साहित्य

अपनी-अपनी बारिश : कहानी-2

Pratima Jaiswal
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अपनी-अपनी बारिश (कहानी-2, आखिरी भाग)
इच्छा टेली मार्केटिंग की जॉब करती थी। वहीं, उसकी मुलाकात वैभव से हुई थी। वैभव पहली नजर में इच्छा पर फिदा हो गया था। इंटरव्यू के वक्त इच्छा समझ नहीं पाई थी कि वैभव ऑफिस का बॉस भी है। यह ऐसा पहला ऑफिस था, जहां इच्छा फिट हो गई थी। शायद इसकी वजह वैभव था क्योंकि वो हमेशा इच्छा को कम्फर्टजोन में रखता था। आते-जाते फ्लर्ट कर दिया करता था, जिससे इच्छा के मन में हलचल होने लगती थी। धीरे-धीरे इच्छा और वैभव के बीच की नजदीकियां बढ़ने लगी और दोनों काफी वक्त साथ बिताने लगे। उधर तपन इच्छा में इस बदलाव का अंदाजा नहीं लगा पा रहा था। एक रात इच्छा को घर छोड़ने वैभव आया। तपन इच्छा के इंतजार में बाहर ही घूम रहा था। इच्छा को वैभव के साथ कुछ अलग अंदाज में देखकर उसे सबकुछ समझ आने लगा लेकिन फिर भी उसने खुद को संभाले रखा। इच्छा के कमरे में जाने के दस मिनट बाद तपन हाथ में थाली लिए इच्छा के पास गया।
‘इच्छा! सब ठीक है न? मुझे लगा कि बहुत थक गई होगी इसलिए अपने साथ तुम्हारा भी खाना बना लिया था।’
तपन ने इच्छा की तरफ थाली बढ़ाई।
‘आज लौकी का हलवा भी बनाया है। तुमने कहा था न कि खाने के बाद मीठा खाने का मन करता है’
तपन ने इच्छा का दिल जीतने की कोशिश की।
‘इट्स गुड तपन! लेकिन मैं डिनर करके आई हूं’
इच्छा ने बनावटी मुस्कान के साथ कहा।
‘आज मैनेजर से बात हुई थी। शायद मेरी सैलेरी पांच हजार तक बढ़ जाए फिर हम आगे की प्लानिंग करेंगे। मैं लोन लेकर घर भी खरीद लूंगा। फिर तुम बारिश…
‘प्लीज! तपन मेरा सिरदर्द कर रहा है, मैं कल बात करती हूं।’
इच्छा ने तपन की बात बीच में काटते हुए अपना दुखड़ा सुनाया।
‘इच्छा मुझसे कोई गलती हो गई है क्या?’
तपन धीमी आवाज में बोलते हुए इच्छा के माथे को चूमने के इरादे से आगे बढ़ा।
‘तुमसे कह दिया न कि चले जाओ…. मुझे अकेला छोड़ दो। मैं कोई नाली का कीड़ा नहीं…मुझे यहां नहीं रहना।
‘मैडम! खाना बन गया है, आप कहें तो कमरे में भिजवा दूं?’
कुक की आवाज सुनकर इच्छा यादों के भंवर से बाहर निकल आई।
‘नहीं! मुझे लौकी का…नहीं मतलब आप जाओ प्लीज! अभी भूख नहीं है।
इच्छा ने घड़ी की तरफ नजर दौड़ाई।
‘मैडम जी! आपको कुछ चाहिए या मैं घर जा सकती हूं।’
मेड ने दरवाजे पर खड़े होकर इच्छा को आवाज दी।
‘अंजू आपसे एक बात पूछूं। मेरे आने से पहले भी साहब इसी तरह लेट आते थे?’
सवाल का जवाब देते हुए अंजू कमरे के अंदर आ गई।
‘मैडम जी! मैं पिछले सात सालों से यहां काम कर रही हूं। आपसे पहले तीन मैडम और रहती थीं। साहब हमेशा से देर से आते थे इसलिए इस बात की वजह से मैडम जी लोग से लड़ाई होती रहती थी। साहब थोड़े गर्म मिजाज के हैं। उनका मूड एक जैसा नहीं रहता। बाकी तो आप बेहतर जानती होंगी।’
इच्छा खामोशी से सुनती रही।
‘बुरा न मानें, तो आपसे एक बात कहें मैडम!’
‘कहो’
‘आपका घर कहां है? आप अच्छे घर की लगती हो, मतलब साहब से बिल्कुल अलग। आप वापस चली जाओ’
‘घर तो मैं बहुत पीछे छोड़ आई हूं। घर ने मुझे गले लगाना चाहा था लेकिन मैं उसे नाले के बीच कहीं सुबकता हुआ छोड़ आई। मैंने घर की बारिश को नहीं चुना। बताओ अब कहां जाऊं’
इच्छा ने जैसे खुद को ही जवाब दिया।
‘क्या मैडम जी! मुझे समझ नहीं आया’
‘तुम जाओ! लेकिन बारिश तेज हो रही है कैसे जाओगी?’
इच्छा ने खिड़की से बाहर झांकते हुए कहा।
‘पति आ रहे हैं लेने, साइकिल पर बैठकर बरसाती ओढ़कर चले जाएंगे। अच्छा चलती हूं मैडम जी ’
इच्छा खिड़की से अंजू को साइकिल पर बैठकर जाते हुए देखती रही। धीरे-धीरे दोनों अंधेरे में कहीं गुम हो गए।
