विशेष

′′तीसरी आँख′′………लेकिन रुकिए एक बड़ी गड़बड़ी है यहाँ………!!

Awakening Consciousness
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इस अराजक दुनिया में, केवल शांति ही ध्यान के माध्यम से मिल सकती है, यह एक सुंदर अनुभव हो सकता है कि आपके आंतरिक बुलावा को खोजने के लिए । हमारे पुराणों में, बहुत सी विभिन्न ध्यान तकनीकें हैं जो आपको आध्यात्मिक जागृति प्राप्त करने में मदद करती हैं, बहुत प्रसिद्ध शंभवी महमूद्रा है जो योगिक और तांत्रिक ग्रंथों में एक अत्यधिक सम्मानित अभ्यास है । इसे आधी खुली आँखों से ध्यान भी कहा जाता है ।

शब्द संस्कृत शब्दों से आता है जिसका अर्थ है ‘खुशी’ और मुद्रा का अर्थ है ‘निशान ‘या’ सील, यह मुख्य रूप से अजना चक्र पर ध्यान केंद्रित करता है जिसे ′′तीसरी आँख′′ भी कहा जाता है । जब आप इस मुद्रा में मास्टर करते हैं, तो कहा जाता है कि कई लोगों को शुरू करने के लिए कहा जाता है लाभ । यह आपके तीसरे नेत्र चक्र को सक्रिय करता है और आप अपने अंतर्ज्ञान और मानसिक अंतर्दृष्टि में टैप कर सकते हैं, जो कई क्षमताओं का द्वार है जैसे कि अन्य लोगों को क्या महसूस करने की क्षमता है । ऐसे ज्ञान से आप सच्चे सहानुभूति बन जाते हैं । इस मुद्रा का नाम शंभवी या पार्वती के नाम पर रखा गया है (a \ इसलिए भगवान शिव की पत्नी दुर्गा के रूप में पहचाना जाता है । शक्ति का प्रतीक, दिव्य ऊर्जा, अस्तित्व को प्रेरित करती शंभवी । मनुष्य में उसकी अभिव्यक्ति इस मुद्रा के माध्यम से सबसे अच्छा एहसास होता है ।


शंभवी मुद्रा क्रिया कई प्राचीन पवित्र ग्रंथों से उत्पन्न होती है: £, विजनाना भैरव तंत्र, हाथप्रदीपिका′′ और मैं, संहिता, 1 ये तीनों ग्रंथ इसी तरह मुद्रा का वर्णन करते हैं और सुझाव देते हैं कि इस मुद्रा का उपयोग करने से अंतर्दृष्टि का एक बड़ा स्तर होगा । । । ।

शक्ति चार पेटाल्ड साइकिक सेंटर (चक्र) में रीढ़ की हड्डी के आधार पर निष्क्रिय है, मुलाधरा को जड़ चक्र के नाम से भी जाना जाता है । अपनी जागृत स्थिति में, यह शंभवी शक्ति की नाली सुशुमना नाडी से गुजरती है । इसमें सूक्ष्म केंद्रों को छेड़ा जाता है-स्वधिष्ठान, मणिपुरा, अनाहाटा, विशुद्ध और अजना – एक के बाद जब तक यह सहस्रारा चक्र में शिव के साथ नहीं मिल जाता, मस्तिष्क गुहा में हजार पंखुड़ कमल ।


इस मुद्रा को करने की कुंजी कोमल है । तांत्रिक शास्त्र सोचंदा तंत्र में लिखा है-′′ एक पंख के रूप में आंखों को छूना, उनके बीच प्रकाश दिल में खुल जाता है और वहां ब्रह्मांड को समाप्त करता है ।′′

जितना आकर्षक लगता है कि यह गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है यदि सही ढंग से अभ्यास नहीं किया जाता है जिसमें सिरदर्द और दृष्टि में समस्याएं शामिल हो सकती हैं । आँखों में ज्यादा तनाव हो तो सिरदर्द देता है लेकिन निगाहें आराम से रखोगे तो सिरदर्द होने से बचाएगा ।

इस मुद्रा का सबसे अच्छा अभ्यास सिद्धसन या पद्मसन में ज्ञान मुद्रा के साथ गुरु के मार्गदर्शन में किया जाता है – घुटनों पर हाथ की मुद्रा, जिसमें अंगूठे की नोक को तर्जनी की नोक से छुआ जाता है । यह लयबद्ध श्वास (प्राणायाम) के साथ और सबसे पहले ध्वनि एयूएम (मनसा) जप के साथ था

