इतिहास

17 जून का इतिहास : 1631 17 जून को मुमताज़ महल का इन्तिक़ाल हुआ, 17 जून को 1858 में रानी लक्ष्मीबाई का निधन हुआ!

ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 17 जून वर्ष का 168 वाँ (लीप वर्ष में यह 169 वाँ) दिन है। साल में अभी और 197 दिन शेष हैं।

17 जून की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
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1994 – उत्तरी कोरिया अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को अपने देश में बने रहने देने को सहमत।
1999 – लेकेव जुमा द. अफ़्रीका के उपराष्ट्रपति नियुक्त, कारगिल में चल रहे युद्ध के मद्देनजर आई.एस.आई. द्वारा कारगिल जेहाद फ़ंड की स्थापना।
2001 – नेपाल शाही परिवार हत्या प्रकरण में डॉक्टर ने कहा कि दीपेन्द्र के ख़ून में शराब का अंश नहीं था।
2002 – कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पुन: खोला गया।
2003 – फ़्रांस में 165 ईरानी आतंकवादी गिरफ़्तार।
2004 – मंगल पर पृथ्वी की चट्टानों से मिलते-जुलते पत्थर मिले। बगदाद में सेना की भर्ती केन्द्र पर विस्फोट में 42 मरे तथा 127 घायल।
2008 -देश में विकसित हल्के लड़ाकू विमान ‘तेज़स’ का बंगलौर में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।
रूस ने 2012 तक अपने विनाशकारी रासायनिक हथियारों का जखीरा नष्ट करने की दिशा में क़दम बढ़ाया। कनाडा सरकार ने तमिल वर्ल्ड मूवमेंट संगठन को आतंकवादी समूहों की सूची में डाला।
2012- साइना नेहवाल तीसरी बार इंडोनेशिया ओपन चैंपियन बनीं।

17 जून को जन्मे व्यक्ति
1973 – लिएंडर पेस – भारत के सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी
1981 – अमृता राव – हिन्दी चलचित्र अभिनेत्री।
1945 – पी. डी. टी. आचार्य – भारत के भूतपूर्व लोक सभा महासचिव रहे हैं।
1942 – भगत सिंह कोश्यारी – उत्तराखंड के राजनीतिज्ञ तथा वहाँ के दूसरे मुख्यमंत्री रहे हैं।
1903 – ज्योति प्रसाद अग्रवाल – असम के प्रसिद्ध साहित्यकार, स्वतंत्रता सेनानी तथा फ़िल्म निर्माता।
1887 – कैलाश नाथ काटजू – प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ तथा मध्य प्रदेश राज्य के भूतपूर्व मुख्यमंत्री।

17 जून को हुए निधन
1631 – मुमताज़ महल – आसफ़ ख़ाँ की पुत्री, जिसका निकाह मुग़ल सम्राट ‘ख़ुर्रम’ (शाहजहाँ) से हुआ।
1674 – जीजाबाई – शाहजी भोंसले की पत्नी तथा छत्रपति शिवाजी की माता
1928 – गोपबंधु दास – प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, कवि, साहित्यकार तथा उड़ीसा के प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता।
1895 – गोपाल गणेश आगरकर – प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता।
1862 – लॉर्ड कैनिंग – भारत के पहले वाइसराय और कुशल राजनीतिज्ञ
1858 – रानी लक्ष्मीबाई – 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगना रानी।

17 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
सूखा व मरूस्थलीकरण नियंत्रण दिवस
पिता दिवस

17 जून सन 1576 ईसवी को हॉलैंड में स्पेन के विरुद्ध जनविरोध का नेतृत्व करने वाले विलियम दि साइलेन्ट ने देश की स्वतंत्रता की घोषणा की।

1994, उत्तरी कोरिया अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को अपने देश में बने रहने देने पर सहमत।

1999, लेकेव ज़ूमा द. अफ़्रीका के उपराष्ट्रपति नियुक्त।

2001, नेपाल शाही परिवार हत्या प्रकरण में डॉक्टर ने कहा कि दीपेन्द्र के ख़ून में शराब का अंश नहीं था।

2002, कराची में अमरीकी वाणिज्य दूतावास पुन: खोला गया।

2004, मंगल पर पृथ्वी की चट्टानों से मिलते-जुलते पत्थर मिले।

2004, बग़दाद में सेना के भर्ती केन्द्र पर विस्फोट में 42 मरे तथा 127 घायल।

2008, भारत में विकसित हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’ का बंगलौर में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।

2008, रूस ने 2012 तक अपने विनाशकारी रासायनिक हथियारों का जखीरा नष्ट करने की दिशा में क़दम बढ़ाया।

