विशेष

मत पूछिए कि ‘होश’ क्या है?…और जो लोग इतने से भी नहीं जागें!!

Ikkyu Tzu
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होश क्या है? इस पर इतना जोर क्यों दिया जाता है, और हम इसकी साधना कैसे कर सकते हैं?
इक्क्यु- यह एक बहुत ही मुश्किल सवाल है| इसका सकारात्मक उत्तर देना थोड़ा कठिन है| इसलिए ‘होश’ क्या है, जानने के बजाय हम बेहोशी को समझने की कोशिश करते है| क्योंकि बेहोशी होश से पहले है| अभी हम बेहोश हैं, इसीलिए इसे समझना आसान रहेगा| ओशो कहते हैं न, “यात्रा वहीं से शुरू हो सकती है, जहां तुम खड़े हो” और बुद्ध कहते हैं जिसने प्रमाद को समझ लिया, वह आप ही अप्रमाद में प्रवेश कर जाएगा|

आगे बढ़ने से पहले एक और चीज़ साफ़ कर दूं,- अवेयरनेस, माइंडफुलनेस, साक्षी भाव, होश, अप्रमाद, विवेक, स्मरण, वर्तमान में जीना और सेल्फ-रिमेम्बररिंग सब एक ही चीज़ के अलग-अलग नाम है|


रूस के एक रहस्यदर्शी हुए ‘जार्ज गुरजिएफ’, वे कहते थे, “मनुष्य, जैसा कि अभी वह है, एक यंत्र है|” इस एक वक्तव्य ने पिछली सदी में जितने लोगों को डिस्टर्ब किया, शायद ही कभी किसी बात ने आदमी को कभी इतनी चोट पहुंचाई हो| पिछली सदी में आदमी के गाल पर दो ऐसे झन्नाटेदार थप्पड़ पड़े थे, जिनको वह आज तक नहीं भुला पाया है, आज भी कंटाप लाल है- पहला थप्पड़ नीत्शे ने ‘ईश्वर मर गया है’ कह कर मारा था, और दूसरा G. ने ‘ आदमी एक यंत्र है’ कह कर| आज भी इन तमाचों की अनुगूँज सुनाई देती है| हमारी सदियों पुरानी कुंभकर्णी नींद को इन दो लोगों ने एक झटके में तोड़ दिया| और जो लोग इतने से भी नहीं जागें, उनको भारत के दो महाभूप ओशो और कृष्णमूर्ति ने खोर-खोर का जगाया| इन दोनो से भी जो बच गए, वे मनुष्य नही अभागे थे| पृथ्वी की बोझ थे| ऐसे ही लोगों के भार से इस धरती को मुक्त करने के लिए अस्तित्व ने महाकाल ‘कोरोना’ को भेजा है| जैसे भारत ने चीन को जगाने के लिए सदियों
पहले अपने यहाँ से बोद्धिधर्म को भेजा था, वैसे ही आज चीन ने कोरोना को भेजा| जीवन उसी का हैं जिसने मौत से दोस्ती कर ली|

आदमी से कहना कि तुम एक यंत्र हो, उसके आदमी होने की बुनियाद को हिला देना है| गुरजिएफ कहते थे, “Man is born, lives, dies, builds houses, writes book, not as he wants to, but as it happens. Everything happens. Man does not love, hate, desire- all this happens. But on one will ever believe you if you tell him he can do nothing. This is the most offensive and the most unpleasant thing you can tell people. It is particularly unpleasant and offensive because it is the truth, and nobody wants to know the truth. गुरजिएफ कहते हैं “लेकिन कोई भी इसे जानना नहीं चाहता है-nobody wants to know the truth. यही हमारा दुर्भाग्य है| ज्ञान के मार्ग पर पहला क़दम अपने अज्ञान की स्वीकृति है|

मत पूछिए कि ‘होश’ क्या है?’ यह हमारे मतलब की बात नहीं है| अभी बस इतना ही पूछिए कि बेहोशी क्या है, क्योंकि अपनी बेहोशी को समझना ही होश में आने की शुरुआत है|कभी पांच मिनट के लिए सब काम छोड़ कर आँखें बंद कर बैठ जाएँ, और भीतर ये संकल्प करें कि पांच मिनट तक मैं अपने सांस का बोध रखूँगा, हर भीतर जाती सांस के साथ मैं यह बोध रखूँगा कि ये सांस भीतर गई, और बाहर आती सांस के साथ बोध रखूँगा कि सांस नासाग्र से बाहर जा रही है| पांच मिनट में एक भी सांस को नहीं चुकूँगा..| फिर प्रयोग शुरू करें| कुछ ही सेकंड में आपको बेहोशी का पता चल जाएगा| दो चार सांस के बाद ही आप भूल जाएँगे, मन किसी और ही बात में आपको उलझा लेगा| ‘ये मन के जालों में उलझ जाना ही बेहोशी है| आप सांस को देखना भूल कर भविष्य के किसी सपने में खो जाएँगे, या फिर अतीत के किसी बात पर विचार करने लगेंगे| यही बेहोशी है| इसी की वजह से आप उससे चूक रहे हैं, जो अभी और यहीं है| आपका मन आपकी दृष्टि पर पर्दा डाल दे रहा है, आप चीज़ों को उसके वास्तविक रूप में नहीं देख पा रहे हैं| इसी को हिन्दुओं ने ‘माया’ कहा है| माया का अर्थ होता है ‘माप’, इसी से अंग्रेजी का शब्द मैट्रिक्स बना है| आप जब भी आँख खोल कर बाहर देखते हैं, आपको सिर्फ रूप दीखता है, जिसका नाम आपको पता है- यह पेड़ है, यह पहाड़ है, यह टेबल है, यह आदमी है, यह फूल है|

