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फ़िलिस्तीनी शहादत से कभी नहीं डरते : फ़िलिस्तीनी ज़ायोनी शासन के सामने घुटने नहीं टेकेंगे!

फ़िलिस्तीन के हमास आंदोलन ने वेस्ट बैंक में ज़ायोनी सैनिकों के हाथों फ़िलिस्तीनी युवाओं की शहादत पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शहादत को फ़िलिस्तीनी जनता की ओर से प्रतिरोध पर प्रतिबद्ध रहने का चिन्ह क़रार दिया है।

हमास आंदोलन के प्रवक्ता हाज़िम क़ासिम ने अपने बयान में कहा कि फ़िलिस्तीनी नौयुवकों की शहादत से पता चलता है कि फ़िलिस्तीनी जनता कभी भी ज़ायोनी शासन के थोपे गये हालात के सामने घुटने नहीं टेंगे।

हमास आंदोलन के प्रवक्ता ने फ़िलिस्तीनी जनता के प्रतिरोध व बलिदान को बैतुल मुक़द्दस के अतिग्रहणकारियों की साज़िशों को विफल बनाने की शक्ति क़रार दिया।

फ़िलिस्तीनी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की है कि ज़ायोनी सैनिकों ने उत्तरी वेस्ट बैंक के एक देहात कफ़ल हारिस में फ़ायरिंग करके एक निहत्थे फ़िलिस्तीनी युवाओं को शहीद कर दिया।

ज़ायोनी शासन की ओर से वेस्ट बैंक के कुछ क्षेत्रों को अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में विलय की योजना के बाद से बैतुल मुक़द्दस और वेस्ट बैंक के हालात ख़राब हैं और अशांति में वृद्धि हो गयी है।

वेस्ट बैंक का इलाक़ा हड़पने की इस्राईली साज़िश

फ़िलिस्तीन का जो थोड़ा सा हिस्सा फ़िलिस्तीनियों के पास रह गया है उसमें से भी वेस्ट बैंक का तीस प्रतिशत भाग हड़प लेने की इस्राईल ने तैयारी पूरी कर ली है। इस्राईल की इस योजना का विरोध इस्राईल के विरोधी ही नहीं बल्कि घटक भी कर रहे हैं क्योंकि इस योजना के नतीजे में पूरे पश्चिमी एशिया में अस्थिरता बढ़ेगी।

ब्रितानी वेबसाइट मिडिल ईस्ट आई ने लेखक डैनियल हिलटन का एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें इस्राईली योजना के सभी पहलुओं को समझाने के लिए 9 सवालों के जवाब दिए गए हैं और इस का भी जायज़ा लिया है कि भविष्य में क्या हालात पैदा हो सकते हैं।

-1 इस्राईली सरकार क्या हासिल करना चाहती है?

इस्राईली सरकार क्या हासिल करना चाहती है यह तो अभी स्पष्ट नहीं है लेकिन नेतनयाहू की सरकार अपना यह इरादा ज़ाहिर कर चुकी है कि वह वेस्ट बैंक का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इस्राईल में मिला लेना चाहती है जिसमें ग़ैर क़ानूनी यहूदी बस्तियां बसी हैं, ग़ौरुल उरदुन कहा जाने वाला इलाक़ा और डेड सी का उत्तरी इलाक़ा भी इसमें शामिल है।

इस बात की संभावना कम है कि इतने बड़े इलाक़े को इस्राईल में मिला लेने की योजना का एक ही बार में एलान कर दिया जाए। इस्राईली अधिकारियों ने अपने साक्षात्कारों में यह बात कही है कि कई चरणों में इस इलाक़े को इस्राईल में शामिल किया जाएगा ताकि जार्डन नरेश को भी मनाया जा सके जो चेतावनी दे चुके हैं कि अगर इस्राईल ने यह क़दम उठाया तो व्यापक युद्ध छिड़ जाएगा।

-2 क्या हालात पैदा हो सकते हैं?

इस्राईली योजना के बारे में कई आयामों से बात चल रही है लेकिन इसका हर पहलू फ़िलिस्तीनियों के लिए बड़ा घातक है। एक पहलू यह है कि वेस्ट बैंक में सी कहे जाने वाले पूरे इलाक़े को इस्राईल में शामिल कर लिया जाए जिस पर इस्राईल ने क़ब्ज़ा कर रखा है। इसमें ग़ौरुल उरदुन का इलाक़ा भी शामिल है और इसमें सारी इस्राईली बस्तियां हैं जिनमे लगभग चार लाख इस्राईली रहते हैं।

दूसरी स्थिति यह है कि केवल ग़ौरुल उरदुन के इलाक़े को शामिल किया जाए जो स्ट्रैटेजिक महत्व का इलाक़ा है और जहां 56 हज़ार फ़िलिस्तीनी और 11 हज़ार इस्राईली रहते हैं।

तीसरी तसवीर यह है कि केवल मुख्य यहूदी बस्तियों को इस्राईल में शामिल किया जाए जहां कुल मिलाकर 85 हज़ार यहूदी रहते हैं।

-3 फ़िलिस्तीनी इलाक़ों को हड़पने में कितना समय लगेगा?

