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लद्दाख़ में फ़ाइबर केबल का जाल बिछाने के भारतीय अधिकारियों के आरोपों को चीन ने किया ख़ारिज


चीन के विदेश मंत्रालय ने भारतीय मीडिया में सैन्य अधिकारियों के हवाले से छपी इस ख़बर का खंडन किया है कि चीनी सेना लद्दाख़ के विवादित क्षेत्रों में ऑप्टिकल फ़ाइबर केबल का जाल बिछा रही है।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि दोनों देश कूटनीतिक और सैन्य चैनलों से एक दूसरे के संपर्क में हैं।

सोमवार को भारतीय अधिकारियों ने मीडिया को बताया था कि हाल ही में दोनों देशें के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए उच्च-स्तरीय वार्ता चल रही थी, चीनी सेना लद्दाख़ में ऑप्टिकल फ़ाइबर केबल का नेटवर्क बिछाने की योजना पर काम कर रही थी।

भारत के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना था कि इन केबलों के माध्यम से अग्रिम मोर्चे पर तैनात चीनी सैनिक आपस में सुरक्षित संवाद स्थापित कर सकते हैं, जिन्हें हाल ही में पैंगोंग त्सो झील के दक्षिणी हिस्से में देखा गया है।

हालांकि वांग ने इस रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है और उम्मीद जताई कि भारत, तनाव कम करने के लिए ठोस क़दम उठाएगा।

70 किलोमीटर के सीमावर्ती इलाक़े में हज़ारों भारतीय और चीनी सैनिक भारी हथियारों के साथ एक दूसरे के आमने-सामने हैं और दोनों देश तनाव बढ़ाने के लिए एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।

सोमवार को ही एक अन्य भारतीय अधिकारी ने बताया कि चीन ने अपनी सेना को पीछे नहीं हटाया है और न ही सैनिकों की संख्या में कमी की है, बल्कि दोनों देशों के बीच तनाव वैसी ही है, जैसी पिछले हफ़्ते विदेश मंत्रियों के बीच मुलाक़ात से पहले थी।

वहीं भारतीय अधिकारी का कहना था कि नई दिल्ली की सबसे बड़ी चिंता यह है कि चीन झील के दक्षिणी किनारे पर ऑप्टिकल फ़ाइबर केबल का जाल बिछा रहा है, जहां भारतीय और चीनी सैनिक कुछ ही दूरी पर एक दूसरे के आमने-सामने खड़े हैं।

फ़ाइबर-ऑप्टिक केबल संचार सुरक्षा के साथ-साथ तस्वीरों और दस्तावेज़ों जैसे डेटा के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करते हैं।

भारत का कहना है कि 15 जून को गलवान घाटी में एक झड़प के दौरान, उसके 20 सैनिकों की मौत हो गई थी।

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