यह मुद्रा अल्फा मस्तिष्क लहरों को बढ़ाता है, रचनात्मकता और एकाग्रता को बढ़ाता है । यह अवसाद और अनिद्रा को दूर ले जाता है । आम तौर पर योगी, तांत्रिक और सिद्ध-इस मुद्रा को हठ योग प्रदीपिका में निषेधाज्ञा में गुप्त रखते हैं जो इस मुद्रा को अपार सम्मान के साथ व्यवहार करता है ।

माना जाता है जो इस मुद्रा पर स्वामी या सिद्धि रखता है वह डी आई वी आई एन आई टी (सहमारी / पा) का जीवित अवतार बन जाता है ।

Shamsher Ali Khan
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कोरोना की टेस्टिंग ओर निगेटिव – पॉजिटव दिखाने का सारा खेल डेटा मैनिपुलेशन का है जब जितना चाहिए उतना बढ़ा देते हैं जब जितना चाहिए घटा देते हैं……..

आपको याद होगा कि लगभग डेढ़ महीने पहले दिल्ली के हस्पतालों में कोरोना मरीजो की बुरी हालत महंगे इलाज ओर शवदाहगृह में बढ़ती लाशों के विजुअल मीडिया में जोर शोर से दिखाए जा रहे थे…… दिल्ली में पैनिक की स्थिति थी लेकिन अचानक से गृहमंत्री अमित शाह की एंट्री होती है वह कमान संभालते है ओर एक बिल्कुल नए टेस्ट रैपिड एंटीजन टेस्ट कराने का एलान करते हैं ………दिल्ली में टेस्टिंग बढ़ाई जाती है पहले मरीजो की संख्या तेजी से बढ़ती है लेकिन कुछ ही दिन में 25 हजार रोजाना होने वाली टेस्टिंग को 10 से 12 हजार पर लाया जाता है और स्थिति कंट्रोल में दिखा दी जाती है और उसके बाद सब ठीक होता दिखाई देता है


दिल्ली में केस लगातार कम हो जाते हैं सब वाह वाह करने लगते है ………लेकिन रुकिए एक बड़ी गड़बड़ी है यहाँ………
दरअसल एंटीजन टेस्ट निगेटिव आने पर आरटी-पीसीआर टेस्ट जरूरी होता है लेकिन दिल्ली सरकार ने माना है कि 2.62 लाख में से 0.5% का ही दोबारा टेस्ट हुआ है दिल्ली में 19 जून के बाद रोज जितने टेस्ट हो रहे हैं, उनमें से 60% से ज्यादा एंटीजन टेस्ट हो रहे, ये टेस्ट आरटी-पीसीआर के मुकाबले कम भरोसेमंद है लेकिन इसके बावजूद धड़ाधड़ रैपिड एंटीजन टेस्ट किये गए…. ओर निगेटिव निकलने वालों का RT PCR ही नही किया गया……..


दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को दिल्ली सरकार से पूछा कि जब रैपिड एंटीजन टेस्ट के नतीजे नकारात्मक हैं तो इस टेस्ट को क्यों कराया जा रहा है। दिल्ली के सीरो सर्वे में पता चला है कि 22.86 प्रतिशत से अधिक आबादी कोविड-19 से पीड़ित हुई है।…….पीठ ने कहा दिल्ली सरकार इस स्थिति में रैपिड एंटीजन टेस्ट के साथ कैसे आगे बढ़ सकती है, जबकि इसकी गलत निगेटिव रिपोर्ट आने की दर बहुत अधिक है।……..

अब आप यह भी जान लीजिए कि भारत मे जो कोरोना की बढ़ती हुई टेस्टिंग की संख्या बताई जा रही है वह इसी रैपिड एंटीजन टेस्ट के ही कारण है और खुद गृहमंत्री अमित शाह ने पर्सनल इंटरेस्ट लेकर एक एक राज्य के मुख्यमंत्री की क्लास लगाकर यह बोला है कि रैपिड एंटीजन टेस्ट की संख्या लगातार बढ़ाओ……अगर रैपिड एंटीजन टेस्ट के नतीजे इतने गलत आ रहे हैं कि हाईकोर्ट को बीच में आना पड़ रहा है तो सवाल यह है कि ऐसे गलत टेस्ट करवाए क्यो जा रहे है…….. क्या भारत की मोदी सरकार पर यह दबाव है कि चाहे गलत हो या सही हो आपको रैपिड एंटीजन टेस्ट करवाने ही होंगे ?……………क्योकि ICMR ने पिछले हफ्ते ही मायलैब की स्वदेशी एंटीजन टेस्ट किट को अनुमति दी है….. जब पध्दति ही गलत है तो यह मंजूरी ही क्यो दी जा रही है…….

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