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ये आत्मनिर्भर काल नही, ”आत्महत्या काल’’ है : देश के अंदर अराजकता की स्थिति पैदा होती जा रही है : रिपोर्ट

कोरोना वायरस के आने के बाद दुनियां भर में लोगों के जीवन पर नकारत्मक प्रभाव पड़े हैं, भारत में इसका असर ज़ियादा देखने को मिल रहा है, यहाँ अबतक 16लाख से अधिक सामने आ चुके हैं और 35 हज़ार से ज़ियादा की मौत हो चुकी है, भारत की अर्थव्यवस्था धराशायी हो चुकी है, रिपोर्ट्स के मुताबिक तक़रीबन 15 करोड़ लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं और दस लाख की और जाने वाली हैं, देश के अंदर अराजकता की इस्थिति पैदा होती जा रही है, लोगों में गुस्सा और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ी है, डिप्रेशन की वजह से लोगों में बर्दास्त की ताकात जवाब दे चुकी है, ज़रा ज़रा बात पर झगडे, फौजदारी, हत्याएं हो रही हैं, काम धंधे न होने की वजह लोग अपराध की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं, ऐसे में आमहत्या में बढ़ोतरी देखी जा सकती हैं

 

43 फीसदी भारतीय अवसादग्रस्त हैं

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के नियंत्रण के लिए लगाए गए लॉकडाउन से भारतीयों में तनाव बढ़ा है। यह दावा एक अध्ययन में किया गया है। इस अध्ययन के मुताबिक करीब 43 फीसदी भारतीय अवसाद के शिकार हुए हैं। स्मार्ट तकनीक से लैस रक्षात्मक स्वास्थ्य देखभाल मंच जीओक्यूआईआई द्वारा करीब 10 हजार भारतीयों पर यह सर्वेक्षण किया गया था। इसमें इस बात पर अध्ययन किया गया कि वे कोरोना वायरस से उत्पन्न परिस्थितियों का किस तरह से सामना कर रहे हैं।

अध्ययन में शामिल 26 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि वे हल्के अवसाद से ग्रस्त हैं जबकि 11 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि वे काफी हद तक अवसाद से ग्रस्त हैं। वहीं छह फीसदी प्रतिभागियों ने अवसाद के गंभीर लक्षण होने की बात कही। अध्ययन में कहा गया, ‘गत पांच महीने बहुत अनपेक्षित रहे हैं। इस स्थिति का लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ा है। कई चरणों के लॉकडाउन, बेरोजगारी, स्वास्थ्य संबंधी भय और अनिश्चित वातावरण से लोगों में तनाव उच्चतम स्तर पर है।’

अध्ययन में कहा गया, ‘बहुत अधिक तनाव अवसाद का रूप ले लेता है। मौजूदा लॉकडाउन और जीवनशैली में आए अचानक बदलाव की वजह से हमने देखा कि 43 फीसदी भारतीय अवसादग्रस्त हैं और इससे निपटने का प्रयास कर रहे हैं।’ सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों में अवसाद के स्तर को आंकने के लिए अध्ययनकर्ताओं ने मरीज द्वारा स्वयं भरी जाने वाली प्रश्नावली या पीएचक्यू-9 (मनोरोग का प्राथमिक देखभाल मूल्यांकन फार्म) का सहारा लिया।

अध्ययन में जीवन के नौ पहलुओं पर किया गया गौर
अध्ययन में प्रतिभागियों के जीवन के नौ पहलुओं पर भी गौर किया गया, उदाहरण के लिए दिनचर्या, भूख, सोने का समय, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और उनमें मौजूद ऊर्जा। जीओक्यूआईआई के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विशाल गोंदल ने कहा, ‘हमारा अध्ययन इस बात की ओर संकेत करता है कि कोरोना वायरस का प्रसार और उसकी वजह से लागू लॉकडाउन से देश में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से सामना करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है।’

रोज एक बार व्यायाम से सुधरता है मानसिक स्वास्थ्य
उन्होंने कहा, ‘बढ़ती अनिश्चितता उच्च तनाव सूचकांक का आधार है जिसे संतुलित भोजन, दिनचर्या में बदलाव, उचित नींद लेकर नियंत्रित किया जा सकता है।’ अध्ययन के मुताबिक जिन लोगों ने अवसादग्रस्त होने की शिकायत की उन्होंने बताया कि उन्हें काम करने में रुचि नहीं होती। वे नाउम्मीद हो चुके हैं और बेतरतीब नींद के शिकार हैं, उन्हें थकान महसूस हो रही है। अध्ययन में सलाह दी गई है कि रोजाना एक बार व्यायाम करने से मानसिक स्वास्थ्य सुधारने में मदद मिलती है।

