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मणिपुर : भाजपा के ख़िलाफ़ बोलने वाली महिला पुलिस अधिकारी गिरफ़्तार : आलोचना की वजह से अन्य कार्यकर्ता पर देश द्रोह का मुक़द्दमा!

इंफ़ाल वेस्ट पुलिस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी थोउनाओजम बृंदा और दो अन्य ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लागू लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन किया है।

सोमवार की रात को संगिप्राउ लामखाई में लॉकडाउन प्रतिबंधों का उल्लंघन करने पर बृंदा और उसके साथियों को अस्थायी रूप से हिरासत में लिया गया था।

ज्ञात रहे कि इस महीने की शुरुआत में नारकोटिक्स एंड अफेयर्स ऑफ़ बॉर्डर ब्यूरो की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक थोउनाओजम बृंदा ने मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह और राज्य में भाजपा के एक शीर्ष नेता पर एक कथित ड्रग डीलर को छोड़ने के लिए उन पर दबाव डालने का आरोप लगाया था।

बृंदा ने 13 जुलाई को इम्फाल हाईकोर्ट के समक्ष दायर एक हलफ़नामे में यह आरोप लगाए थे। बृंदा के हलफ़नामे के अनुसार, इस मामले में मुख्य आरोपी लुखाउसी जू है जिसे ड्रग्स कार्टेल का सरताज माना जाता है, वह चंदेल जिले में भाजपा का एक स्थानीय नेता भी है।

इसके बाद सिंह ने अदालत में एक याचिका दाखिल कर अधिकारी को उनके खिलाफ मानहानिकारक बयान देने और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप से संबंधित सामग्री को मीडिया में प्रकाशित करने से रोकने का आदेश देने का आग्रह किया गया था।

दूसरी ओर मणिपुर पुलिस ने 25 जुलाई को अपने फेसबुक पेज पर एक टिप्पणी के लिए राजनीतिक कार्यकर्ता ऐरेंद्रो लेचोंबम के ख़िलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया है।

रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने संबंधित पोस्ट के बारे में नहीं बताया लेकिन यह माना जा रहा है कि ऐरेंद्रो लेचोंबम को उस पोस्ट के कारण निशाना बनाया गया है जिसमें मणिपुर के पूर्व राजा और भाजपा के समर्थन के साथ नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य संजौबा लिसेम्बा की तस्वीर है।

उस तस्वीर में लिसेम्बा झुककर शीर्ष भाजपा नेता अमित शाह का अभिवादन करते नज़र आ रहे हैं और उसके साथ ऐरेंद्रो ने “मिनाई माचा” लिखा है, जिसका अर्थ है “नौकर का बेटा”।

मणिपुर में भाजपा नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के तीखे आलोचक ऐरेंद्रो को मई 2018 में फेसबुक पेज़ पर एक वीडियो पोस्ट करने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया था।

पुलिस ने दावा किया था कि वीडियो विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी और आपराधिक धमकी को बढ़ावा देने वाला है। इसके बाद जून 2018 के पहले सप्ताह में उन्हें एक स्थानीय अदालत से ज़मानत मिल गई थी।

मणिपुर में 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले ऐरेंद्रो ने एक राजनीतिक दल पीपुल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस अलायंस का गठन किया था।

उन्हें इस राजनीतिक दल का गठन सशस्त्र बल अधिनियम (आफस्पा) के खिलाफ 16 साल लंबा भूख हड़ताल तोड़ने वाली इरोम शर्मिला के साथ किया था।

दोनों ही राजनीतिक कार्यकर्ताओं को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, जिसमें पहली बार भाजपा राज्य में सत्ता में आने में सफल हो पाई।

बीते 26 जुलाई को दोपहर में इम्फाल ईस्ट पुलिस ऐरेंद्रो को गिरफ्तार करने उनके घर पहुंची, हालांकि, तब वह उन्हें हिरासत में नहीं ले सकी क्योंकि वे दिल्ली में थे।

कई मीडिया रिपोर्ट ने इम्फाल ईस्ट पुलिस के हवाले पुष्टि की है कि ऐरेंद्रो पर आईपीसी की धारा 153 (दंगा भड़काने का कारण), 124ए (राजद्रोह) और 505 (सार्वजनिक शरारत) के तहत फेसबुक के लिए मामला दर्ज किया गया है।

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