इतिहास

27 जून का इतिहास : 27 जून 1839 को भारतीय इतिहास के महान योद्धा महाराजा रणजीत सिंह का निधन हुआ!

ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 27 जून वर्ष का 178 वाँ (लीप वर्ष में यह 179 वाँ) दिन है। साल में अभी और 187 दिन शेष हैं।

27 जून की महत्त्वपूर्ण घटनाएँ
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2002 – जी-8 देश परमाणु हथियार नष्ट करने की रूसी योजना पर सहमत।
2003 – संयुक्त राज्य अमेरिका में समलैंगिकता पर प्रतिबंध रद्द।
2004 – अमेरिका और यूरोपीय संघ ने जी.पी.एस. गैलेलियो के विकास में सहयोग से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किये।
2005 – ब्रिटेन ने भारत की वीटो रहित स्थायी सदस्यता का समर्थन किया।
2006 – गुयेन मिन्ह ट्रयेट वियतनाम के राष्ट्रपति चुने गये।
2007 – जेम्स गार्डन ब्राउन ने ब्रिटिश प्रधानमंत्री का पद संभाला। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने महारानी एलिजाबेथ को अपना त्याग पत्र सौंपा।
2008 -भारत व पाकिस्तान ने ईरान से आने वाली गैस पाइप लाइन परियोजना को चालू करने के लिए आ रही रुकावटों को हल किया।
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सहअध्यक्ष आसिफ़ अली जरदारी छ: दिवसीय विदेश यात्रा के पहले चरण में तुर्की रवाना हुए।
2015- भारत के फ़िल्म इतिहास में अपना एक ख़ास मुकाम रखने वाले सत्यजीत रे अथवा सत्यजित राय की तस्वीर को संयुक्त राष्ट्र ने अपने मुख्यालय में प्रदर्शित करने का फैसला किया।

27 जून को जन्मे व्यक्ति
1964 – पी. टी. उषा – भारतीय खिलाड़ी
1955 – पूर्णिमा वर्मन – भारतीय पत्रकार
1939 – राहुल देव बर्मन – हिन्दी फ़िल्मों के संगीतकार।
1922 – अकिलन – तमिल भाषा के साहित्यकार

27 जून को हुए निधन
1839 – रणजीत सिंह – ‘भारतीय इतिहास’ में प्रसिद्ध सिक्खों के महाराजा।
2008 – सैम मानेकशॉ – भारतीय सेना के भूतपूर्व अध्यक्ष, जिनके नेतृत्व में भारत ने सन 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में विजय प्राप्त की थी।

27जून सन 1880 ईसवी को अमरीका की नेत्रहीन, अध्ययनकर्ता हेलेन एडम्ज़ कलर का जन्म हुआ।

बचपन में एक बीमारी में उन्हें ऑख और कान से हाथ धोना पड़ा। उन्होंने सात वर्ष की आयु से शिक्षा प्राप्त करनी आरंभ की । उन्होंने नेत्रहीनों की शिक्षा के विशेष प्रंबंध के अंतर्गत शिक्षा प्राप्त की। धीरे धीरे उनकी श्रवण शक्ति दोबारा कार्यरत हो गयी और अपने शिक्षक की सहायता से उन्होंने बोलना आरंभ किया। हेलेन केलर ने बहुत सी पुस्तकें और लेख लिखे। उन्होंने विभिन्न अवसरों पर महत्वपूर्ण भाषण भी दिए।
केलेर ने अपनी कमाई से अमरीका और दूसरे देशों में नेत्रहीनों की शिक्षा के लिए कई स्कूल खोले। मेरे जीवन की कहानी उनकी सबसे प्रसिद्ध पुस्तक के नाम का अनुवाद है।

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27 जून सन 1977 ईसवी को जिबूती देश को फ़्रांस के अधिकार से स्वतंत्रता मिली। हर वर्ष आज के दिन इस देश में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में उत्सव मनाया जाता है। यह क्षेत्र सन 1893 में फ़्रांस का उपनिवेश बना लिया गया। 8 दशकों तक स्थानीय जनता ने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किए और अंतत: स्वतंत्रता प्राप्त की। अरब संघ से जुड़ने वाला यह अंतिम देश है। यह देश पूर्वी अफ़्रीका में लाल सागर और हिंद महासागर के संगम पर स्थित है। इस लिए स्ट्रेटेजिक दृष्टि से इसे विशेष महत्व प्राप्त है।
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27 जून सन 1993 ईसवी को अमरीका ने 33 प्रक्षेपास्त्रों द्वारा इराक़ की राजधानी बग़दाद और उसके आस पास के क्षेत्रों को निशाना बनाया। अमरीका ने यह आक्रमण यह बहाना पेश करके किया कि इराक़ की सरकार तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश की कुवैत यात्रा के दौरान उनकी हत्या की साज़िश में शामिल थी। बुश ने अपने राष्ट्रपति काल में इराक़ की सेना को कुवैत से बाहर निकालने के लिए इराक़ पर आक्रमण का आदेश दिया था। अमरीका के प्रक्षेतपास्त्रिक आक्रमण में 6 असैनिक मारे गये और इराक़ के एक सुरक्षा केंद्र को हानि पहुँची।