12 फीसदी ने कहा, काम करने में नहीं आता आनंद
अध्ययन के मुताबिक, ’59 फीसदी भारतीयों ने कहा कि इन दिनों उन्हें काम करने में बहुत कम आनंद आता है। इनमें से 38 फीसदी लोगों में यह भावना कुछ दिनों तक रही जबकि नौ फीसदी ने कहा कि वे आधे से अधिक दिनों तक इस भावना से ग्रस्त रहे। वहीं करीब 12 फीसदी ने कहा कि हर रोज उन्हें ऐसा महसूस होता है।’ अध्ययन में शामिल 57 फीसदी प्रतिभागियों ने शिकायत की कि गत सप्ताह से कुछ दिन से वे थका हुआ या ऊर्जा विहीन महसूस कर रहे हैं।

Wg Cdr Anuma Acharya (Retd)
@AnumaVidisha

कहाँ कहाँ से खोद कर महापुरुष ढूँढ उनके दिवस और जयंती मनाने वाली सरकार के नेता भूल गये हैं कि आज असहयोग आंदोलन को 100 साल पूरे हुए . 1अगस्त 1920 को स्वतंत्रता के लिए पहला बड़ा आंदोलन चालू हुआ.लेकिन कहीं जिक्र नही? या फिर इसलिये, क्योंकि RSS के लोगों ने भाग नहीं लिया #असहयोग_आंदोलन

Wg Cdr Anuma Acharya (Retd)
@AnumaVidisha

मृत्यु सार्वभौमिक सत्य है. एक समय लगता था कि कोई अजेय है, अमर भी और सर्वशक्तिमान भी. मृत्यु फिर भी अवश्यम्भावी है.
ओम् शांति 🕉

Brajesh Misra
@brajeshlive

वक्त से बड़ा ताकतवर कोई नहीं। सत्ता जिसकी मुट्ठी में थी. कॉर्पोरेट-बॉलीवुड की जिसके यहां लाइन लगती थी, वो नाम अमर सिंह था। अपने वक्त में वो बेहद ताकतवर थे। समय बदला, दूर देश में उनकी गुमनाम मौत हुई। न जाने कितने राज, उनके सीने में दफन थे। वो दोस्त और दुश्मन, दोनों बहुत अच्छे थे।

Amit Shah
@AmitShah
मरण और स्मरण में आधे अक्षर का अंतर है, लेकिन यह आधा ‘स’ जोड़ने के लिए पूरा जीवन देश, संस्कृति, स्वधर्म और स्वदेश के लिए समर्पित कर सिद्धांतों पर चलना पड़ता है।

ये तिलक जी का बहूआयामी व्यक्तित्व ही है जिसके कारण हम उनके विचारों, जीवन व संघर्षों का सदियों तक स्मरण करते रहेंगे।

मीडिया आलोचक
@0786Ha
का भी संज्ञान लेगा? आत्महत्या करने के पीछे के कारणों का पता लगाएगा? नहीं लेगा, क्योंकि प्रिया जुनेजा सुशांत सिंह राजपूत नहीं है
उससे टीआरपी नहीं मिलेगी। प्रिया जुनेजा के बहाने नामचीन हस्तियो को कठघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता।टीआरपी खोर गोदी मीडिया को इसकी परवाह नहीं है कि कितने

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मीडिया आलोचक
@0786Ha
पत्रकार इस वक्त नौकरी जाने की वजह से डिप्रेशन में चले गए हैं
न जाने कितने ही पत्रकार वही करने की सोच रहे होंगे, जो प्रिया जुनेजा न किया। पत्रकार ही क्यों? इस कोरोना काल में करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर संकट आया है। बहुत लोग अर्श से फर्श पर आ गए? लेकिन गोदी मीडिया कहां बिजी है?

मीडिया आलोचक
@0786Ha

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ये‘आत्मनिर्भर काल’नही,आत्महत्या काल’ है इस तस्वीर को देखिए।हंसती-खिलखिलाती ये प्रिया जुनेजा है।न्यूज एंकर थी।कहा जा रहा है कि नौकरी जाने की वजह से कथित रूप से आत्महत्या कर ली है
सुशांत राजपूत की आत्महत्या पर दिन रात आंसू बहाने वाला गोदी मीडिया क्या अपनी इस एंकर की आत्महत्या

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