***
इच्छा बारिश और नाले के बीच अपने अस्तित्व को कहीं तलाश रही थी। पता नहीं क्यों वैभव के घर की बारिश उसे तपती हुई गर्मी का अहसास दे रही थी। इस बारिश में मन नहीं बल्कि आंखें भीग रही थी। यह बारिश उसकी नहीं थी।अपनी बारिश तो वो कहीं पीछे छोड़ आई थी।
पता नहीं मेरे बिना तपन आंगन कैसे साफ करता होगा। क्या वो अभी भी लौकी का हलवा बनाता होगा।
‘क्या सोच रही हो इच्छा डार्लिंग?’
वैभव की आवाज ने इच्छा को वर्तमान में ला पटका।
‘कुछ नहीं, बस यूं ही’
‘यार घर में बारिश का सीजन सुहावना लगता है लेकिन बाहर जाओ तो सड़कों का बुरा हाल रहता है। सबकी अपनी बारिश है डार्लिंग’
वैभव फिल्मी अंदाज में बोलता हुआ बाथरूम की तरफ बढ़ा।
‘अच्छा सुनो! आज रात तन्नू एंड पलाश ग्रुप के साथ नाइट आउट है। बस आधे घंटे में निकल जाऊंगा’
लेकिन अभी तो आए हो, मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।
‘अभी नहीं कल’
इच्छा जानती थी कि एक बार कह देने के बाद वैभव अब नहीं रूकेगा इसलिए वो चुपचाप अपने कमरे में चली गई। इच्छा की पूरी रात करवट बदलते हुए गुजर गई।
***
‘हैप्पी बर्थडे इच्छा मैडम’
अरे! तुम्हें याद था।
‘हां तुम्हारा बर्थडे कैसे भूल सकता हूं’
‘सच में! तुम कितने अच्छे हो वैभव’
‘हां पिछले साल जिस होटल में बर्थडे सेलिब्रेट करने गए थे। उसका रिमांडर मैसेज आया था। फिर से बुकिंग के लिए इसलिए…’
इच्छा की मुस्कुराहट अचानक गायब हो गई।
‘अच्छा सुनो! मुझे मीटिंग पर निकलना है। यह कुछ कैश है, अपने पास रखो। जहां मर्जी सेलिब्रेट करना। मुझे टाइम मिल गया, तो मैं आ जाऊंगा’
वैभव ने कैश टेबल पर लापरवाही से रखा।
***
अब मैं और इस घुटन भरी जिंदगी में खुश रहने का नाटक नहीं कर सकती। मैं आज वैभव से बात करके रहूंगी। मैंने सबकुछ छोड़कर वैभव को चुना है लेकिन मैं उसकी प्रॉयरिटी लिस्ट में कहीं भी नहीं हूं।
इच्छा के मन में अपने अस्तित्व की लड़ाई चल रही थी।
‘मैडम जी साहब कहां है कॉफी लेकर आई हूं’
अंजू ने वैभव को तलाशते हुए नजर दौड़ाई।
वो बाहर बालकनी में हैं। मुझे दो, मैं दे आती हूं’
इच्छा बालकनी की तरफ बढ़ ही रही थी कि ठिठक कर रूक गई।
‘काया बेबी मैं बस आधे घंटे में पहुंच रहा हूं। तुम प्लीज कुछ भी ऐसा-वैसा मत कर लेना। अब क्या करूं आफत गले पड़ गई है तो, ऐसे किसी को निकाल तो नहीं सकते। फिर इच्छा कौन-सी तुम्हारी जगह ले रही है या मैंने उससे शादी नहीं की है। मैं उसे ऐसे नहीं निकाल सकता। तुम समझो मेरी मजबूरी। इंसानियत भी कोई चीज होती है’
वैभव किसी से फोन पर बातें कर रहा था। उसे वैभव की बातें सुनकर एहसास हुआ जैसे वो कोई नाली का कीड़ा हो। वो रोते-रोते बाहर की तरफ भागी। उसके सामने जैसे फ्लैशबैक चलने लगा, जहां तपन आज भी लौकी का हलवा लेकर उसके सामने खड़ा है और वो प्यार से उसका माथा चूमना चाहता है।
तेज बारिश शुरू हो गई थी। इच्छा के आंसु बारिश के पानी में घुलते जा रहे थे। वो ऑटो करके अपने पुराने घर में जल्द से जल्द लौटना चाहती थी। आज इच्छा को बारिश और नाली की सही पहचान हो गई थी।
***
बारिश की वजह से शाम रात का एहसास दे रही थी। इच्छा ने घर पहुंचकर कदम अंदर बढ़ाया, तो तपन आज भी वहीं खड़ा था। इच्छा को दो साल बाद यूं अचानक देखकर तपन को यह कोई सपना लगा। इच्छा के घर की बारिश आज भी बिल्कुल वैसी ही थी। तपन आंगन में बैठकर बारिश का पानी साफ कर रहा था। इच्छा ने तपन के हाथों से बाल्टी ली और बारिश का पानी अपने आशियाने से बाहर फेंकने लगी। वो एकटक तपन को ऐसे देख रही थी, जैसे पहली बार देख रही हो। तपन भी मुस्कुराकर जैसे आंखों ही आंखों में पुराने गिले-शिकवे दूर कर रहा था। दोनों को आज अपनी पुरानी बारिश मिल गई थी। बैकग्राउंड में कहीं धीमी आवाज में गाना बज रहा था ‘मैं प्यासा तुम सावन, मैं दिल तुम मेरी धड़कन’
-प्रतिमा
(कल कहानी का दूसरा भाग पोस्ट नहीं कर पाई थी।)
#अपनीअपनीकहानी2

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