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नेतनयाहू का सपना हुआ चकनाचूर : जंग हुई तो अमरीकी जेट फ़ाइटर एफ़-35 और आधुनिक ड्रोन नाकाम हो जायेंगे : रिपोर्ट

पश्चिमी तट के तीस फ़ीसदी हिस्से को इस्राईल से जोड़ने का ज़ायोनी प्रधानमंत्री नेतनयाहू का सपना पूरा होता नहीं दिखाई दे रहा है।

एक ओर इस्राईल के मंत्रीमंडल में भारती मतभेद और दूसरी ओर अमरीका की नीति में बदलाव के चलते पश्चिमी तट के कुछ इलाक़ों को इस्राईल से जोड़ने की ज़ायोनी शासन की योजना विलंबित हो चुकी है और अगर ट्रम्प दूसरे राष्ट्रपति काल के लिए निर्वाचित नहीं होते हैं तो इस योजना को लागू करना लगभग असंभव हो जाएगा। फ़िलिस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि पश्चिमी तट के एक बड़े भाग को अवैध अधिकृत क्षेत्रों से जोड़ने की इस्राईल की योजना का विलंबित होना, सेंचुरी डील पर प्रश्न चिन्ह लगने की भूमिका है। सच्चाई यही है कि ज़ायोनी प्रधानमंत्री बेनयामिन नेतनयाहू का यह कहना कि इस योजना को किसी दूसरे समय लागू किया जाएगा, इसकी विफलता की घोषणा है।

जहां तक इस ज़ायोनी योजना के विफल होने की वजह का सवाल है तो इसके अनेक कारण हैं जिनमें फ़िलिस्तीनी जनता व प्रतिरोधकर्ता गुटों की एकता और इस योजना के नकारात्मक परिणामों के बारे पूर्व व वर्तमान ज़ायोनी अधिकारियों यहां तक कि सुरक्षा अधिकारियों की चेतावनियां शामिल हैं। दूसरी ओर टीकाकारों यह भी कहना है कि नेतनयाहू की ओर से पश्चिमी तट के एक भाग को इस्राईल में शामिल करने की योजना के क्रियान्वयन को विलंबित किए जाने से, ज़ायोनी शासन का मुक़ाबला करने के संबंध में प्रतिरोध आंदोलन का संकल्प कमज़ोर नहीं पड़ेगा।

जिस तरह से फ़िलिस्तीनियों ने इस योजना का विरोध किया उसे देख कर नेतनयाहू पीछे हटने पर मजबूर हो गए। वे इस योजना के माध्यम से अपना एक स्वाधीन देश बनाने के फ़िलिस्तीनियों के संकल्प को तोड़ना चाहते थे लेकिन हुआ इसके विपरीत। फ़िलिस्तीन के लोगों और विशेष कर प्रतिरोधकर्ता गुटों ने पूरी एकता व एकजुटता से इस योजना का विरोध किया और नेतनयाहू से अपनी ताक़त मनवाने में सफल रहे।

ज़ायोनी प्रधानमंत्री नेतनयाहू की इस महत्वकांक्षी योजना के विलंबित होने की एक और वजह, कांग्रेस समेत विभिन्न अमरीकी विभागों की ओर से इसका विरोध है। अमरीका में कुछ महीने बाद चुनाव होने वाले हैं और इस देश की दोनों अहम पार्टियां इस अवसर पर इस तरह की योजना का समर्थन करने का रिस्क नहीं लेना चाहतीं। लगता है अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने भी, जो इस योजना का समर्थन कर रहे थे, इसे अपने दूसरे राष्ट्रपति काल तक के लिए टाल दिया है। अलबत्ता अमरीका में जिस तरह के चुनावी सर्वेक्षण सामने आ रहे हैं, उनके हिसाब से तो ट्रम्प का दूसरी बार राष्ट्रपति बनना ही मुश्किल है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि पश्चिमी तट को इस्राईल से जोड़ने का नेतनयाहू का सपना, सपना ही रह जाएगा।

अमरीका का स्टील्थ जेट फ़ाइटर एफ़-35 और आधुनिक ड्रोन विमान युद्ध में नाकाम हो जायेंगे?

फ़ाइटर जेट, स्टील्थ बॉम्बर्स, ड्रोन और मिसाइलों को तेज़ी से बदलते शक्ति संघर्ष के दौर में बिजली की सी तेज़ी से काम करने की ज़रूरत है।

इसलिए कि “सेंसर टू शूटर” का समय, यानी सेंसर से डेटा कितनी स्पीड से एक फ़ाइटर तक पहुंच सकता है, बहुत महत्वपूर्ण है। उस स्पीड के बिना, सैन्य विशेषज्ञ, ख़तरे के मुक़ाबले में तेज़ी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम नहीं होंगे, और दुश्मन के मुक़ाबले में युद्ध जीतना कठिन हो जाएगा।

