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कितने अहम मोहरे को अपना दुशमन बना बैठे क्राउन प्रिंस बिन सलमान : रिपोर्ट

फ़ार्स खाड़ी के इलाक़े वाला ख़ास चेहरा, बहुत थोड़ा सा हिजाब, पश्चिमी पोशाक, यह हैं लैला अबुल जदायल जो अमरीका के बोस्टन शहर में मस्क की संस्था की ओर से आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में अपनी ख़ास मुसकान के साथ हर जगह नज़र आती हैं।

लैला अबुल जदायल के इर्द गिर्द सऊदी मीडिया की भी भीड़ रहती है क्योंकि उन्हें विदेशों विशेष रूप से अमरीका में सऊदी अरब की छवि सुधारने वाली माडर्न किशोरी के रूप में देखा जाता है। यह 2016-2017 की बात है।


लैला अबुल जदायल

इस समय एक बार फिर लैला का नाम सुर्खियों में है लेकिन इस बार वह पढ़ी लिखी माडर्न सऊदी किशोरी नहीं बल्कि बिन सलमान की ख़तरनाक जासूस के रूप में चर्चा में हैं। अब यह बहस छिड़ गई है कि लैला ने सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के निकट मोस्ट वांटेड इंटलीजेन्स अधिकारी सअद अलजब्री की जासूसी करने और अमरीका में उनके ख़ुफ़िया ठिकाने का पता लगाने के लिए तैयार किए गए मंसूबे पर काम किया। लैला अबुल जदायल ने इस मंसूबे के तहत अलजब्री के बेटे ख़ालिद से दोस्ती गांठी जो मस्क के कार्यक्रमों में सऊदी युवा के रूप में भाग लिया करते थे। यह सब कुछ अकतूबर 2018 में अलनिम्र डेथ स्क्वाड का आप्रेशन शुरू होने से पहले की तैयारी थी। इस स्क्वाड का काम पश्चिमी देशों में बिन सलमान के विरोधी सऊदी अधिकारियों का सफ़ाया करना था।

बिन सलमान ने अलजब्री को मरवाने की कई बार कोशिश की जिसका नतीजा यह हुआ कि कैनेडा में शरण लेने के बाद अलजब्री ने बिन सलमान के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा कर दिया और साथ ही अपनी याचिका में 13 अन्य लोगों के नाम भी शामिल किए जिनमें लैला अबुल जदायल का नाम भी है।


अलजब्री

सऊदी इंटेलीजेन्स कर्मचारी सअद अलजब्री का सितारा 1999 में उस समय जगमगाने लगा जब स्काटलैंड के एडिनबरा विश्वविद्यालय से आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेन्स में डाक्ट्रेट करने वाले 61 साल के अलजब्री को महत्वपूर्ण ओहदे मिलने लगे। वह कभी राज्य मंत्री, कभी गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अफ़सर, कभी सुरक्षा मामलों की समिति के सदस्य के रूप में नज़र आते थे।

2017 में क्राउन प्रिंस के पद से हटाए जाने वाले मुहम्मद बिन नाएफ़ के बेहद क़रीबी लोगों में अलजब्री का नाम आने लगा और चूंकि अलक़ायदा से कामयाब लड़ाई में बिन नाएफ़ ने अपनी ख़ास पहिचान बनाई थी और सीआईए सहित पश्चिमी देशों की इंटेलीजेन्स एजेंसियां उनका लोहा मानने लगीं थीं इसलिए अलक़ायदा के आतंकियों की घर वापसी के कार्यक्रम में बहुत कामयाब रोल निभाने वाले अलजब्री ने भी बिन नाएफ़ के दाहिने हाथ के रूप में ख़ुद को पहचनवाया।

यहां तक तो अलजब्री के उत्थान की कहानी चली लेकिन 2015 में अचानक एक बड़ा मोड़ आ गया जब किंग सलमान को सऊदी अरब का सिंहासन मिल गया और उनके बेटे मुहम्मद बिन सलमान ने तेज़ी से सबको किनारे हटाते हुए प्रभावशाली पदों को हथियाना शुरू कर दिया। बिन सलमान ने क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन नाएफ़ को 2017 में इस पद से हटाकर उस पर अपने पंजे गाड़ दिए लेकिन इससे ठीक पहले बिन नाएफ़ के क़रीबी समझे जाने वाले अलजब्री को अपने इर्द गिर्द ख़तरा मंडराता दिखाई देने लगा क्योंकि बिन सलमान के बहुत क़रीबी समझे जाने वाले अब्दुल अज़ीज़ अलहुवैरीनी की नज़रें अलजब्री को हासिल अधिकारों पर थी। अलजब्री पर मुस्लिम ब्रदरहुड वाला नज़रिया रखने का आरोप लगा जो सऊदी अरब में बहुत बड़ा जुर्म है और शाही शासन व्यवस्था के लिए गंभीर ख़तरे के रूप में देखा जाता है। अलजब्री ने यमन युद्ध की बिन सलमान की योजना का भी विरोध किया था और कहा था कि इस पर बहुत ख़र्च आएगा जबकि इस जंग का नतीजा भी मालूम नहीं कि क्या निकलेगा। अलजब्री को पद से हटाने की तैयारी ख़ामोशी से चल रही थी इस बीच बिन सलमान को यह बहाना मिल गया कि अलजब्री ने वाशिंग्टन के दौरे में उस समय के सीआईए प्रमुख जान ब्रेनन से मुलाक़ात की और इस मुलाक़ात के बारे में पहले से बिन सलमान से अनुमति नहीं ली। इस मुलाक़ात में कथित रूप से अलजब्री ने ब्रेनन को यह बताया कि सीरिया की लड़ाई में हस्तक्षेप के लिए बिन सलमान रूस को तैयार कर रहे हैं यानी अमरीका का विकल्प तैयार करना चाहते हैं। इस पूरे प्रकरण की जानकारी रूसी इंटेलीजेन्स से बिन समलान को मिल गई जिसके बाद बिन सलमान ने उन्हें पद से हटा दिया। पद से हटाए जाने के बाद अलजब्री ने भांप लिया कि बिन नाएफ़ के बहुत क़रीब होने की वजह से वह बहुत ख़तरे में हैं इसलिए उन्होंने फिर बड़ी ख़ामोशी से अमरीका की फ़्लाइट पकड़ ली। अमरीका पहुंचकर इंटेलीजेन्स संस्थाओं में अपनी पैठ के सहारे अलजब्री ने यह पता लगा लिया कि वह ट्रम्प प्रशासन में अमरीका के भीतर सुरक्षित नहीं हैं क्योंकि इस प्रशासन से बिन सलमान को भरपूर समर्थन मिल रहा है इसलिए वह फ़ौरन कैनेडा रवाना हो गए और उनके परिवार के अधिकतर सदस्य भी कैनेडा जा पहुंचे।

