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अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय डालेगा इस्राईल के अधिकारियों के गले में फांसी का फंदा?

इस्राईलियों को अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय के एक फ़ैसले का इंतेज़ार है और अगर यह अदालत, न्याय लागू करने में गंभीर हुई तो कुछ ज़ायोनी अधिकारियों के गले में फांसी का फंदा पड़ जाएगा।

अगले कुछ घंटों में ज़ायोनी शासन, हेग के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय के जजों के फ़ैसले के इंतेज़ार में रहेगा जो वे फ़िलिस्तीनियों की याचिका पर सुनवाएंगे। अगर इस अदालत ने फ़िलिस्तीनियों के पक्ष में फ़ैसला दे दिया तो इसका मतलब यह होगा कि दो मामलों में फ़िलिस्तीनियों के अपराधों की जांच की जाएगी। पहला मामला ज़ायोनी सैनिकों के युद्ध अपराधों से संबंधित है जो उन्होंने अपने राजनैतिक आक़ाओं के आदेश पर किए हैं। दूसरा मामला सन 1967 में क़ब्ज़ा किए गए क्षेत्रों में ज़ायोनी काॅलोनियों के निर्माण और उनके विस्तार का है जो अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों के ख़िलाफ़ है। ग़ज़्ज़ा के ख़िलाफ़ युद्ध, ज़ायोनी काॅलोनियों का निर्माण और फ़िलिस्तीनी बंदियों की स्थिति वह तीन अहम मामले हैं जो अवैध ज़ायोनी शासन के सैन्य अधिकारियों व राजनितिज्ञों को बुरी तरह फंसा सकते हैं।

अगर यह जांच न्यायपू्र्ण और पारदर्शी ढंग से होती है तो इस्राईल में प्रधानमंत्री से लेकर सेना प्रमुख तक विभिन्न स्तर के राजनैतिक व सामरिक अधिकारी न्यायिक चंगुल में फंस जाएंगे और अगर उन्होंने अदालत में उपस्थित होने से इन्कार किया तो यह अदालत अमरीका को छोड़ कर संसार के बहुत से देशों में उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी का वारंट जारी कर सकती है जिससे डर कर इस्राईली अधिकारी किसी भी देश की यात्रा नहीं कर पाएंगे। यह अंतर्राष्ट्रीय मैदान में न्यायिक मंच पर फ़िलिस्तीनियों की सच्ची जीत होगी।

अलबत्ता सबसे अहम बात यह है कि अगर न्यायालय में इस केस के दौरान राजनैतिक व आर्थिक दांव पेच, जो दबाव डालने के लिए अमरीका व इस्राईल का सबसे बड़ा हथियार है, काम नहीं आता है तो फिर मामले फ़िलिस्तीनियों के पक्ष में जाएंगे। इस केस की समाप्ति में अब बहुत कम समय बचा है और कुछ ही घंटों के बाद आईसीसी पश्चिमी तट, पूर्वी बैतुल मुक़द्दस और ग़ज़्ज़ा पट्टी में इस्राईल के अपराधों पर फ़ैसला सुना देगा। आईसीसी के प्राॅसिक्यूटर फ़ातो बेनसूदा का कहना है कि अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय की ओर से इस्राईल के ख़िलाफ़ फ़ैसले की बहुत अधिक संभावना है। वे पहले ही कह चुके हैं कि जो साक्ष्य व प्रमाण एकत्रित किए गए हैं उनकी आरंभिक समीक्षा से पता चलता है कि इस्राईल के युद्ध अपराधों की जांच शुुरू करने के लिए पर्याप्त तर्क मौजूद हैं।

अनेक स्रोतों का कहना है कि अधिकतर संभावना इस बात की है कि आईसीसी का फ़ैसला फ़िलिस्तीनियों के पक्ष में आएगा, यहां तक कि ज़ायोनी अधिकारियों का भी माना है कि अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय बेनसूदा की राय का समर्थन करेगा और इस्राईल के युद्ध अपराधों के ख़िलाफ़ जांच शुरू करने का आदेश देगा।

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