जब दुश्मन के तेज़, एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने वाले और लम्बी दूरी के रक्षा मिसाइलों का सामना हो, तो लड़ाकू विमानों और ड्रोन विमानों को उससे भी तेज़ी से काम करने की ज़रूरत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमरीका का सबसे आधुनिक जेट एफ़-35 आज भी 13 बड़ी ख़ामियों से जूझ रहा है। जिसमें सटीकता से मिसाइल फ़ायर नहीं कर पाना जैसी ख़ामी शामिल है। जेट के सॉफ्टवेयर में भी लगभग 900 समस्याएं हैं। समस्या इतनी जटिल है कि लगभग 500 जेट्स को मरम्मत के लिए ग्राउंडेड कर दिया गया है।

इसी तरह से अमरीका के सबसे आधुनिक ड्रोन विमान ग्लोबल हॉक को ईरान ने स्वदेशी मिसाइल रक्षा प्रणाली से गिराकर अमरीकी रक्षा तकनीक की हवा निकाल दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमरीका, केवल आर्थिक क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि तकनीक के क्षेत्र में भी अपने प्रतिद्वंद्वी चीन, रूस और ईरान जैसे देशों से पिछड़ता जा रहा है और उसके हथियारों की धार, इन देशों की रक्षात्मिक शक्ति के सामने कुंद होती जा रही है।

ईरान के बारे में अमरीकी अधिकारी के दावे का रूसी अधिकारी ने दिया जवाब

रूस के वरिष्ठ अधिकारी ने ईरान के संबंध में अमरीकी अधिकारी के दावे पर कहा है कि तेहरान ने अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए से कुछ भी नहीं छिपाया है।

वियना में अंतर्राष्ट्रीय संगठनों व संस्थाओं में रूस के स्थायी प्रतिनिधि मीख़ाईल ओलियोनोफ़ ने यह बात कही।

अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व सदस्य रिचर्ड गोल्डबर्ग ने अपने ट्वीट में कहा कि आईएईए को पता चला है कि ईरान ने अघोषित परमाणु पदार्थ और परमाणु गतिविधियों को छिपाया है। इसी तरह उन्होंने दावा किया कि ईरान ने एनपीटी का उल्लंघन किया है।

मीख़ाईल ओलियोनोफ़ ने रिचर्ड गोल्डबर्ग के जवाब में लिखाः “इस बात में दो ग़लतियाँ हैं। आईएईए ने यह नहीं कहा है कि ईरान ने कुछ छिपाया है। ईरान ने एनपीटी का उल्लंघन भी नहीं किया है। यह जुमला, मामलों की सच्चाई के बारे में ग़लत व्याख्या है।”

अमरीका ने सीरिया में सैन्य अड्डा और एयरबेस बनाने की तैयारी शुरू कर दी!

अमरीका ने सीरिया में एक सैन्य अड्डा और युद्धक विमानों के लिए एक रनवे बनाने का काम शुरू कर दिया है।

अलअरबिया की रिपोर्ट के अनुसार सीरिया के एक कथित मानवाधिकार गुट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अमरीकी सेना ने हसका प्रांत के पूरब में स्थित “तल कूजर” क्षेत्र में अपनी सेना के लिए बेस बनाने का काम शुरू कर दिया है जिसमें एक सैन्य अड्डा और विमानों के लिए रनवे शामिल है। यह एयरबेस इराक़ी सीमा के निकट स्थित है। रिपोर्ट के अनुसार अमरीकी एयरबेस को बाहरी ख़तरों से बचाने के लिए उसके चारों तरफ़ कंक्रीट के ब्लाॅक्स की दीवार खड़ी कर दी है।

इस मानवाधिकार गुट ने बताया था कि अमरीका के मिलिट्री साज़ो सामान का एक सैनिक कारवां कुछ दिन पहले इराक़ी कुर्दिस्तान की अलवलीद क्राॅसिंग के रास्ते पूर्वोत्तरी सीरिया में घुसा था। इस कारवां में मिलिट्री साज़ो सामान के 13 ट्रक और उनकी हिफ़ाज़त के लिए 5 बक्तरबंद गाड़ियां शामिल थीं। पिछले महीने भी अमरीकी गठजोड़ का एक सैन्य कारवां इसी रास्ते से सीरिया में घुसा था जिसमें लगभग 50 ट्रक थे।

अमरीका, सीरिया में सैन्य अड्डा बनाने की कोशिश ऐसे समय में कर रहा है कि जब सीरिया की सरकार, अपने देश में अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति को ही ग़ैर क़ानूनी बताती है और उसने कई बार संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका पर अपनी संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। दूसरी ओर इराक़ की संसद में अमरीकी सैनिकों को देश से बाहर निकालने का बिल पास होने के बाद अमरीका क्षेत्र में कोई नया अड्डा बनाने की कोशिश में है और शायद इसी लिए वह इराक़ व सीरिया की सीमा पर यह सैन्य अड्डा तैयार कर रहा है।

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