कश्मीर राज्य

तुर्की की लोकप्रिय टीवी सीरीज़ एर्तुगरुल ग़ाज़ी, कश्मीरियों में उम्मीद की नई किरण जगा रही है : रिपोर्ट

कश्मीरी मामलों के जानकार एक राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि तुर्की का लोकप्रिय टीवी सीरियल द्रिलिस एर्तुगरुल या रिज़रेक्शन एर्तुगरुल भारत प्रशासित कश्मीर के लोगों को ‎”‎संघर्ष और आज़ादी”‎ की नई उम्मीद दे रहा है।

अनादोलु न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक़, अर्थशास्त्र के कश्मीरी छात्र अबू बक्र का कहना है कि विश्व स्तर पर लोकप्रिय तुर्की के इस सीरियल को देखकर मेरे अन्दर यह उम्मीद जागी है कि एक दिन हमारी पीड़ाएं भी ख़त्म हो जायेंगी और हमें हमारा अधिकार प्राप्त होगा।

बक्र का कहना था कि मैं इस टीवी सीरीज़ के पांच सीज़न पूरे देख चुका हूं और अब इसे एक बार फिर से देख रहा हूं, इसलिए कि इसमें एक मज़बूत धार्मिक संदेश है और वह यह कि विजय हमारे हाथ में नहीं है, उसका संबंध अल्लाह से है, हमें सिर्फ़ प्रयास करना है।


उन्होंने आगे कहाः एक पीड़ित मुस्लिम होने के रूप में इस सीरीज़ से मेरा मज़बूत जुड़ाव हो गया है। श्रृंखला कई मायनों में इतनी प्रभावशाली है कि मेरा इससे एक मज़बूत रिश्ता हो गया है। इसमें एक सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक संदेश है।

इस सीरीज़ में 13 वीं शताब्दी के अनातोलिया, अर्थात आधुनिक तुर्की से जुड़ा इतिहास पेश किया गया है, जिसमें मुस्लिम ओग़ुज़ तुर्क ईसाई बाइज़ेंटाइन साम्राज्य और मंगोलों के ख़िलाफ़ संघर्ष करते हैं।

इसमें उस्मानिया साम्राज्य के संस्थापक उस्मान-प्रथम के पिता एर्तुगरुल ग़ाज़ी के संघर्ष को दर्शाया गया है, जो एक छोटे से क़बीले कायी के योद्धा और सरदार थे।

समाजशास्त्र में शोध के एक कश्मीरी छात्र मानून अख़्तर का कहना है कि इस सीरीज़ की कहानी कश्मीरियों के संघर्ष से काफ़ी मिलती जुलती है। यहां की परिस्थितियां भी कुछ इसी तरह की ही हैं। ऐसा लगता है कि एर्तुगरुल ग़ाजी जैसा योद्धा, कश्मीरियों के उत्पीड़न, उनके साथ होने वाले अन्याय और अत्याचार को समाप्त करने के लिए कश्मीर पहुंचा है।

कश्मीरियों का मानना है कि भारत प्रशासित कश्मीर में यह टीवी श्रृंखला एक सनसनी बन गई है, क्योंकि यह कुछ हद तक पीड़ित कश्मीरियों में “आशा” की किरण पैदा करती है।

कश्मीर के राजनीतिक विश्लेषक नूर मोहम्मद बाबा का कहना है कि, दशकों से कश्मीरी जनता मौत और तबाही का खेल देखती आ रही है और लोग अब इससे थक चुके हैं, उन्हें एर्तुगरुल ग़ाज़ी जैसे ही एक लीडर में अपने उज्जवल भविष्य की झलक दिखाई देती है।

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