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अगर चीन और अमरीका टकरा गए तो क्या होगा : अमरीकी मैगज़ीन का आंकलन

अमरीकी मैगज़ीन नेशनल इंटरेस्ट का कहना है कि यदि अमरीकी समुद्री बेड़े और चीनी युद्धपोतों में टकराव हो गया तो इस बात की संभावना ज़्यादा है कि अमरीका को शिकस्त का सामना होगा।

इसका कारण यह है कि टकराव की स्थिति में हर प्रकार के नुक़सान की तत्काल भरपाई के लिए चीन के पास संभावनाएं मौजूद हैं जबकि अमरीका को अपने नुक़सान की भरपाई करके समुद्री मोर्चे को मज़बूत करने में समय लग जाएगा।

चीन के पास पश्चिमी प्रशांत महासागर के इलाक़े में कई औद्योगिक केन्द्र मौजूद हैं जो अमरीका के साथ युद्ध के समय पहुंचने वाले नुक़सान की भरपाई में उसकी मदद कर सकते हैं। अमरीकी जनरल डेविड बरगर के हवाले से मैगज़ीन ने लिखा कि युद्ध की स्थिति में अमरीका के लिए अपने नुक़सान की भरपाई कर पाना बहुत कठिन होगा क्योंकि हमारा औद्योगिक आधार धीरे धीरे सिकुड़ता गया है जबकि चीन युद्धपोत के निर्माण में लगातार अपने उद्योग का विस्तार कर रहा है।

यदि यह लड़ाई हुई और लंबी खिंची तो शिकस्त अमरीका को होगी क्योंकि वह ध्वस्त हो जाने वाले युद्धपोतों की जगह नए युद्धपोत तैनात नहीं कर पाएगा।

अमरीकी जनरल का कहना है कि अगर हम दूसरे विश्व युद्ध की अपनी स्थिति को देखें तो हमें पता चलेगा कि उस समय हमारी हालत बहुत अच्छी थी। जब जापान के सामने प्रशांत महासागर में युद्ध शुरू हुआ तो अमरीकी उद्योग अपने चरम बिंदु पर था और अमरीका की अर्थ व्यवस्था जापान की अर्थ व्यवस्था की दस गुना थी। अमरीका के लिए अब उचित होगा कि बड़े बड़े युद्धपोत के बजाए छोटी युद्धक नौकाओं का प्रयोग करे ताकि उनमें किसी के ध्वस्त हो जाने का पूरे मोर्चे की मज़बूती पर बहुत ज़्यादा असर न पड़े। इस समय जो हालत है अगर उसमें हमारे किसी बड़े विमानवाहक पोत को नुक़सान पहुंच गया तो उसकी जगह भर पाना असंभव होगा।

दुनिया की सेनाओं की सूचि में अमरीका की सेना को शक्ति की दृष्टि से पहले नंबर पर रखा जाता है और चीन दूसरे नंबर पर है लेकिन चीन के पास अनगिनत छोटे युद्धपोत हैं जिनके कारण चीन की स्थिति काफ़ी मज़बूत हो गई है।

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