इतिहास

महान मुग़ल बादशाह शाहजहाँ की निजी कटार 13 करोड़ रुपए में लंदन में नीलाम हुई है….

Syed Faizan Siddiqui
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प्राचीन कलाकृतियों की नीलामी करने वाली नामी गिरामी कंपनी बोन्हैम्स का कहना है कि इस कटार की बोली अनुमान से तीन गुना अधिक लगाई गई है. शाहजहाँ की कमर में बंधा रहने वाला खंजर 1630 का है यानी 378 वर्ष पुराना. इस कटार पर शाहजहाँ का नाम, उनका जहाँपनाह का ओहदा, उनकी जन्म की तारीख़ वगैरह सोने से लिखी गई है. कटार ही नहीं, उसका खोल भी बेहतरीन कारीगरी का नमूना है. कटार की खोल पर बारीक़ नक्काशी की गई है और उसकी मूठ बहुत ही चिकने पत्थर से बनाई गई है.

बोन्हैम्स की क्लेयर पेनहॉलरिक ने कहा, “ऐसी कलात्मक और अहम वस्तुएँ नीलामी के लिए कभी कभार ही आती हैं, हम बहुत ख़ुश हैं कि इसके लिए अच्छी क़ीमत लगाई गई.”

बोन्हैम्स का कहना है कि यह कटार बेल्जियम के एक व्यापारी और कलात्मक वस्तुओं का संग्रह करने वाले ज्याक दैफ़ांस के पास थी.

दैफ़ांस ने लगभग पचास वर्ष तक भारत और ईरान से कलात्मक वस्तुओं का संग्रह किया था और उनके संग्रह की चर्चा पहली बार तब हुई थी जब ईरान के रज़ा शाह ने उसका ज़िक्र 1969 में किया था.

लेकिन बोन्हैम्स ने यह नहीं बताया है कि दैफ़ांस के हाथ यह कटार किस तरह आई.

जाने-माने इतिहासकार विलियम डैलरिंपल कहते हैं, “शाहजहाँ का सौंदर्यबोध और कीमती चीज़ों की उनकी पसंद के बारे में उनसे मिलने वाले कई लोगों ने टिप्पणियाँ की हैं.”

वैसे भी ताजमहल, दिल्ली का लाल क़िला, जामा मस्जिद और विश्व प्रसिद्ध तख़्त-ए-ताउस की तामीर कराने वाले शाहजहाँ की कलात्मक अभिरुचि जगज़ाहिर है.

ब्रितानी इतिहासकारों का कहना है कि अपने दौर में शाहजहाँ जितना बड़ा हीरे जवहारात का ख़ज़ाना दुनिया में किसी के पास नहीं था.

AN IMPORTANT DAGGER (KHANJAR) WITH THE BLADE INSCRIBED TO THE MUGHAL EMPEROR SHAH JAHAN (REG. 1628-1657)
Akbarabad (Agra), dated AH 1039/ AD 1629-30

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