दुनिया

नेतनयाहू का राजनीतिक कैरियर ख़त्म होने वाला है : रिपोर्ट

इस्राईल की संसद में एक ऐसे विधेयक पर मतदान होने वाला है, जिसके पारित होने की स्थिति में ज़ायोनी प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू के सरकार बनाने पर प्रतिबंध लग सकता है।

अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो नेतनयाहू के राजनीतिक कैरियर पर क़ानूनी रूप में रोक लग सकती है, जिन्हें अदालत में धोखाधड़ी और रिश्वत के आरोपों का सामना है।

विपक्षी गठबंधन येश एटिड-टेलेम के नेता येर लैपिड का कहना है कि हम ऐसा विधेयक पेश करने जा रहे हैं, जिसके बाद किसी भी दोषी व्यक्ति के प्रधान मंत्री बनने पर रोक लग जाएगी।

नवंबर में नेतनयाहू को कि जो 2009 के बाद से सत्ता में हैं, अदालत में धोखाधड़ी, रिश्वतख़ोरी और विश्वासघात के लिए आरोपित किया गया था, उन पर आरोप हैं कि उन्होंने व्यवसायियों से मंहगे उपहार स्वीकार किए और अपनी पार्टी के कवरेज के लिए मीडिया मालिकों के साथ सौदेबाज़ी की और उन्हें रिश्वत दी।

बुधवार को इस विधेयक पर मतदान होगा। ऐसी संभावना है कि बेनी गैंट्ज़ कि जिनकी ब्लू एंड व्हाइट पार्टी ने अप्रैल में नेतनयाहू की लिकुड पार्टी के साथ गठबंधन की सरकार बनाई थी, इस विधेयक के पक्ष में मतदान कर सकते हैं।

अमरीकी न्यूज़ वेबसाइट का ख़ुलासा, सऊदी अरब ने बेरूत धमाके को हिज़्बुल्लाह से जोड़ने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया था

अमरीका की एक न्यूज़ वेबसाइट ने ख़ुलासा किया है कि किस तरह सऊदी अरब ने बेरूत के विनाशकारी भीषण धमाके को हिज़्बुल्लाह से जोड़ने के लिए मीडिया और सोशल मीडिया पर व्यापक अभियान चलाया था।

डेली बीस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक़, मंगलवार को बेरूत में व्यापक तबाही मचाने वाले धमाके के बाद, सऊदी अरब ने हिज़्बुल्लाह को बदमान करने का भरपूर प्रयास किया।

ग़ौरतलब है कि बेरूत बंदरगाह के गोदामों में पिछले 6 साल से रखे 2,750 टन अमोनियम नाइट्रेट में धमाका हुआ था, जिसमें कम से कम 158 लोगों की मौत हो गई थी और 6,000 से भी ज़्यादा लोग ज़ख़्मी हुए थे।

इस भयानक त्रासदी के तुरंत बाद, सऊदी अरब से जुड़े प्रभावशाली ट्वीटर हैंडल से इस धमाके में एक बड़ी साज़िश का दबाकर प्रचार किया जाने लगा और हैशटैग ” Hezbollah’s Ammonia Burns Beirut” ट्रैंड करने लगा।

वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक़, धमाके के सिर्फ़ 48 घंटों के बाद, इस अभियान के तहत 9,870 अकाउंट से झूठ फैलाया गया।

अमरीकी वेबसाइट ने दोहा स्थित हमद बिन ख़लीफ़ा विश्वविद्यालय में मध्य पूर्व अध्ययन के सहायक प्रोफ़ेसर मार्क ओवेन जोन्स के हवाले से लिखाः यह झूठ सऊदी से फैलाया गया, जिसका मक़सद हिज़्बुल्लाह के ख़िलाफ़ माहौल तैयार करना था।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर बिना निंयत्रण के वे नंगा नाच, नाच रहे हैं, उन्होंने एक इको सिस्टम तैयार कर लिया है।

डेली बीस्ट का कहना है कि इस प्रोपैगंडे का मक़सद, देश की जनता को यह समझाना है कि हिज़्बुल्लाह एक आतंकवादी संगठन है।

ग़ौरतलब है कि दक्षिण लेबनान को इस्राईल के क़ब्ज़े से आज़ाद कराने वाले इस इस्लामी आंदोलन ने सन् 2000 के बाद ख़ुद को लेबनान के रक्षात्मक ढांचे का अभिन्न अंग बना लिया है और यह इस्राईल के हमलों के ख़िलाफ़ पहाड़ बनकर खड़ा हुआ है।

हिज़्बुल्लाह लेबनानी संसद और सरकार का हिस्सा है और उसने बेरूत धमाके के बाद, राष्ट्रीय एकता की सराहना की और इस पर बल दिया

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