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हागिया सोफ़िया को मस्जिद में बदलने के बाद बैतुल मुक़द्दस की आज़ादी की ओर अर्दोगान ने दिया संकेत!

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान ने इस्तांबुल का प्रतीक, हागिया सोफ़िया म्यूज़म को एक बार फिर मस्जिद में बदलने के फ़ैसले की आलोचना करने वालों को आड़े हाथों लिया है।

अर्दोगान का कहना है कि हागिया सोफ़िया को कि जिसे आयासोफ़िया के नाम से भी जाना जाता है, मस्जिद में बदलना हमारा अधिकार है, और जो लोग इस फ़ैसले की आलोचना कर रहे हैं, वह अपने देशों में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की हिफ़ाज़त के बारे में चिंता करें।

शुक्रवार को तुर्की की एक अदालत ने उस याचिका को ख़ारिज कर दिया था, जिसमें इस ऐतिहासिक इमारत को मस्जिद में बदलने की योजना का विरोध किया गया था।

छठी शताब्दी में चर्च के रूप में तामीर हुई इस ऐतिहासिक सुन्दर इमारत को 15वीं शताब्दी में मस्जिद में बदल दिया गया था, जिसे तुर्की के पहले राष्ट्रपति मुस्तफ़ा कमाल अतातुर्क ने 1930 के दशक में संग्राहलय बना दिया था।

यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में शामिल दुनिया की सबसे सुन्दर इमारतों में से एक हागिया सोफ़िया को देखने हर साल करोड़ों लोग इस्तांबुल की यात्रा करते हैं।

तुर्क राष्ट्रपति का कहना थाः जो लोग अपने देशों में इस्लामोफ़ोबिया के ख़िलाफ़ कोई क़दम नहीं उठा रहे हैं, वह तुर्की पर उसके अधिकारों के लिए हमला कर रहे हैं।

उन्होंने कहाः हमने अपने राष्ट्र की आवाज़ को सुना और राष्ट्रहित में यह क़दम उठाया है। इसी के साथ उन्होंने कहा है कि यह मस्जिद पहले की तरह सभी मुसलमानों और ग़ैर-मुसलमानों के लिए खुली रहेगी।

अर्दोगान द्वारा अरबी भाषा में अपने इस फ़ैसले के बचाव में किए गए एक ट्वीट पर काफ़ी हंगामा हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हागिया सोफ़िया का रिवाइवल या पुन प्रवर्तन, अल-अक़्सा मस्जिद की आज़ादी का संकेत है।

ग़ौरतलब है कि अल-अक़्सा मस्जिद मुसलमानों का पहला क़िबला और तीसरा सबसे पवित्र धार्मिक स्थिल है, जो बैतुल मुक़द्दस (येरूशलम) में स्थित है।

इस समय बैतुल मुक़द्दस ज़ायोनियों के क़ब्ज़े में है, जिसकी आज़ादी की ओर अर्दोगान ने संकेत किया है।

अमरीका, यूनान और यूरोपीय संघ ने तुर्की के इस फ़ैसले का विरोध किया है।

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