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संविधान पर ख़तरा : ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द हटाने फिर उठी मांग, याचिका दर्ज!

भारतीय संविधान पर एक बार फिर ख़तरा मंडराने लगा है।

भारत के उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है जिसमें संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को हटाने का अनुरोध किया गया है।

ज्ञात रहे कि ये शब्द 1976 में 42वें संविधान संशोधन के माध्यम से जोड़े गए थे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि एक जनहित याचिका में कहा गया है कि किया गया संशोधन संवैधानिक सिद्धांतों के साथ-साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषय-वस्तु के विपरीत था।

इसमें कहा गया है कि यह क़दम संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) में उल्लेखित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अवधारणा और अनुच्छेद 25 के तहत प्रदत्त धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार के उल्लंघन के दृष्टिकोण से अवैध था।

इसमें कहा गया है कि संशोधन भारत के महान गणराज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विषय-वस्तु के खिलाफ़ भी था।

याचिका में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 की धारा 2 (ए) के ज़रिए संविधान की प्रस्तावना में शामिल शब्दों ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ को हटाये जाने के लिए उचित निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया गया है।

 

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@shaista04444

#डिजिटल इंडिया मे आपका स्वागत है,,
कृपया धैर्य बनाये रखिये -अभी तो पार्टी शुरू हुई है !

सरकार ने साफ कह दिया है आप करोना से मरो या बाढ़ के पानी मे डूब जाओ -आत्मनिर्भर बनो -(आज पांचवा राज्य भी डूबा.

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