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सेक्स परफॉर्मेंस में लाए तूफ़ान

प्रतीकात्मक तस्वीरें

जब भी कपल्स की बात की जाती है तो जेहन में महिला और पुरुष का ख्याल ही आता है। मगर इसके समानांतर एक और दुनिया भी है जो समाज का हिस्सा है, पर कुछ लोग उन्हें स्वीकार करने से कतराते हैं।

जब दो लड़कियां एक दूसरे को पार्टनर के तौर पर चुनती हैं तब वो लेस्बियन कपल्स कहलाती हैं।

विदेशों के आलावा भारत में भी कई लेस्बियन कपल्स शादी करके साथ रह रहे हैं और सामान्य जीवन गुजार रहे हैं। हाल ही में एक अध्ययन में ये बात सामने आयी है कि शारीरिक संबंध बनाने के दौरान ऑर्गेज्म पाने के मामले में लेस्बियन महिलाएं उन महिलाओं से आगे हैं जिनके साथी पुरुष हैं।

क्या कहती है ये स्टडी
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बता दें कि इस स्टडी में 21 से 65 उम्र के 6500 पुरुषों और महिलाओं को शामिल किया गया था। अमेरिका के इंडियाना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक सामान्य तौर पर जब पुरुष अपने परिचित पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध बनाते हैं तो औसतन 85 प्रतिशत चरमोत्कर्ष को प्राप्त कर लेते हैं। वहीं महिलाओं में इसका प्रतिशत 63 है।

लेस्बियन महिलाओं की बात करें तो सेक्स के दौरान 75 फीसदी पार्टनर्स को ओर्गेज्म मिलता है। स्ट्रेट रिलेशनशिप वाली महिलाएं 62 फीसदी, जबकि पुरुष और महिला दोनों से संबंध बनाने वाली (बाईसेक्सुअल) महिलाएं 58 फीसदी चरमोत्कर्ष की प्राप्ति करती हैं।


लेस्बियन महिलाओं में ओर्गेज्म का प्रतिशत अधिक क्यों?

इसके पीछे एक बहुत बड़ा तर्क ये दिया जा रहा है कि लेस्बियन महिलाएं शरीर के उन हिस्सों के बारे में भली भांति जानती हैं जिनसे महिलाएं उत्तेजित हो जाती हैं। यही वजह है कि वो अपनी महिला पार्टनर को ओर्गेज्म दिलाने में ज्यादा सफल हैं।

ये टिप्स आपके रिलेशनशिप में आ सकते हैं काम

हर समय आपकी इच्छा ही पूरी हो ये जरुरी नहीं है। कई बार आपको पार्टनर कि ख़ुशी का ध्यान रखना भी जरुरी है। इससे रिलेशनशिप मजबूत होता है। इंटिमेट रिलेशनशिप बनाते समय आपको अपने साथी की इच्छा को भी महत्ता देनी चाहिए। चाहे आप लेस्बियन पार्टनर हैं या स्ट्रेट, आपको एक दूसरे की संस्कृति और परम्परा का सम्मान करना चाहिए। पार्टनर के साथ काम में मदद कराएं। उन्हें हग करें, उनका हाथ पकड़ें, ये सब एहसास रिश्तों को सुखद बनाते हैं। यदि रिलेशनशिप में पार्टनर खुश नहीं है तो उस से बात करें और उसकी समस्या को समझने की कोशिश करें। अपने पार्टनर को कभी भी हीन भावना से ग्रसित न होने दें।

वर्जिनिटी की गारंटी

शादी विवाह के लिए दोस्ती रिश्तेदारी में अच्छा रिश्ता ढूंढने के अलावा लोग मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स की भी मदद लेते हैं। वहीं अब मैट्रिमोनियल वेबसाइट्स इसे और ज्यादा फायदेमंद बिजनेस बनाने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रही है। एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट ने उस वक्त सुर्खियां बटोरी जब उसने अपनी साइट पर दावा किया कि यहां आपको वर्जिन लड़के और लड़कियों के रिश्ते मिलेंगे। इसके बाद से इस तरह के सवाल भी खड़े होने लगे हैं कि जिस रिश्ते की नींव प्यार और भरोसे पर रखी जाती है, वहां क्या अब भी वर्जिनिटी का आधार मायने रखता है।

 

