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कर्नाटक में स्कूली पाठ्यक्रम से इस्लाम और टीपू सुल्तान से जुड़े चैप्टर हटाने की साज़िश!

कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी की सरकार कोविड-19 माहमारी के बहाने पहली से 10वीं क्लास के सिलेबस से इस्लाम, ईसाई धर्म और टीपू सुल्तान से जुड़े चैप्टर हटाने की साज़िश रच रही है।

राज्य के विपक्षी दलों का आरोप है कि बीजेपी सरकार अपने दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा प्रणाली से खिलवाड़ कर रही है।

हालांकि कड़े विरोध और विवाद बढ़ने के बाद, राज्य सरकार ने अपने इस विवादास्पद प्रस्ताव पर फ़िलहाल रोक लगा दी है।

बीजेपी सरकार ने कोविड-19 के दौरान, छात्रों पर पढ़ाई का बोझ कम करने के बहाने पहली से 10वीं क्लास की पुस्तकों से इस्लाम और ईसाई धर्मों तथा टीपू सुल्तान और उनके पिता हैदर अली से जुड़े चैप्टर्स को हटाने का प्रस्ताव रखा था।

इससे पहले केन्द्र में प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी सरकार कोविड-19 महामारी को शिक्षा में फेरबदल के लिए बहाने के रूप में इस्तेमाल कर चुकी है और नवीं से 12वीं क्लास तक के सिलेबस की किताबों से धर्मनिरपेक्षता, समाज सुधार तथा इस्लामी इतिहास से जुड़े चैप्टरों को हटा चुकी है।

टीपू सुल्तान और उनके पिता हैदर अली भारत और विशेष रूप से दक्षिण भारत में धर्मनिरपेक्षता व ब्रिटिश साम्राज्य के ख़िलाफ़ कड़े संघर्ष का प्रतीक माने जाते हैं, इसके बावजूद दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादियों को वह एक आंख नहीं भाते।

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, राज्य सरकार के इस क़दम की व्यापक आलोचना के बाद, सार्वजनिक निर्देश विभाग ने कर्नाटक के प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री एस. सुरेश कुमार के निर्देशों पर एक नई अधिसूचना जारी की।

कर्नाटक में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के प्रमुख और पूर्व मंत्री डीके शिवकुमार ने कर्नाटक में बीजेपी सरकार पर अपने दक्षिणपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने और टीपू सुल्तान और हैदर अली जैसी ऐतिहासिक हस्तियों से नफ़रत करने का आरोप लगाया था।

उन्होंने कहा, टीपू सुल्तान, हैदर अली, पैगंबर मोहम्मद या यहां तक कि संविधान को मानना या नहीं मानना यह उनका अपना फ़ैसला है, लेकिन वे हमारे इतिहास का निर्माण नहीं कर सकते।

हालांकि, बीजेपी ने अपनी सरकार के इस क़दम का बचाव करते हुए दावा किया है कि इन अध्यायों को हटाने के पीछे उसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है।

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