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यह विद्रोह सन 1568 में तेज़ हुआ था और हालैंड के सात राज्यों के एक साथ मिल जाने के बाद स्वतंत्र देश की स्थापना के लिए भूमि समतल हो गयी। हॉलैंड की स्वतंत्रता की घोषणा के बाद भी स्पेन के सैनिको ने हॉलैंड की जनता का दमन जारी रखा। यहॉ तक कि सन 1609 ईसवी को हॉलैंड के नेताओं और स्पेन के नरेश के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुए। जो वास्तव में हॉलैंड की स्वतंत्रता को औपचारिकता प्रदान करने के अर्थ में था। स्वतंत्र होने के बाद हॉलैंड ने दूसरे देशों के अतिग्रहण का अभियान आरंभ कर दिया। इस प्रकार ये 17वीं ईसवी शताब्दी में यूरोप के बड़े साम्राज्यवादी देशों में गिना जाने लगा। किंतु इस का वर्चस्व इसी शताब्दी के अंत तक समाप्त हो गया। हॉलैंड, यूरोपीय महाद्वीप के पश्चिमोत्तरी भाग में स्थित है इसका क्षेत्रफल लगभग 42 हज़ार वर्ग किलोमीटर है। जर्मनी और बेल्जियम इसके पड़ोसी देश हैं।

17 जून सन 1925 ईसवी को जेनेवा में रासयनिक और जौविक हथियारों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाने के समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के आधार पर हर प्रकार के जैविक हथियार, अर्थात घातक गैस और रासायनिक तथा विष आदि का युद्ध में प्रयोग वर्जित घोषित कर दिया गया। इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले देशों की संख्या 29 थी। बाद में यह संख्या बढ़ी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मनी द्वार व्यापक स्तर पर रासायनिक और जैविक हथियारों के प्रयोग के कारण यह समझौता हुआ किंतु दुखद बात यह है कि अब भी बहुत से देश इस समझौते का उल्लंघन कर रहे हैं। जैसा कि अमरीका ने वियतनाम युद्ध के दौरान और इराक़ ने ईरान पर थोपे गये युद्ध के दौरान इस समझौते का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन किया।

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17 जून सन 1944 ईसवी को आइसलैंड द्वीप के निवासियों ने डेनमार्क से अपनी भूमि को स्वतंत्र कराने में सफलता प्राप्त की और हर वर्ष आज का दिन इस देश में राष्ट्रीय दिवस के रुप में मनाया जाता है। 10वीं ईसवी शताब्दी तक आइसलैंड स्वतंत्र देश था किंतु उसके बाद नार्वे और फिर डेनमार्क के अधिकार में चला गया। सन 1874 ईसवी में डेनमार्क ने आइसलैंड की जनता को अलग संसद बनाने की अनुमति दी। बाद के वर्षो में आइसलैंड ने कुछ और अधिकार प्राप्त किए और सन 1918 में आइसलैन्ड एक स्वतंत्र देश के रूप में डेनमार्क का घटक बन गया किंतु सन 1944 में जनमत संग्रह के बाद आइसलैंड पूर्ण रुप से स्वतंत्र देश बन गया। यह देश सन 1949 में नैटो का सदस्य बना। यह देश पश्चिमोत्तरी यूरोप में एटलांटिक महासागर के तट पर स्थित है।

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28 खुर्दाद 1358 हिजरी शम्सी को ईरान के वरिष्ठ संघर्षकर्ता और धर्मशास्त्री आयतुल्लाह सैयद अहमद खुस्रोशाही का निधन हो गया। इस महान व संघर्षकर्ता धर्मगुरू ने आरंभिक इस्लामी शिक्षा अपने पैतृक नगर तबरीज़ में ही प्राप्त की। पर्दा समाप्त करने और शाह के दूसरे धर्मविरोधी आदेशों का विरोध करने के कारण 1314 हिजरी शम्सी में अपने पिता और कुछ दूसरे धर्मगुरूओं के साथ उन्हें तबरीज़ से निकाल कर सिमनान और उसके बाद पवित्र नगर मशहद भेज दिया गया। उसके बाद सैयद अहमद ने पवित्र नगर मशहद के शिक्षा केन्द्रों में तत्कालीन वरिष्ठ धर्मगुरूओं से बहुत अधिक लाभ उठाया। उसके बाद वह पवित्र नगर क़ुम गये और वहां के धर्मगुरूओं से लाभ उठाया और फिक्ह व कलाम जैसे विभिन्न विषयों की वर्षों शिक्षा दी। उसके बाद सैयद अहमद अपने पिता के बुलाने पर तबरीज़ चले गये और वहीं अपनी आयु के अंतिम वर्षों तक अपने दायित्वों का निर्वाह करते रहे। महान धर्मशास्त्री व संघर्षकर्ता आयतुल्लाह सैयद अहमद 1342 हिजरी शम्सी में स्वर्गीय इमाम खुमैनी के आंदोलन के आरंभ में उन संघर्षकर्ता धर्मगुरुओं में से थे जो तबरीज़ में उनके आंदोलन से जुड़ गये और इस मार्ग में शाह के कारिन्दों ने तबरीज़ में कई बार गिरफ्तार करके उन्हें जेल में डाला और एक शहर से दूसरे शहर भेजा।

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