महशूर मैट्रिमोनियल वेबसाइट की नकल
वर्जिन रिश्ते मुहैया कराने वाला ये विज्ञापन Shadi डॉट कॉम नाम की वेबसाइट पर सामने आया है। आपको बता दें कि ये मशहूर Shaadi डॉट कॉम की वेबसाइट से अलग है। इन दोनों के नाम में सिर्फ एक अक्षर ‘a’ का फर्क है। इस तरफ जब लोगों की नजर पड़ी और साइट से इस बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की गयी तब उन्होंने इसकी जिम्मेदारी मार्केटिंग टीम के ऊपर डाल दी और अब वो अपनी साइट से भी ये सेक्शन हटा चुके हैं।

 

वर्जिनिटी पर हंगामा क्यों आमतौर पर वर्जिनिटी का रूल लड़कियों के लिए रखा जाता है। किसी लड़की के वर्जिन होने का मतलब है कि उसने अभी तक शारीरिक संबंध नहीं बनाया है। उसका कौमार्य सुरक्षित है। आज भी कई लोग लड़की की वर्जिनटी को उसकी पवित्रता से जोड़ कर देखते हैं। ये भी एक बड़ी वजह है कि मैट्रीमोनियल साइट ने वर्जिनिटी को एक श्रेणी के तौर पर जोड़ दिया ताकि लोग उनके प्लेटफॉर्म पर रिश्ते ढूंढने के लिए आएं।

वर्जिनिटी चेक करने के लिए रिवाज भारत के कई ऐसे इलाके हैं
जहां शादी के बाद लड़की की वर्जिनिटी जांचने के नाम पर अलग अलग रीति-रिवाज बनाए गए हैं। उदाहरण के लिए शादी के बाद दूल्हा दुल्हन की पहली रात के लिए उनके बिस्तर पर सफेद रंग की चादर बिछाई जाती है। इससे अगले दिन यह चेक किया जा सकता है कि दुल्हन वर्जिन है या नहीं। अगर चादर पर ब्लीडिंग के निशान न हो तो लड़की के कैरेक्टर पर शक किया जाता है और कई बार रिश्ता टूटने की कगार पर भी पहुंच जाता है।

 

फेक वर्जिनिटी के नाम पर चल रहा बाजार
ऐसा कहीं प्रमाणित नहीं हुआ है कि शारीरिक संबंध के दौरान खून न आने से लड़की वर्जिन नहीं थी। मगर समाज में इसे लेकर इतना ज्यादा हाइप बना दिया गया है कि अब लड़कियां शादी के बाद अपने आपको वर्जिन साबित करने के लिए कई तरह के तरीके अपना रही हैं। मार्केट में इस तरह के प्रोडक्ट बेचे जा रहे हैं जो फर्स्ट नाईट पर लड़की को वर्जिनिटी साबित करने के टेंशन में राहत देती हैं। उदाहरण के लिए बाजार में ऐसी पिल मौजूद है जिसे केवल शारीरिक सबंध बनाने से कुछ देर पहले अपनी वजाइना में रखना होगा और इंटरकोर्स के दौरान इससे ब्लड निकलने जैसा आभास होगा। इस तरह लड़कियां अपने पार्टनर को अपने वर्जिन होने का सबूत दे रही हैं।

कई क्लिनिक भी हैं मौजूद
शादी के समय लड़कियों के ऊपर वर्जिन होने के दबाव को भुनाने के लिए कई क्लिनिक भी खुल गए हैं। ये सर्जरी करके लड़कियों की फेक हाइमन तैयार करने का दवा करते हैं। हाइमनोप्लास्टी नाम की सर्जरी लड़कियों के बीच काफी महशूर हो रही है। ये क्लिनिक गुपचुप तरीके से लड़कियों की इस समस्या का समाधान करने का दावा करते हैं।

UK: ये महिला नहीं कर पा रही है अपने ओर्गेज्म को कंट्रोल, हो जाती है स्पीड ब्रेकर और गड्ढों से उत्तेजित, जानिए कारण

ड्यूरेक्स सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं ‘Big O’ यानी बड़े ओर्गेज्म तक नहीं पहुंच पाती हैं. तो वहीं दूसरी ओर जो महिलाएं थोड़ी सी भी ट्रिगर पर सेक्स के लिए तैयार हो जाती है. जैसे सड़क पर गड्ढों के उतार चढ़ाव में, यह बिलकुल भी मजेदार नहीं है बल्कि एक सीरियस मुद्दा है. जो महिलाएं स्पीड ब्रेकर पर उतार चढ़ाव और एस्केलेटर पर चढ़ने के दौरान सेक्स के लिए उत्तेजित हो जाती हैं वो पीजीएडी (पर्सेंटाइल जेनिटल ऑरल डिसऑर्डर) से पीड़ित हो सकती हैं.

