इतिहास

26 जून का इतिहास : 4 जीक़ादा 656 हिजरी क़मरी को मिस्र के प्रसिद्ध विद्वान महलबी का 57 वर्ष की आयु में निधन हुआ

ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 26 जून वर्ष का 177 वाँ (लीप वर्ष में यह 178 वाँ) दिन है। साल में अभी और 188 दिन शेष हैं।
26 जून की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
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1945 – सेन फ़्राँसिस्कों में संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर।
1992 – भारत ने ‘तीन बीघा गलियारा’ 999 वर्षों के लिए बांग्लादेश को पट्टे पर दिया।
1999 – अमेरिकी ऊर्जा विभाग के हथियार कार्यक्रम के प्रमुख विक्टर रीस का इस्तीफ़ा, बुडापेस्ट (हंगरी) में विश्व विज्ञान सम्मेलन की शुरुआत, आई.ओ.सी. से अध्यक्ष जे.ए. समारांच को ‘बेस्ट स्पोर्ट्स लीडर आफ़ द सेंचुरी अवार्ड’ प्रदत्त।
2000 – अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल द्वारा बांग्लादेश को टेस्ट का दर्जा दिया गया।
2004 – पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जमाली का इस्तीफ़ा, शुजात हुसैन नये कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने।
2008 – बहुर्राष्ट्रीय कम्पनी रियोरिटो ने मध्य प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में छतरपुर ज़िले के तहत हीरा खनन के लिए खनिज पट्टा माइनिंग लीज हासिल कर बंदर डायमंड प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणा की। बिजली परियोजनाओं के लिए कास्टिंग फोर्जिंग एवं बेलेंस आफ प्लाट उपकरणों को बनाने के लिए एनटीपीसी व भारत फोर्ज ने बीएफ-एनटीपीसी एनर्जी सिस्टम लिमिटेड नामक संयुक्त उद्यम बनाया।
26 जून को जन्मे व्यक्ति
1969 – धर्मेन्द्र प्रधान – भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ हैं।
1967 – तरुण सागर – जैन धर्म के भारतीय दिगम्बर पंथ के प्रसिद्ध मुनि थे।
1942 – योगेन्द्र नारायण – केंद्र सरकार में रक्षा सचिव और राज्य सभा में महासचिव पद पर रहे थे।
1838 – बंकिमचंद्र चटर्जी – बंगाली उपन्यासकार।
1931 – एस. मल्लिकार्जुनैय्या – भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ थे।
1873 – गौहर जान – भारतीय गायिका और नर्तकी थीं।
1888 – बाल गन्धर्व – मराठी रंगमंच के महान् नायक और प्रसिद्ध गायक।
1918 – सेकेंड लेफ्टिनेंट रामा राघोबा राणे – परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक।

26 जून को हुए निधन
2004 – यश जौहर – भारतीय फ़िल्म निर्माता।
1961 – गोविंद शास्त्री दुगवेकर – प्रसिद्ध साहित्यकार।
26 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
नशीली दवाओं के दुरुपयोग एवं उनकी तस्करी के विरुद्ध विश्व दिवस

26 जून सन 1254 ईसवी को इटली के विख्यात नाविक और पर्यटक मार्को पोलो का वीनस में जन्म हुआ।
1922, राजकुमार लुई चार्ल्स अंटोइन ग्रीमल्डी, लुई द्वितीय के नाम से मोनाको का राजा बना।
1945, सेन फ़्रांसिस्कों में संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए गए।
1992, भारत ने बांग्लादेश को ‘तीन बीघा गलियारा’ 999 वर्षों के लिए पट्टे पर दिया।
1999, बुडापेस्ट (हंगरी) में विश्व विज्ञान सम्मेलन की शुरुआत हुई।
1999, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष जे.ए. समारांच को ‘सदी का सर्वश्रेष्ठ खेल नायक अवार्ड’ प्रदान किया गया।
2000, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल द्वारा बांग्लादेश को टेस्ट क्रिकेट देश का दर्जा दिया गया।
2004, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जमाली का इस्तीफ़ा, शुजात हुसैन नये कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने।

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2008, बहुर्राष्ट्रीय कम्पनी रियोरिटो ने मध्य प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र में छतरपुर ज़िले के तहत हीरा खनन के लिए खनिज पट्टा माइनिंग लीज हासिल कर बंदर डायमंड प्रोजेक्ट शुरू करने की घोषणा की।
मार्को पोलो के पिता और चाचा इटली के विख्यात थे। जिन्होंने उत्तरी चीन मंगोलिया पूर्वी तुर्किस्तान और ईरान की यात्राएं की थी मारको पोलो जवानी में अपने पिता के साथ चीन गये और कुछ समय तक इस क्षेत्र में और एशिया के पूर्वी द्वीपों में भ्रमण करते रहे और स्वदेश लौटने के बाद उन्होंने अपना यात्रा कृतांत लिखा जिसे बहुत ख्याति प्राप्त हुई।
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26 जून सन 1927 ईसवी से बोलनी फ़िल्मों ने अपना जीवन आरंभ किया। फ़िल्म निर्माण का काम आरंभ होने से ही निरंतर इस बात का प्रयास किया गया कि ऐसी फ़िल्में बनाई जाएं जिनमें संवाद भी हो। सन 1926 में फ़िल्म में विभिन्न संगीतों और आवाज़ों के साथ ही अभिनेताओं के बीच संवाद की आवाज़ भी सुनवाने में सफलता प्राप्त कर ली गयी।

