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मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने वाला आरएसएस का टीवी चैनल

आरएसएस के टीवी चैनल सुदर्शन न्यूज़ के विवादित शो ‘यूपीएससी जिहाद’ में दिल्ली स्थित ज़कात फाउंडेशन संस्था पर कई आरोप लगाए गए हैं। द वायर ने ज़कात फ़ाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष सैयद ज़फर महमूद से बातचीत की है।

सुदर्शन न्यूज़ चैनल ने अपने इस कार्यक्रम के ट्रेलर में हैशटैग यूपीएससी जिहाद लिखकर नौकरशाही में मुसलमानों की घुसपैठ की साज़िश का बड़ा ख़ुलासा करने का दावा किया था।

दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा इस विवादित कार्यक्रम पर रोक लगाने के आदेश के बावजूद, केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने चैनल को इसके प्रसारण की अनुमति दे दी।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसके प्रसारण पर रोक लगाते हुए चैनल को कड़ी फटकार लगाई गई है। पिछले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश की शीर्ष अदालत होने के नाते किसी को यह आरोप लगाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती कि मुस्लिम सिविल सेवाओं में घुसपैठ कर रहे हैं।

कोर्ट का यह भी कहना था कि यह कार्यक्रम पहली नज़र में ही मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने वाला लगता है।

वहीं ज़फ़र महमूद ने सुदर्शन टीवी चैनल के सभी आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा है कि यह ज़कात फ़ाउंडेशन, पिछले बीस साल से काम कर रही है। इसकी स्थापना 1997 में हुई थी। शुरू के दस साल तक यह संस्था अनाथ बच्चों के लिए अनाथालय चलाती थी, ग़रीब विधवाओं को राशन देती थी, ग़रीब लड़कियों की शादियों के लिए मदद की जाती थी। ग़रीब छात्रों की फ़ीस भरती थी।

लेकिन 2006 में जस्टिस सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि भारत में सामाजिक, आर्थिक और शिक्षा के क्षेत्र में मुसलमान बाक़ी मज़हब के मानने वालों से बहुत पिछड़े हुए हैं। यहां तक कि कई इलाक़ों में अनुसूचित जाति से भी पीछे हैं।

उसमें मुसलमानों के पिछड़ेपन का एक मुख्य कारण, नौकरशाही में मुसलमानों का बहुत कम प्रतिनिधित्व बताया गया था।

मुसलमानों की आबादी 14.2 प्रतिशत है, लेकिन उनका प्रतिनिधित्व सिर्फ़ 1.5 प्रतिशत है। सरकार ने रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए मुसलमानों की स्थिति में सुधार के लिए कुछ क़दम उठाए।

ज़कात फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया ने सरकार के सामने यह प्रस्ताव रखा कि सरकार की इन कोशिशों में वह अपना योगदान देने के लिए तैयार है। तबसे सरकार की अगुवाई में एक नई यूनिट बनाई गई, जिसका नाम है कोचिंग गाइडिंग सेंटर फ़ॉर सिविल सर्विसेज़।

सैयद ज़फर महमूद का कहना था कि यूपीएससी एक संवैधानिक निकाय है। उसका उतना ही सम्मान करना चाहिए, जितना संविधान का किया जाता है। संवैधानिक निकाय पर हवा में तीर चलाकर उस पर लांछन लगाना और उसका अपमान करना सही नहीं है, बल्कि यह संविधान का अपमान करना है।

उन्होंने कहा कि देश में अगर किसी संस्था के ख़िलाफ़ कोई शक नहीं किया जा सकता, जो पूरी तरह पारदर्शी भी है, तो वह यही यूपीएससी है।

सुदर्शन टीवी और हिंदुत्ववादी संगठनों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है, उन्होंने अभी सिविल सेवा को निशाना बनाया है, लेकिन वह इससे पहले भी किसी न किसी संस्था को निशाना बनाते रहे हैं।

ज़फ़र महमूद ने सुदर्शन टीवी द्वारा लगाए गए आरोपों को ख़ारिज करते हुए कहा कि यह आरोप सौ फ़ीसदी ग़लत और निराधार हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि हम उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कर्यवाही करने के लिए भी ग़ौर रहे हैं, ताकि वह आइंदा दूसरों को बदनाम नहीं कर सकें।

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