61 वर्षीय यूके की रहनेवाली मारिया को पीजीएडी (PGAD) है. उन्होंने बताया कि वो अपने ओर्गेज्म को कंट्रोल नहीं कर पाती, जब वह कोई यौन इच्छा महसूस नहीं करती है तब भी उनका ओर्गेज्म उन चीजों से ट्रिगर हो जाता है जो लोग अपनी डेली लाइफ में काम करते हैं, उदाहरण के लिए अगर वो गड्ढे पर या स्पीड ब्रेकर पर ड्राइव करती हैं या एस्केलेटर पर चढ़ती हैं. ज्यादातर टाइम मुझे ऐसा लगता है कि मैं एक चींटी के घोंसले पर बैठी हूं. पूरे दिन में कई बार यह गुदगुदी होती है और मैं पूरी तरह से ओर्गेज्म तक पहुंच जाती हूं.गड्ढों पर ड्राइव करना, एयरक्राफ्ट टर्बुलेंस, एस्केलेटर, वायलिन से कंपन से उन्हें ओर्गेज्म मिला. यहीं नहीं कितनी महिलाओं ने कहा कि वे शानिया ट्वेन कॉन्सर्ट में गईं और इस कॉन्सर्ट ने उन्हें ऑर्गेज्म दिया. “

पीजीएडी (परसिस्टेंट जेनिटल अर्सल डिसऑर्डर) क्या है?

PGAD लगातार जननांग उत्तेजना विकार के लिए एक संक्षिप्त नाम है. यह महिलाओं के यौन स्वास्थ्य से जुड़ी एक बीमारी है जिसे ज्यादातर लोग अब तक समझ नहीं पाए हैं. पीजीएडी बीमारी से पीड़ित महिलाएं आमतौर पर अचानक और अक्सर जननांग उत्तेजना की शिकायत करती हैं और यह सेक्शुअल अराउजल से बिलकुल अलग है. यह सेक्शुअल इच्छा या व्यक्तिगत सेक्स डिजायर की तरह नहीं है. अध्ययन के अनुसार पीजीएडी बीमारी में महिलाओं को अचानक से उत्तेजना का अनुभव होता है. ये उत्तेजना सेक्स और गैर-उत्तेजनात्मक चीजों से उत्पन्न होता है, जो तनाव को कम करता है.” जननांग उत्तेजना आमतौर पर सहज है और ये डिजायर नहीं है. ये पुरुषों को भी हो सकती है. इस बात का ध्यान रखें कि व्यक्ति की ये उत्तेजना सेक्स डिजायर से जुड़ी नहीं है और यहां तक ​​कि इसमें हस्तमैथुन और कामोत्तेजना भी राहत नहीं देती है.

पीजीएडी (लगातार जननांग अराउजल विकार) के लक्षण

लोगों के लिए शुरू में इस समस्या को समझना मुश्किल है. इसलिए समझ न आने की वजह से इस बीमारी के इलाज में देरी हो जाती है. हालांकि इस बीमारी का पहला लक्षण है जनांगों के पास कलकलाहट होना. इस बीमारी में पेल्विक एरिया, जननांग, क्लिटोरिस, लेबिया, पेरिनेयम और एनस के पास अनइजी फील होता है.

इस बेचैनी को डाइस्थेसिया (dysesthesias) कहा जाता है.

लक्षण:

– दबाव बनना

– गीलापन महसूस होना

– असहज खुजली

– जलन की अनुभूति

– पीन और सुइ की चुभन होना

आमतौर पर यह दीर्घकालिक लक्षण हैं जो व्यक्ति को तत्काल लक्षणों से अधिक प्रभावित करते हैं. इसमें आमतौर पर मनोवैज्ञानिक समस्याएं शामिल होती हैं जैसे कि टेंशन, डिप्रेशन, तनाव, पैनिक अटैक , फ्रस्ट्रेशन, गिल्ट आदि इसके लक्षण हैं. पीजीएडी को अक्सर प्रैपिज्म, पीएसएएस (PSAS) और कभी-कभी हाइपरसेक्सुअलिटी के बीच कन्फ्यूजन हो जाती है. यह समझना जरुरी है कि लगातार यौन उत्तेजना सिंड्रोम किसी भी तरह से यौन इच्छा से जुड़ा नहीं है. हाइपरसेक्सुअलिटी का मतलब है ज्यादा जननांग उत्तेजना है जो सेक्स डिजायर नहीं है.