नेतनयाहू और सरकार में उनके साझेदार बेनी गांट्स के बीच बनी सहमति के अनुसार बुधवार को नेतनयाहू फ़िलिस्तीनी इलाक़ों को हड़पने का वैधानिक प्रस्ताव पेश कर सकते हैं। यह क़दम इस इलाक़े को हड़पने की प्रक्रिया की शुरुआत है। इसके बाद कई कमेटियों में इसकी समीक्षा होगी और इस्राईली संसद में इसे मंज़ूरी दिलवाई जाएगी।

-4 इस योजना की क्या क़ानूनी हैसियत है?

इसकी कोई क़ानूनी हैसियत नहीं है यह अंतर्राष्ट्रीय क़ानून का खुला उल्लंघन है।

-5 फ़िलिस्तीनियों का क्या भविष्य होगा?

गोलान हाइट्स और पूर्वी बैतुल मुक़द्दस में रहने वालों के विपरीत वेस्ट बैंक के फ़िलिस्तीनियो को इस्राईल की नागरिकता या स्थायी निवास सर्टिफ़िकेट नहीं दिया जाएगा बल्कि नेतनयाहू ने कहा है कि इन फ़िलिस्तीनियों को अलग थगल रखा जाएगा और वह फ़िलिस्तीनी प्रशासन की देखरेख में रहेंगे।

-6 क्या इस निर्णय पर इस्राईली सरकार के भीतर आम सहमति है?

इस्राईली सरकार के भीतर इस फ़ैसले को लेकर गंभीर मतभेद हैं। नेतनयाहू कहते हैं कि इन इलाक़ों को इस्राईल में मिलाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाएगी लेकिन उनके साझेदार बेनी गांट्स का कहना है कि इसे कोरोना महामारी ख़त्म होने तक टाला जाएगा। नेतनयाहू का कहना है कि इस बारे में प्रस्ताव तैयार करना और पेश करना गांट्स के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। मगर गांट्स अगर नहीं चाहेंगे तो नेतनयाहू यह प्रस्ताव संसद में पास नहीं करवा पाएंगे।

-7 अमरीका क्या चाहता है?

अमरीका ने वैसे तो डील आफ़ सेंचुरी योजना में इस इलाक़े को इस्राईल में शामिल करने की बात कही थी लेकिन साथ ही फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के गठन पर भी ज़ोर दिया था। इसलिए लगता है कि ट्रम्प प्रशासन के भीतर इस बारे में अलग अलग विचार पाए जाते हैं। इस्राईल की योजना को ग्रीन सिग्नल देने का साफ़ मतलब यह है कि ट्रम्प की योजना कूड़ेदान में चली गई। ट्रम्प प्रशासन इस्राईल की योजना के बारे में बयान जारी करने वाला था लेकिन उसने अब तक बयान जारी नहीं किया है।

-8 क्या इस्राईली जनमत इस योजना के पक्ष में है?

बिनयामिन नेतनयाहू के चुनावी कैंपेन का एक बड़ा वादा यही था कि वह फ़िलिस्तीनी इलाक़ों को इस्राईल में शामिल करेंगे। इस वादे के बलबूते पर उन्हें वोट भी मिले मगर इस्राईलियों के बीच इस विषय में बड़े मतभेद हैं। यहां तक कि जो लोग फ़िलिस्तीनी इलाक़ो को इस्राईल में शामिल किए जाने के पक्ष में है वह भी आपस में कई बिंदुओं को लेकर विरोधाभासी राय रखते हैं। चरमपंथी विचारधारा के ज़ायोनी तो यह मानते हैं कि फ़िलिस्तीन नाम का कोई स्थान बचना ही नहीं चाहिए बल्कि मेडिटेरियन सागर से लेकिर जार्डन नदी तक जो भी इलाक़ा है वह इस्राईल का हिस्सा होना चाहिए।

-9 फ़िलिस्तीनियों की क्या प्रतिक्रिया है?

फ़िलिस्तीनियों ने बार बार एलान किया है कि वह इस योजना को हरगिज़ नहीं मानेंगे। फ़िलिस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास ने कहा है कि यदि इस्राईल ने यह क़दम उठाया तो वह इस्राईल और अमरीका के साथ अपने सारे समझौते निरस्त कर देंगे।

फ़िलिस्तीनी संगठन हमास ने कहा है कि इस योजना का मतलब यह है कि ओस्लो समझौता नाकाम हो चुका है जिस पर फ़तह आंदोलन ने इस्राईल के साथ मिलकर हस्ताक्षर किए थे। फ़िलिस्तीनी प्रशासन ने कहा है कि इस्राईल ने यह क़दम उठाया तो वह ओस्लो समझौते को फाड़ कर फेंक देगा और स्वाधीनता का एलान कर देगा।

स्रोतः मिडिल ईस्ट आई

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