कश्मीर राज्य

मोदी सरकार ने 25,000 ग़ैर-कश्मीरियों को कश्मीर में बसाया : यह कश्मीर को दूसरा फ़िलिस्तीन बनाने की शुरूआत है : रिपोर्ट

 

भारत सरकार 18 मई के बाद से 25,000 लोगों को कश्मीर में बसा चुकी है और उन्हें डोमिसाइल या स्थायी निवास का प्रमाण पत्र दिया जा चुका है।

यह प्रमाण पत्र एक प्रकार का नागरिकता का अधिकार है, जिसके बाद इसे प्राप्त करने वाले व्यक्ति को कश्मीर में स्थायी रूप से रहने और सरकारी नौकरी हासिल करने का अधिकार हासिल हो जाएगा, जो पिछले साल तक केवल उसी कश्मीरियों से विशेष था।


मोदी सरकार ने पिछले साल 5 अगस्त को धारा 370 को भंग करके भारत प्रशासित कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था। इसी के साथ भारतीय संविधान के आर्टिकल 35-ए को समाप्त करके स्थानीय नागरिकता के क़ानून को भी ख़त्म कर दिया था।

मोदी सरकार का यह क़दम फ़िलिस्तीनियों के इलाक़ों को हड़पने के इस्राईल सरकार की नीतियों से काफ़ी मिलता जुलता है।

शुक्रवार को अमरीका में राष्ट्रपति पद के डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन ने कहा था कि नई दिल्ली को कश्मीर के लोगों के अधिकारों को फिर से बहाल करने के लिए ज़रूरी क़दम उठाने चाहिएं।

श्रीनगर के रहने वाले 29 वर्षीय बद्रुल इस्लाम शेख़ ने अल-जज़ीरा से बात करते हुए कहाः ग़ैर कश्मीरियों को कश्मीर में बसाने का मोदी सरकार का फ़ैसला, निश्चित रूप से कश्मीर की पहचान और संस्कृति को मिटाने की शुरूआत है। यह कश्मीर के फ़िलिस्तीन बनने की शुरूआत है।

उन्होंने आगे कहाः यह बहुत अफ़सोसनाक है, बहुत डरावना है। मुझे लगता है वह समय आने वाला है, जब हम अपने घरों में भी सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे।

कश्मीर की कुल आबादी 1 करोड़ 25 लाख है, जिसमें मुसलमानों की संख्या क़रीब 70 प्रतिशत है, जबकि हिंदुओं की संख्या क़रीब 29 प्रतिशत है।

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