दूसरी ओर पीएसएडी में लगातार जननांग उत्तेजना होती है जो सेक्स डिजायर नहीं है. जबकि PSAS पुरुषों में लगातार जननांग उत्तेजना का एक प्रकार है, जिसमें यौन इच्छा के बिना ही पेनिस खड़ी हो जाती है. पीजीएडी बीमारी में संतुष्टि के लिए सेक्स की जरुरत नहीं है, अगर ऐसा महिलाओं या पुरुषों में है तो इसे महिलाओं में निमोनोमेनिया (nymphomania) और पुरुषों में satyriasis के रूप में जाना जाता है.

एक अध्ययन के अनुसार, “इस स्थिति को पहले लगातार यौन उत्तेजना सिंड्रोम (PSAS) के रूप में जाना जाता था, लेकिन इसका नाम बदलकर PGAD कर दिया गया क्योंकि PSAS सक्रिय यौन इच्छा है”

PGAD बीमारी में लक्षणों का पता लगाना सबसे कठिन हिस्सा है. इस बीमारी में महिला की जिंदगी पर बुरा प्रभाव पड़ता है. जहां वो शर्मिंदा होने के डर से बाहर जाना बंद कर देती है. जो महिलाएं इस बीमारी से पीड़ित हैं वो कभी भी ज्यादा बात नहीं करती हैं और अपनी जिंदगी खुलकर नहीं जी पाती हैं.

सेक्स परफॉर्मेंस में लाए तूफ़ान

हर रिलेशनशिप में आमतौर पर सेक्स तो किया जाता ही हैं, लेकिन हमेशा कोशिश रहनी चाहिए इसे बेहतर बनाने की। बेहतर सेक्स और ओर्गेज्म की प्राप्ति के लिए अपनी सेक्स परफॉर्मेंस और सेक्स ड्राइव को बढाने की जरूरत होती हैं। इसलिए आज हम आपके लिए कुछ ऐसी सेक्स पोजीशन लेकर आए हैं जो आपकी सेक्स परफॉर्मेंस में तूफ़ान लेकर आएगी और आपके पार्टनर का मूड बना देगी।

* सीटिंग ऑन चेयर पोजीशन

इस सेक्स पॉजिशन के दौरान आपके पुरुष साथी को कुर्सी (chair) पर आराम से बैठना होता है और आप उनकी गोद में बैठती है। महिला साथी को पुरुष साथी की ओर पीठ करके बैठना होता है तो वहीं पुरुष साथी अपने हाथ की मदद से इंटरकोर्स करता है। यह सेक्स पॉजिशन अल्टरनेटिव डॉगी स्टाइल (Alternative Doggy Style) की तरह होती है ऐसे में आप गहराई से सेक्स करने के साथ-साथ लंबे समय तक सेक्स करने का भी आनंद ले सकते हैं। सीटिंग ऑन चेयर (sitting on chair) पॉजिशन में सेक्स करने से आप सेक्स लंबे समय तक बिना किसी परेशानी के कर सकते हैं।

* सीटिंग पोजीशन

इस सेक्स पॉजिशन में महिला साथी पुरुष साथी की गोद (lap) में बैठकर सेक्स (sex) करती है। महिला पार्टनर को चाहिए कि उनकी गोद में बैठकर खुद को थोड़ा सा नीचे की तरफ झुकाएं और अपने हाथ से उनके पेनिस को सहारा देकर इंटरकोर्स करने में उनकी मदद करें। महिला और पुरुष पार्टनर दोनों को चाहिए की एक-दूसरे को चारों और अपने पैर लपेट (wrap) लें और सेक्स करने का मजा ले सकते हैं। इस पॉजिशन में आप धीरे-धीरे आराम से सेक्स कर सकते हैं और जितना मर्जी हो उतना ब्रेक (break) ले सकते हैं। लंबे समय तक सेक्स और इंटीमेसी (intimacy) का मजा लेना चाहते हैं तो ये सेक्स पॉजिशन आपके लिए बेहतर होती है।

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