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27 जून सन 1997 ईसवी को ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमाम अली रहमानोफ़ और इस देश के विद्रोही गुट के नेता सैयद अब्दुल्लाह नूरी ने मॉस्को में एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर करके इस देश के पांच वर्षीय गृह को समाप्त किया। सन 1991 में ताजिकिस्तान की स्वतंत्रता के एक वर्ष बाद देश की प्रशासन शैली को लेकर रूस के समर्थक ताजिक अधिकारियों और इस्लामी गुटों के बीच मतभेद आरंभ हुआ। जिससे बहुत हानि हुई। क्षेत्रीय देशों और संयुक्त राष्ट्रसंघ ने ताजिकिस्तान मे शांति स्थापना के लिए व्यापक प्रयास किए। जिसके परिणाम स्वरूप पहले रुस और ईरान के माध्यम से एक समझौता तेहरान में हुआ जिसे 1997 में मॉस्को में अंतिम रूप दे दिया गया।

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7 तीर सन 1360 हिजरी शम्सी को ईरान के विख्यात विचारक संघर्षकर्ता व क्रान्तिकारी नेता आयतुल्लाह डॉक्टर मुहम्मद हुसैन बहिश्ती 72 महान इस्लामी क्रान्तिकारियों के साथ शहीद हुए। जुमहूरी इस्लामी पार्टी के कार्यालय में आतंकवादियों द्वारा बम धमाके में यह लोग शहीद हुए थे।

डॉक्टर बहिश्ती इस्लामी क्रान्ति के अग्रिम पंक्ति के नेताओं में से थे। उन्होंने इस्लामी क्रान्ति के दौरान और इस्लामी शासन व्यवस्था की स्थापना में मूल्यवान योगदान दिया। वे इसी प्रकार संविधान के संकलन क्रान्तिकारी सैनिकों के समर्थन इस्लामी न्यायपालिका की स्थापना और अमरीकी षड़्यंत्रों के मुक़ाबले में आगे रहे। उनका यह वाक्य आज भी लोगों में उत्साह भर देता है कि हे अमरीका तू हमसे क्रोधित रह और इसी क्रोध से मर जा।

जुमहूरी इस्लामी पार्टी के कार्यालय में बम धमाके से आयतुल्लाह डॉक्टर बहिश्ती सहित कई सांसद और मंत्री शहीद हुए थे। किंतु इस्लामी क्रान्ति के शत्रु अपने नक्ष्य में सफल नहीं हो सके और क्रान्ति का दीप आज भी प्रकाशमान है।

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5 ज़ीक़ादा सन 664 हिजरी क़मरी को सैयद इब्ने ताउस नामक मुसलमान इतिहासकार, साहित्यकार और प्रसिद्ध धर्मगुरु का इराक़ के हिल्ला नगर में जन्म हुआ। उन्होंने अपना बचपन और जवानी का समय हिल्ला में बिताया।

उनकी ईमानदारी और धर्म के प्रति निष्ठा बहुचर्चित थी। उन्होंने तत्कालीन अब्बासी शासकों की ओर से सरकारी पद संभालने के प्रस्ताव को कभी स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने इस्लामी ज्ञान के प्रसार व प्रचार के संबंध में बहुत ही सराहनीय कार्य किये हैं उनकी कई महत्वपूर्ण पुस्तकों का कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।

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5 ज़ीक़ादा सन 761 हिजरी क़मरी को मिस्र के प्रसिद्ध विद्वान इब्ने हेशाम का 53 वर्ष की आयु में निधन हुआ। वे इस्लामी विषयों के अतिरिक्त, साहित्य का भी व्यापक ज्ञान रखने थे इसी प्रकार वे एक उच्च कोटि के शायर थे।

उन्होंने अरबी भाषा के व्याकरण पर आधारित मुग़निउल लबीब नामक पुस्तक लिखी है जिसे अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है।

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