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26 जून सन 1945 ईसवी को सैन फ़्रैन्सिसको नगर में इसी नाम की कॉन्फ़्रेन्स संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना के प्रस्ताव को पारित करके समाप्त हुई।
इस सम्मेलन में जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का पहला सम्मेलन था युद्ध के 50 घटक देशों ने भाग लिया। इस सम्मेलन का उद्देश्य संयुक्त राष्टृ संघ का गठन राष्ट्रों को एक दूसरे से निकट करना देशों के बीच युद्ध भड़कने से रोकना आदि था। संयुक्त राष्ट्रसंघ का घोषणा पत्र तैयार करने वालों का इरादा था कि ऐसी घटनाओं और दुर्घटनाओं को रोका जाए जो युद्ध छिड़ने का कारण बनती हैं किंतु खेद की बात है कि यह संगठन अब तक अपने इन लक्ष्यों की प्राप्ति में बहुत ज्याद सफल नहीं रहा है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के घोषणा पत्र की एक कमी कुछ बड़े देशों की रक्ष के संबंध में दी गयी गैरंटी और उन्हें प्राप्त विशेषाअधिकार हैं जिनमें वीटों का नाम लिया जा सकता है। जिसने इस संगठन को बड़ा निर्णय लेने के संबंध में अपंग कर दिया है क्योंकि सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य वीटों अधिकार का प्रयोग करके जब चाहें सुरक्षा परिषद के निर्णय को प्रभावहीन कर सकते हैं।
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26 जून सन 1960 ईसवी को फ़्रांस के उपनिवेश मेडागास्कर को स्वतंत्रता प्राप्त हुई। हर वर्ष आज का दिन इस देश में राष्ट्रीय दिवस के रुप में मनाया जाता है।
18वीं ईसवी शताब्दी के मध्य से मेडागास्कर पर अधिकार के लिए फ़्रांस और ब्रिटेन के बीच प्रतिस्पर्धा आरंभ हुई। इसी लिए यह देश उक्त दोनों देशों के हाथों का खिलौना बना रहा। यहॉ तक कि 19वीं शतब्दी के अंत में यह देश स्थायी रुप से फ़्रांस का उपनिवेश बन गया किंतु स्थानीय जनता ने फ़्रांसीसी साम्राज्य के विरुद्ध संघर्ष आरंभ किया सन 1947 में मेडागास्कर के लगभग 80 हज़ार लोग इसी प्रकार के संघर्ष में मारे गये। अंतत: सन 1960 में यह संघर्ष रंग लाया और मेडागास्कर स्वतंत्र हुआ। यह देश अफ़्रीक़ा महाद्वीप का पूर्वी देश है यह हिंद महासाबर के तट पर स्थित है। यहॉ प्रजातांत्रिक व्यवस्था लागू है।
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6 तीर सन 1360 हिजरी शम्सी को ईरान की इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाह उज़मा सैयद अली ख़ामेनई पर आतंकवादी गुट एम के ओ के तत्वों ने आक्रमण किया। वे उस समय तेहरान के इमाम जुमा और उच्च सुरक्षा परिषद में इमाम ख़ुमैनी के प्रतिनिधि थे।

आतंकवादियों ने एक मस्जिद में जहॉं आयतुल्लाह उज़्मा ख़ामेनई भाषण दे रहे थे विस्फ़ोट करके उन्हें घायल कर दिया। इस दुर्घटना में वरिष्ठ नेता का दाहिना हाथ बुरी तरह धायन हुआ।

इमाम ख़ुमैनी ने इस संदर्भ में कहा था इस समय आप जो कि पैग़म्बरे इस्लाम के वंशज और इमाम हुसैन के परिवार से हैं और इस्लाम की सेवा के अतिरिक्त आपने कोई पाप नहीं किया है, युद्ध के मार्चों पर निडर होकर लड़े हैं, मेहराब के कुशल और रचनात्मक शिक्षक और मिंबर के सक्षम वक्ता और क्रान्ति के मंच पर सहानुभूति रखने वाले कार्यकर्ता हैं, आक्रमण का निशाना बने हैं, आक्रमणकारियों ने अपने इस काम से अपनी राजनैतिक सोंच और जनता के समर्थन तथा अत्याचारियों के विरोध के स्तर को स्पष्ट कर दिया है।
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4 जीक़ादा सन 656 हिजरी क़मरी को मिस्र के प्रसिद्ध विद्वान महलबी का 57 वर्ष की आयु में निधन हुआ। प्रसिद्ध इस्लामी इतिहासकार इब्ने ख़लकान ने उनके बारे में लिखा है कि मैं-ने महलबी से भेंट की और यह आभास किया कि महलबी उससे कहीं आगे हैं जैसा मैं ने उनके बारे में सुना था। महलबी का पद्य संकलन कई बार मिस्र में प्रकाशित हो चुका है।

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