ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इससे पहले जब उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल में चीन के साथ ट्रेड‌ एंड ट्रांजिट समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, तो उनकी सरकार गिरा दी गई थी, लेकिन अब हमारे पास बहुमत है. बता दें कि उस समय भी केपी ओली का गठबंधन ‌प्रचंड के साथ था और प्रचंड ने अपना समर्थन वापस ले लिया था, इसलिए उनकी सरकार गिर गई थी.

ओली ने अपने संबोधन में कहा कि बहुत से नेपाल के नेताओं ने मुझसे कहा कि अपनी जमीन को समेटते हुए जो नक्शा छापा है वह बहुत बड़ी भूल है, ऐसा दिखाया जा रहा है जैसे मैंने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो.

नेपाल के जननेता मदन भंडारी की 69वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कहा कि भले ही उन्हें पद से हटाने का खेल शुरू हो लेकिन यह असंभव है. प्रधानमंत्री ओली ने दावा किया था कि काठमांडू के एक होटल में उन्हें हटाने के लिए बैठकें की जा रही है और इसमें एक दूतावास भी सक्रिय है. बता दें कि ओली का इशारा भारत की तरफ है.

ओली ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री पद पर बैठे रहना नहीं चाहता, लेकिन अगर मैं इस समय हटता हूं या मेरी सरकार गिरा दी जाती है, तो नेपाल के पक्ष में बोलने के लिए फिर कोई व्यक्ति हिम्मत नहीं करेगा. आज के लिए नहीं बल्कि कल के लिए, अपने लिए नहीं बल्कि देश के लिए भी इस सरकार का टिके रहना जरूरी है.

ओली ने कहा कि नेपाल अब तक सिर्फ भारत पर ही आश्रित था. हम कहने के लिए तीन ओर से भारत से घिरे हैं, लेकिन दरअसल चारों ओर से ही घिरे नजर आ रहे हैं. नेपाल भूपरिवेष्ठित देश नहीं, बल्कि भारत पर आश्रित देश था, जिसके लिए मैंने चीन के दरवाजे खोल दिए.

नेपाल की भूमि पर भारत का कब्जा है. भारत ने हमारे लोगों को राशन कार्ड दे दिया है, सुविधाएं दी है और सेना लगाकर हमें हमारी जमीन पर नहीं जाने दिया गया और यहां पर कुछ लोग पॉकेट में नेपाल की नागरिकता रखकर भारत की तरफदारी कर रहे हैं.

 

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