मध्य प्रदेश राज्य

मध्यप्रदेश के किसान आक्रोशित : फ़सल बीमा में मिला 1 रुपये का मुआवज़ा

मध्य प्रदेश में किसान अतिवृष्टि के बाद से काफी परेशान हैं, फसल के नुकसान की भरपाई के लिए उसे उम्मीद थी कि पुराने बीमे की रकम आएगी तो राहत मिलेगी.लेकिन कई जगह जब किसानों के अकाउंट में रकम आई तो उनके होश उड़ गए. किसी इलाके में किसान को 1 रुपए मिला है तो कहीं 11 रुपए, कहीं 92 रुपए. हालांकि मुआवज़े की रकम किसान के रकबे और प्रीमियम के आधार पर तय होती है लेकिन इतना कम पैसा आने पर किसान तो आक्रोशित है ही साथ ही कांग्रेस को बैठे बिठाए एक मुद्दा मिल गया है. कांग्रेस ने इसे लेकर विरोध तेज़ कर दिया है. 21 सितंबर को होने वाले एक दिन के सत्र में इसे लेकर हंगामा हो सकता है. हालांकि कांग्रेस इस मुद्दे को ज़मीन पर उतारने की तैयारी कर रही है.

मध्य प्रदेश के 22 लाख किसानों को शिवराज सिंह चौहान ने पिछले साल हुए बीमे की राशि उनके खातों में ट्रांसफर की. इस कार्यक्रम में उनके साथ उज्जैन में कृषि मंत्री कमल पटेल और वरिष्ठ अफसर भी मौजूद थे. हालांकि कई इलाकों में किसानों के अकाउंट में जब पैसा पहुंचा तो वो खुश होने के बजाए और नाराज़ हो गए. एक ओर अतिवृष्टि से फसल बर्बाद, ऊपर से बीमे की रकम के नाम पर 1 रुपए खाते में आया. बैतूल ज़िले में किसान के खाते में 92 रुपए आए.

बैतूल समेत अन्य जिलों बीमे की रकम से हंगामा

बैतूल और उसके सरीखे दूसरे ज़िलों में किसानों को मिले बीमे के पैसे से हंगामा खड़ा हो गया है. कहीं कहीं किसानों को 92 रुपए तो कहीं 10 रुपए से भी कम मिला है. ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी के बीच तकरार शुरू हो गई है. भोपाल में कांग्रेस ने सड़क पर पोस्टर लगाकर शिवराज सरकार को आड़े हाथों लिया. एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने ये पोस्टर लगाकर शिवराज सरकार का आभार व्यक्त किया और लिखा कि मुआवज़े में 11 रुपए देने का आभार… हालांकि थोड़ी देर के बाद ही ये पोस्टर हटा दिया गया.

मामले में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस को हर मुद्दे पर राजनीति करने की आदत हो गई है. 15 महीने तक कांग्रेस किसी से आसूं पोंछने नहीं गई, कांग्रेस के समय जो बीमा राशि किसानों के खातों में जानी थी वो आइफा में खर्च की जाने वाली थी.जो पैसा किसानों के लिए खर्च होना था वो मंत्रियों का घर बनवाने में खर्च हो रहा था.किसानों के खाते में राशि जा रही है तो कांग्रेस के पेट में दर्द हो रहा है.

हालांकि कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा कि ये बीमा कंपनी की गलती है, समीक्षा बैठक में निर्देश जारी किए गए थे कि किसानों का कोई भी क्लेम 2 ह़ज़ार रुपए से कम का नहीं बनेगा अगर किसानों को 2-4 रुपए का बीमा गया है तो गलत है इसपर जांच होगी.

अब जब कम से कम 2 हज़ार रुपए किसानों के खाते में डालने के निर्देश हैं तो किसानों के खाते में 1 रुपए से लेकर 100 रुपए तक की रकम कैसे पहुंची ये बड़ा सवाल ह. ये गड़बड़ी सिर्फ किसानों की नाराज़गी की वजह नहीं बनी, आने वाले चुनावों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है. लिहाज़ा सरकार मामले में काफी गंभीरता बरत रही है.

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