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अरब देशों से आई भारत के लिए बुरी ख़बर!

फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों और लेबनान जैसे देशों में काम करने वाले एशिया और अफ़्रीक़ा के कामगारों की ओर से अपने घरों को भेजी जाने वाली रक़म में अचानक बड़ी गिरावट आ गई है।

अमरीकी मैगज़ीन फ़ारेन पालीसी में आंचल वोहरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि लेबनान के लोगों को यह आदत थी कि जब वह पार्क वग़ैरा जैसी जगहों पर जाएं तो उनका इथोपियाई नौकर उनके कुत्ते की ज़ंजीर पकड़े रहे इसी तरह उनके घरों की सफ़ाई का काम करे। फ़ार्स खाड़ी के अरब देशों के लोग अपने यहां दक्षिणी एशियाई देशों के कामगारों को रखते हैं जो बहुत मामूली तनख़्वाह पर ड्राइवर के रूप में काम करते हैं या घरों की सफ़ाई करते हैं और दूसरे बहुत सारे काम अंजाम देते हैं।

कोरोना वायरस की वजह से यह आर्थिक माडल ध्वस्त हो गया है और लंबे लंबे लाक डाउन के कारण पश्चिमी एशिया के देशों में करोड़ों लोग बेरोज़गार हो गए हैं और उन्हें विदाउट पे छुट्टयों पर भेज दिया गया है। बहुत से कामगारों को अपने देश लौटना पड़ा है जहां पहले से ही ग़रीबी और भुखमरी के हालात हैं।

इस स्थिति का बहुत बुरा असर अरब देशों पर भी पड़ेगा और कामगारों के अपने देशों के हालात भी ख़राब होंगे। यह कामगार कड़ी कमाई करके जो पैसा अपने घरों को भेजते थे उससे उनके रिश्तेदार कोई कारोबार कर लेते थे, उनके बच्चों की फ़ीस जमा हो जाती थी या मां बाप के लिए घर बनवा लेते थे। अब यह लोग बेरोज़गार हो जाएंगे तो उनके ज़रिए कमाए गए पैसे से जो दूसरे बहुत से धंधे चलते थे अब नहीं चल पाएंगे।

अफ़्रीक़ी देशों की महिलाएं जो अरब देशों में घरों में काम करती थीं उनकी हालत ज़्यादा ख़राब है। बैरूत में एक घर में साफ़ सफ़ाई और खाना पकाने का काम करने वाली 25 साल की युवती का कहना है कि उसके मालिक ने उसे इथोपियाई दूतावास के बाहर ले जाकर छोड़ दिया और उसे तनख़्वाह और पासपोर्ट भी नहीं दिया। महिला का कहना है कि उसकी पहिचान के दूसरे कई कामगारों के साथ भी यही हुआ है।

इतनी बुरी दशा से गुज़रने वाली महिला ने इसके बावजूद उन लोगों का नाम नहीं बताया जिनके यहां वह काम करती थी ताकि बाद में काम पर लौटने की संभावना बनी रहे।

एमीरेट्स एयरलाइन ने हज़ारों की संख्या में लोगों को निकालने का फ़ैसला किया है। दुबई में रहने वाले एक भारतीय का कहना है कि वह एमीरेट्स एयरलाइन में काम करता था मगर अब हालत यह है कि घर का किराया नहीं अदा कर पा रहा है।

भारत को इस स्थिति के कारण गहरी चिंता है क्योंकि फ़ार्स खाड़ी के देशों में 85 लाख से अधिक भारतीय काम करते हैं इनमें 5 लाख कामगार तो केवल केरल राज्य वापस जाने वाले हैं।

2014 से 2018 के बीच केरल के लोगों ने अपनी कमाई से जो पैसा अपने राज्य में भेजा वह स्थानीय जीडीपी का 35 प्रतिशत था। अब अगर यही कामगार अपने घरों को लौट गए तो जो स्थिति उत्पन्न होगी उसका अनुमान लगाना कठिन नहीं है।

केरल में डेवलपमेंट स्टडी सेंटर से जुड़े ईरोदाया राजन ने कहा कि मेरे विचार में कम से कम 15 लाख भारतीय कामगार वापस आएंगे। मगर राजनेताओं का ध्यान इस संकट पर है ही नहीं।

आक्सफ़ोर्ड इकानामिक्स में वरिष्ठ शोधकर्ता स्कट लिवरमर का कहना है कि अरब देशों में यह सोच बनी है कि प्रवासी मज़दूरों को निकाल बाहर करने से उनकी बेरोज़गारी की समस्या कम होगी मगर जब यह कामगार चले जाएंगे तो अरब देशों में ज़मीनों की क़ीमतों और किरायों में भी भारी गिरावट आएगी।

अरब देशों पर ज़ोर दिया जा रहा है कि वह विदेशी कामगारों को बाहर निकालने का विचार मन से निकाल दें और कोई उचित समाधान सोचें।

स्रोतः फ़ारेन पालीसी

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