धर्म

#मुसीबत में नेकी काम आई : एक ग़ार में फंसे #उम्मत के तीन शख़्स की दास्तां✍

इस्लाम दीन की अच्छी बातें
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#मुसीबत में नेकी काम आई- एक ग़ार में फंसे हुए किसी #उम्मत के तीन शख़्स की दास्तां.✍
हुज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रजिअल्लाहुअन्हु फ़रमाते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह इर्शाद फ़रमाते हुए सुना: तुमसे पहले किसी उम्मत के तीन शख़्स एक साथ सफ़र पर) निकले. चलते-चलते रात हो गई) रात गुज़ारने के लिए वे एक ग़ार में दाख़िल हो गए. उसी दौरान पहाड़ से एक चट्टान गिरी, जिसने ग़ार के मुंह को बंद कर दिया. यह देखकर उन्होंने कहा कि चट्टान से नजात की यही सूरत है कि सबके सब अपने आमाले सालिहा के ज़रिए अल्लाह तआला से दुआ करें.

#चुनांचे उन्होंने अपने-अपने अमल के वास्ते से दुआएं कीं) उनमें से एक ने कहा: या अल्लाह! (आप जानते हैं कि मेरे मां-बाप बहुत बूढ़े थे. मैं अह्ल व अयाल और ग़ुलामों को उनसे पहले दूध नहीं पिलाता था. एक दिन मैं एक चीज़ की तलाश में दूर निकल गया, जब वापस लौट कर आया तो वालिदैन सो चुके थे. (फिर भी) मैंने उनके लिए शाम का दूध दूहा और उसे प्याले में लेकर उनकी ख़िदमत में हाज़िर हुआ तो देखा कि वह (उस वक़्त भी) सो रहे हैं. मैंने उनको जगाना पसन्द नहीं किया और उनसे पहले अह्ल व अयाल या ग़ुलामों को दूध पिलाना भी गवारा न किया. मैं दूध का प्याला हाथ में लिए उनके सिरहाने खड़ा उनके जागने का इंतज़ार करता रहा, यहां तक कि सुबह हो गई और वे बेदार हुए, (तो मैंने उन्हें दूध दिया) उस वक़्त उन्होंने अपने शाम के हिस्से का दूध पिया. या अल्लाह! अगर मैंने ये काम सिर्फ़ आपकी ख़ुशनूदी के लिए किया था तो हम इस चट्टान की वजह से जिस मुसीबत में फंस गए हैं, उससे हमें निजात अता फ़रमा दे.इस दुआ के नतीजे में वह चट्टान थोड़ी-सी सरक गई लेकिन बाहर निकलना मुम्किन न हुआ.

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इर्शाद फ़रमाते हैं कि दूसरे शख़्स ने दुआ की, या अल्लाह! मेरी एक चचाज़ाद बहन थी जो मुझे सबसे ज़्यादा महबूब थी. मैंने (एक मर्तबा) उससे अपनी नफ़्सानी ख़्वाहिश पूरी करने का इरादा किया, लेकिन वह आमादा नहीं हुई, यहां तक कि एक वक़्त आया कि क़हतसाली ने उसे (मेरे पास) आने पर मजबूर कर दिया. मैंने उसे इस शर्त पर एक सौ बीस दीनार दिए कि वह तन्हाई में मुझसे मिले. वह आमादा हो गई, यहां तक कि जब मैं उस पर क़ाबू पा चुका (और क़रीब था कि मैं अपनी नफ़्सानी ख़्वाहिश पूरी करूं) तो उसने कहा कि मैं तुम्हारे लिए इस बात को हलाल नहीं समझती कि तुम इस मुहर को नाहक़ तोड़ो. (यह सुनकर) मैं अपने बुरे इरादे से बाज़ आ गया और मैं उससे दूर हो गया हालांकि मुझे उससे बहुत ज़्यादा मुहब्बत थी और मैंने वे सोने के दीनार भी छोड़ दिए जो उसे दिए थे. या अल्लाह! अगर मैंने यह काम आपकी रज़ा के लिए किया था तो हमारी इस मुसीबत को दूर फ़रमा दे. चुनांचे वह चट्टान कुछ और सरक गई, लेकिन (फिर भी) निकलना मुम्किन न हुआ.

तीसरे ने दुआ की या अल्लाह! कुछ मज़दूरों को मैंने मज़दूरी पर रखा था, सबको मैंने मज़दूरी दे दी, सिर्फ एक मज़दूर अपनी मज़दूरी लिए बग़ैर चला गया था. मैंने उसकी मज़दूरी की रक़म को कारोबार में लगा दिया यहां तक कि माल में बहुत कुछ इज़ाफ़ा हो गया. कुछ अर्से बाद वह एक दिन आया और आकर कहा: अल्लाह के बन्दे! मुझे मेरी मज़दूरी दे, मैंने कहा, ये ऊंट, गाय, बकरियां और ग़ुलाम जो तुम्हें नज़र आ रहे हैं, ये तुम्हारी मज़दूरी हैं, यानी तुम्हारी मज़दूरी को कारोबार में लगाकर ये मुनाफ़े हासिल हुए हैं. उसने कहा: अल्लाह के बंदे! मज़ाक़ न कर. मैंने कहा, मज़ाक़ नहीं कर रहा, हक़ीक़त ब्यान कर रहा हूं चुनांचे मेरी वज़ाहत के बाद वह सारा माल ले गया, कुछ न छोड़ा. या अल्लाह! अगर मैंने यह काम सिर्फ़ आपकी रज़ा की ख़ातिर किया था तो यह मुसीबत जिसमें हम फंसे हुए हैं, दूर फ़रमा दें

#चुनांचे वह चट्टान बिल्कुल सरक गई और ग़ार का मुंह खुल गया और सब बाहर निकल आए….
#बुख़ारी
Mahim ✍

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