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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 2036 तक राष्ट्रपति बने रहेंगे : रिपोर्ट

रूसी संविधान में संशोधन, पुतीन धार्मिक मूल्यों को भी कर रहे शामिल, नये संविधान की कुछ दिलचस्प बातें!

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को 2036 तक पद पर बने रहने का अवसर देने संबंधी संविधान संशोधन पर सप्ताह भर चलने वाली मतदान प्रक्रिया गुरुवार को शुरू हुई थी, उसके नतीजी आ गए हैं, पुतिन को 77 फ़ीसद वोट मिले हैं, इसी के साथ अब पुतिन 2036 तक पद पर बने रहेंगे, संविधान संशोधन पर जनवरी में प्रस्तावित मतदान 22 अप्रैल को होना था लेकिन COVID-19 महामारी के कारण इसे टाल दिया गया था। बाद में 1 जुलाई की तारीख तय की गई और मतदान केंद्र एक सप्ताह पहले खोल दिए गए हैं ताकि मुख्य मतदान दिवस पर भीड़भाड़ से बचा जा सके।

रुस्सियन चुनाव आयोग ने भी पुतिन के 2036 तक राष्ट्रपति पद पर बने का एलान कर दिया है

रूस में संविधान में संशोधन पर जनमत संग्रह हो रहा है। संविधान में संशोधन के बाद सत्ता में विलादमीर पुतीन की उपस्थिति, संसद में अधिकारों के वृद्धि और सामाजिक राजनीतिक व धार्मिक सुधार किया जाएगा।

रूसी संविधान में संशोधन के अनुसार रूस के वर्तमान राष्ट्रपति दो बार और इस देश के राष्ट्रपति बन सकते हैं इस तरह से वह वह सन 2036 तक और 84 वर्ष की आयु तक रूस के राष्ट्रपति बने रहेंगे जबकि वर्तमान संविधान के अनुसार पुतीन को सन 2024 में राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ेगा।

नये संशोधन के अनुसार रूसी राष्ट्रपति को अधिक शक्ति मिलेगी और अगर संसद ने किसी मंत्री या उप मंत्री की पुष्टि से तीन बार लगातार इन्कार किया तो राष्ट्रपति को संसद भंग करने का अधिकार होगा जबकि इस समय केवल प्रधानमंत्री के बारे में यह अधिकार उसे प्राप्त है।

इसके अलावा राष्ट्रपति को बहुत से जजों, अटार्नी जनरल और उसके प्रतिनिधियों के निर्धारण का अधिकार प्राप्त होगा जबकि मौजूदा संविधान के अनुसार इन सब का निर्धारण संसद द्वारा किया जाता है। इसी प्रकार नये संशोधन के बाद अभी सलाहकार परिषद कही जाने वाली संस्था के अधिकार भी बढ़ा दिये जाएंगे और बहुत से विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पुतीन उसके प्रमुख बने तो क्रिमलेन से जाने के बाद भी उनका प्रभाव बाक़ी रहेगा।

इसी तरह रूस के संविधान में नये संशोधन के अनुसार न्यूनतम मज़दूरी हर तीन महीने में सरकार द्वारा तय की जाएगी जिससे कम किसी को मज़दूरी नहीं दी जा सकती।

इसी तरह पीढ़ियों के बीच मेल जोल और न्याय का कानून बनाया जाएगा जिसके दौरान साल में कम से कम एक बार पेंशन पाने वालों की स्थिति पर विचार किया जाएगा।

संशोधन में पर्यावरण की रक्षा पर भी ध्यान दिया गया है लेकिन सब से अहम बात यह है कि विलादमीर पुतीन ने नये संशोधन में सामाजिक और राष्ट्रीय मूल्यों को जगह दी है जिनका आधार धर्म है। संशोधन के अनुसार शादी, पुरुष और महिला को एक साथ करने का साधन है और इस तरह से समलैंगिक विवाह की संभावना को खत्म कर दिया गया है।

इसी तरह नये संशोधन में कहा गया है कि बच्चे जनता के लिए बनायी जाने वाली नीतियों में सर्वोपरि हैं और सरकार के लिए ज़रूरी है कि उनमें देश प्रेम की भावना पैदा करके, समाज के प्रति वफादारी और अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान जगाए।

नये संशोधन के अनुसार रूसी संविधान अंतराष्ट्रीय नियमों से उच्च होगा और अगर कोई अंतरराष्ट्रीय नियम रूस के संविधान के विपरीत है तो मास्को सरकार के लिए उस नियम का पालन करने की अनुमति होगी।

6 साल का होता है कार्यकाल
दो दशक से रूस पर शासन कर रहे 67 वर्षीय पुतिन का कार्यकाल 2024 में समाप्त होगा। संविधान संशोधन के जरिये अगले दो कार्यकाल के लिए उन्हें फिर से सत्ता मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। रूस में राष्ट्रपति का कार्यकाल छह साल का होता है। अन्य संशोधनों में सामाजिक लाभ, स्त्री-पुरुष विवाह की परिभाषा तय करना और सरकार के भीतर शक्ति के बंटवारे इत्यादि मुद्दों पर निर्णय होना है।

लोकतांत्रिक मान्यता देने की कोशिश
संशोधनों को संसद के दोनों सदनों से पारित किया जा चुका है और पुतिन के हस्ताक्षर होने के बाद कानून भी बन चुके हैं। विवादास्पद संशोधनों पर मतदान करा कर इसे लोकतांत्रिक मान्यता देने का प्रयास किया जा रहा है। संशोधनों के पक्ष में लोगों को मतदान करने के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते अधिकारी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

दी जा रहीं कारें, फ्लैट
इसके लिए उपहार के तौर पर कारें और फ्लैट दिए जाने की योजनाएं लाई गई हैं, विख्यात लोगों के माध्यम से पक्ष में मतदान करने की अपील की जा रही है, सरकारी अस्पतालों और स्कूलों के कर्मचारियों पर भी मतदान का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि देश का विपक्ष बंटा हुआ है और वह चुनाव अभियान के दौरान प्रभावी रूप से विरोध दर्ज कराने में असफल रहा है। मॉस्को के अधिकारियों ने मतदान करने वालों को उपहार देने के लिए दस अरब रूबल (साढ़े चौदह करोड़ डॉलर) आवंटित किए हैं।

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