कश्मीर राज्य

मोदी सरकार का फ़रमान : भारतीय सुरक्षा बल बिना किसी एनओसी के कश्मीर में ज़मीन ख़रीद सकेंगे

मोदी सरकार ने एक सर्कुलर जारी किया है, जिसके तहत भारतीय सुरक्षा बल, बिना किसी पूर्व अनुमति के भारत प्रशासित जम्मू और कश्मीर में ज़मीन ख़रीद सकेंगे।

यह सर्कुलर 1971 के उस क़ानून की जगह लेगा, जिसके तहत भारतीय सुरक्षा बलों को इस विवादित क्षेत्र में ज़मीन ख़रीदने के लिए एक विशेष प्रमाण पत्र प्राप्त करना होता था।

सरकार के इस आदेश के बाद, भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल, अर्धसैनिक और इसी तरह के दूसरे विभागों के कर्मचारी एनओसी के बिना ही कश्मीर में ज़मीन ख़रीद सकेंगे।

पिछले साल 5 अगस्त को मोदी सरकार ने विवादास्पद क़दम उठाते हुए भारतीय संविधान के आर्टिकल 370 और संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के तहत जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जा समाप्त करके उसे संघीय क्षेत्र घोषित कर दिया था।

इस क़दम के बाद, नई दिल्ली ने हज़ारों कश्मीरियों को जेलों में ठूंसकर अब तक का सबसे लम्बा और कड़ा लॉकडाउन लागू कर दिया, ताकि लोग मोदी सरकार के इस फ़ैसले का विरोध न कर सकें।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार एकमात्र मुस्लिम बहुल राज्य की आबादी का अनुपात बदलने का प्रयास कर रही है।

इस साल मई में सरकार ने एक क़ानून पारित किया था, जिसके तहत ग़ैर-कश्मीरी भारतीय नागरिक भी अब स्थायी रूप से कश्मीर में रह सकेंगे और वहां ज़मीनें ख़रीद सकेंगे।

2011 में हुई जनगणना के अनुसार, जम्मू और कश्मीर की एक करोड़ 25 लाख की आबादी में मुसलमानों की आबादी 68.31 प्रतिशत थी, जबकि हिंदुओं की आबादी 28.53 प्रतिशत।

मई से अब तक 25,000 से ज़्यादा भारतीयों को कश्मीर में बसाया जा चुका है।

एक ताज़ातरीन क़दम के तहत 24 जुलाई को भारत सरकार ने जम्मू और कश्मीर में 488 हेक्टेयर ज़मीन उद्योग लगाने के लिए विशेष कर दी।

भ्रष्टाचार विरोधी आरटीआई मूवमेंट के चेयरमैन राजा मुज़फ्फ़र भट ने सोमवार को सरकार के इस क़दम को विनाशकारी बताया और कहा कि सरकार को इसके बजाय अधिक कृषि भूमि के लिए प्रयास करना चाहिए, ताकि क्षेत्र में ग्रीन नौकरियों पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।

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