अलजब्री की चतुराई उस समय साबित हुई जब यह हक़ीक़त सामने आई कि बिन नाएफ़ को क्राउन प्रिंस के पद से हटाने से ठीक एक महीना पहले अलजब्री सऊदी अरब से अमरीका चले गए थे। मगर बिन सलमान अलजब्री को भूले नहीं क्योंकि उन्हें पता है कि अलजब्री के पास बड़े महत्वपूर्ण राज़ हैं।

कहा जाता है कि अलजब्री को सऊदी अरब के भीतर गुप्त रूप से क़त्ल किए जाने वाले महत्वपूर्ण लोगों की क़ब्रें मालूम हैं। बिन सलमान ने उन्हें कई बार जाल में फंसाने की कोशिश की मगर कामयाबी नहीं मिली। अब उन पर अरबों डालर के आर्थिक भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है। दावा किया गया है कि जब आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई के दौरान वह मंत्रीय कोष के अधिकारी थे तो उस दौरान उन्होंने 11 अरब डालर की रक़म मनमानी रूप से ख़र्च कर डाली।

सऊदी अरब ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर इंटरपोल से अलजब्री को पकड़वाने की कोशिश की लेकिन इंटरपोल ने कहा कि यह गिरफ़तारी राजनैतिक उद्देश्यों के तहत करवाई जा रही है इसलिए वह इसमें सहयोग नहीं करेगी।

बिन सलमान के क्राउन प्रिंस बनने की प्रक्रिया की ओर एक बार फिर वापस आते हैं। बिन सलमान ने यह ओहदा संभाला और बिन नाएफ़ को नज़रबंद कर दिया तो तत्काल अलजब्री से संपर्क करवाया और उन्हें बहुत बड़े पद की पेशकश की। अलजब्री अपने पूरे परिवार को सऊदी अरब से बाहर निकाल चुके थे केवल उनका एक बेटा उमर और एक बेटी सारा सऊदी अरब में बचे रह गए थे। जब अलजब्री ने उन दोनों को वहां से बाहर निकालने की कोशिश की तो पता चला कि सऊदी प्रशासन ने उनकी यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है। यहीं से अलजब्री का यक़ीन और भी पुख्ता हो गया कि बिन सलमान बड़े ओहदे की लालच देकर दरअस्ल उनकी गरदन उड़ा देने का इरादा रखते हैं।


उमर-सारा

बाद में बिन सलमान ने अलजब्री की बेटी और बेटे को गिरफ़तार करवा लिया और उनके घर पर छापा मार कर जो कुछ था उसे ज़ब्त करवा लिया।

अलजब्री ने पांच महीने तक ख़ामोशी से कोशिश की कि उमर और सारा किसी तरह रिहा हो जाएं और सऊदी अरब से बाहर निकल जाएं मगर जब मायूसी के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा तो अलजब्री ने वाशिंग्टन की अदालत में बिन सलमान के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा ठोंक दिया जहां अदालत ने बिन सलमान के नाम नोटिस भी जारी कर दिया है। अलजब्री ने आरोप लगाया है कि ख़ाशुक़जी की हत्या से ठीक दो सप्ताह पहले उनकी हत्या की भी कोशिश की गई थी मगर डेथ स्क्वाड के लोग कैनेडा के एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकल सके इसलिए यह योजना फ़ेल हो गई।

इस समय अलजब्री ने दो टारगेट सामने रखे हैं एक तो अमरीकी इंटेलीजेन्स से बिन सलमान के संबंधों को ख़राब करना और दूसरे बिन सलमान की असली छवि सामने लाना है जो सत्ता के लोभी बेहद ख़ूंख़ार राजकुमार की छवि है।

अलजब्री को तत्काल कुछ कामयाबी भी मिली है क्योंकि उनके द्वारा दायर किए गए मुक़द्दमे के आधार पर अदालत ने बिन सलमान और 13 अन्य लोगों को समन जारी कर दिया है और 21 दिन के भीतर अलजब्री के आरोपों पर सफ़ाई देने को कहा है। चूंकि अमरीका में बिन सलमान की बहुत संपत्ति और बहुत सारे हित हैं इसलिए उनके लिए कठिन हालात पैदा हो सकते हैं।

स्रोतः अलजज़ीरा

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