इस नाम और रूप में ही उलझे रहना ‘बेहोशी’ है| इस बेहोशी को अपने भीतर सतत देखने की कोशिश करें- खाना खाते समय अपने को देखें, आप खाना खा रहे हैं या फिर शरीर यंत्र की तरह खा रहा है, और आप कुछ सोचने में व्यस्त है| मन का शरीर के साथ न होना बेहोशी है|

आप निर्णय लेते हैं कि आज के बाद क्रोध नहीं करूँगा, लेकिन फिर दो क्षण बाद ही आप चीख रहे होते हैं, यह कैसे हो रहा है? यही मशीन होना है| दिन भर में क्या आप कोई भी ऐसा कृत्य करते हैं, जिसमे आपकी मालकियत हो? क्या आप अपने भीतर चल रहे विचारों को एक क्षण के लिए भी रोक सकते हैं? बाल को बढ़ने से मना कर सकते हैं? खून के प्रवाह को रोक सकते हैं? आप कहेंगे, लेकिन मैं हाथ घुमा सकता हूँ, पैर चला सकता हूँ?

पर मैं आपसे कहूँगा यह घुमाना भी आपका नहीं है, आप हाथ को उतना ही घुमा सकते हैं, जितना हाथ घूम सकता है| हाथ आपके घूमने की वजह से नहीं घूमता है, वह घूम सकता है इसीलिए घूमता है| जिस दिन लकवा मार देगा, आप चाहते रह जाएँगे हाथ नहीं घूमेगा|

और हाथ को घूमाने का ख्याल आपके भीतर तभी पैदा होता है, जब हाथ ख़ुद ही घूमना चाहता है| जब जो इंद्री जो काम करना चाहती है, तभी आप के भीतर उससे वो काम लेने का ख्याल पैदा होता है| जब काम केंद्र पर वीर्य इकठ्ठा होता है, तो आप सेक्स के बारे में सोचने लगते हैं, जब सूक्ष्म शरीर में गांठे बनती हैं, तब आप को क्रोध आता हैं, ऐसी चीज़ें दिखने लगती है, जिससे क्रोध भड़के| पेट को भूख लगती है, तो आपके अंदर खाने का ख्याल आता है| आपके सब विचार इन्द्रियों और बाहरी चीज़ों से प्रभावित होकर पैदा होते हैं| आपके अंदर कोई भी विचार ऐसा नहीं है जिसे आप अपना कह सकते हैं, सब बाहर से डाले गए हैं| आप कहते हैं मेरा नाम रोहन है, और मैं हिन्दू हूँ, भारतीय हूँ, पुरुष हूँ…इत्यादि-इत्यादि, क्या ये सब विचार आपके अपने हैं? ये सब उधार विचार हैं, तभी तो ज्ञानियों ने कहा है- मेरा मुझ में कुछ भी नहीं| अपने भीतर अपना कुछ भी नहीं देखना ही होश में आने की शुरुआत है| अपनी बेहोशी को समझने की कोशिश शुरू करें|

इस कोशिश में जो चीज़ें आपको सहयोग देती हैं, उन्ही को योग ‘यम और नियम’ कहता है| बिना यम और नियम के यात्रा बहुत ही कठिन है| इसलिए यम-नियम, विधि और प्रत्याहार की मदद लें, यात्रा सुगम हो जाएगी|
आज इतना ही..!

नोट- जो मित्र भी कमेंट करके या मेसेज में सवाल पूछते हैं, उनसे अनुरोध है कि अपना प्रश्न ikkyutzu@gmail.com पर हिंदी में (देवनागरी में) लिख कर मेल कर दें| अगर आपका प्रश्न व्यक्तिगत समस्याओं को लेकर है, तो उसके लिए डोनेट करना (100 या उससे उपर कोई भी राशि) अनिवार्य है| प्रश्न यदि ध्यान, सन्यास और समाधि से सम्बंधित है, तो उसका जवाब पाने के लिए डोनेशन अनिवार्य नहीं है, आपकी मर्जी है| लेकिन फिर आप धैर्य रखें, प्रश्न पूछने वालों की संख्या रोज़ बढ़ती जा रही है, और मैं एक दिन एक से अधिक प्रश्नों का जवाब देने में असमर्थ हूँ|

इसलिए, जब आपके प्रश्न का नंबर आएगा तभी जवाब भेजूंगा| Paid प्रश्नों का जवाब पहले देता हूँ, क्योंकि पैसा देकर आप यह सिद्ध करते हैं कि प्रश्न सिर्फ आपकी खुजली नहीं है, उसमें आपकी आत्मा भी है, उत्तर के लिए आप सच में ही प्यासे हैं | आप मौका देख कर बहती गंगा में हाथ धोने वालों में से नहीं है|

आभार 🙏
-इक्क्यु केंशो तजु

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