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सऊदी अरब की पवित्र धरती पर मिली पॉर्न फ़िल्में दिखाने की इजाज़त : रिपोर्ट

सऊदी क्राउन प्रिंस बिन सलमान की मूर्खतापूर्ण कार्यवाहियों के कारण सऊदी अरब ऐसी अंधेरी कोठरी में घुस गया है जहां से उसका निकलना बड़ा मुश्किल है।

सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान का यह मानना है कि भारी दौलत से कुछ भी किया जा सकता है और दुनिया में हर तरह की आवाज़ दबाई जा सकती है और कभी कभी अपने विरोधियों को दबाने के लिए उनकी हत्या या यमन जैसे देश पर हमला भी किया जा सकता है।

मुहम्मद बिन सलमान की इस बढ़ती भूख की एक वजह, वाइट हाऊस में बैठक एक लालची है जिसकी नज़र में सिर्फ़ पैसे का ही महत्व है। इसी चीज़ ने मुहम्मद बिन सलमान के हौसले बढ़ा दिए हैं और वह हर चीज़ कर गुज़रने की सोचता रहता है।

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प द्वारा बिन सलमान के भरपूर समर्थन ने उसे जमाल ख़ाशुक़्जी की निर्मम हत्या के अपराध से भी बचा लिया क्योंकि इस्तांबोल में सऊदी वाणिज्य दूतावास में उसी के इशारे में जमाल ख़ाशुक़्जी की हत्या हुई और उनके शरीर के टुकड़े टुकड़े कर दिए गये। यह विरोधियों की आवाज़ दबाने का केवल एक छोटा सा ट्रेलर था। बिन सलमान का दुस्साहस यहीं पर नहीं रुका बल्कि उसने अपने आक़ाओं के इशारे पर यमन को लहुलुहान कर दिया।

पिछले 5 वर्षों के दौरान बिन सलमान के अपराधों ने यह सिद्ध कर दिया है कि पैसे से कभी भी उसके अपराधों को धोया नहीं जा सकता और हर एक को पैसे के बल पर ख़रीदा नहीं जा सकता। यह वजह है कि सऊदी अरब की नीतियों में दराड़ पड़ने लगे और यह दराड़ हर दिन बढ़ती ही जा रही है जिसकी वजह से सऊदी अरब एक ऐसी अंधेरी कोठरी में घुस गया है जहां से उसका निकलना बड़ा मुश्किल नज़र आ रहा है, हां इसका एक ही उपाय है कि वह भारी क़ीमत अदा करे।

दुनिया की सबसे प्रसिद्ध आन लाइन फ़िल्म कंपनी नेटफ़्लेक के प्रबंधक रेड हैस्टिग्स का कहना है कि सऊदी अरब ने विरोधी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़्जी की हत्या के अपराध के बारे में बिन सलमान की ओर से ध्यान हटाने के लिए गंदी और एडल्ट फ़िल्मों के प्रसारण की अनुमति दे दी है।

उन्होंने सीएनएन से बात करते हुए कहा कि उनकी कंपनी सऊदी अरब के दबाव की वजह से पैट्रिएट एक्ट सीरियल बंद करने पर मजबूर हुई जबकि इस सीरियल को लोग बहुत अधिक पसंद करते थे। उनका कहना था कि सऊदी अरब ने इसके बजाए उन कार्यक्रमों और सीरियल्ज़ को प्रसारित करने पर सहमति जता दी है जिनमें आपत्तिजनक सीन्ज़ हैं।

बिन सलमान यहीं तक ख़ामोश नहीं रहे उन्होंने ग्रुप-20 की कांफ़्रेंस से भी लाभ उठाने की कोशिश की जो ट्रम्प के समर्थन से रियाज़ में आयोजित होने वाली है, लेकिन यहां पर उनसे चूक हो गयी और यह विषय उनके लिए एक डरावना सपना बन गया। अमरीका और पश्चिम के आलोचक मीडिया ने ट्रम्प द्वारा बिन सलमान की रक्त पिपासु नीति की आलोचना शुरु कर दी।

वाशिंग्टन पोस्ट के लेखक और पत्रकार जैक्सन ड्हेल लिखते हैं कि ग्रुप-20 के राष्ट्राध्यक्षों को यह नहीं भूलना चाहिए कि बिन सलमान ने अपनी जेलों में बंद महिला कार्यकर्ताओं को उनके ही हाल पर छोड़ रखा है।

उन्होंने सचेत किया कि क्राउन प्रिंस पिछले दो साल से कोशिश कर रहे हैं कि यमन में युद्ध अपराध करने और देश के भीतर अपने विरोधियों का क्रूरता से दमन करने के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक नेता के रूप में अपनी जगह सुरक्षित रख सकें।

उनका कहना है कि इन नेताओं को चाहिए कि वे आज से कांफ़्रेंस के दिन तक स्वयं से पूछें क्या वे बिन सलमान को तमाम अपराधों से बरी कर देंगे जबकि लजीन हज़लूल अब भी जेल में बंद है और उसकी जेल कांफ़्रेंस हॉल से केवल 25 मील की दूरी पर है।

कहा जाता है कि हज़लूल निर्वासन का जीवन व्यतीत कर रहा था और मार्च 2018 से इमारात से लापता हो गया था और उसे ज़बरदस्ती सऊदी अरब लाया गया और कुछ समय के लिए ज़मानत पर रिहा कर दिया गया और 15 मई 2018 को कई कार्यकर्ताओं के साथ उसे फिर गिरफ़्तार कर लिया गया और कुछ महीनों के लिए गुप्त जेल में डाल दिया गया, उसके बाद पता चला कि हज़लूल और उसके साथियों को भीषण यातनाएं दी गयीं, उसे नंगा करके मारा पीटा गया और उसका बलात्कार किया गया और उसे इलेक्ट्रिक शॉक भी दिया गया। बिन सलमान के विशेष सलाहकार सऊद अलक़हतानी उसको उसके रिमान्ड की ज़िम्मेदारी दी गयी थी और उन्होंने उसको जान से मारने तक की धमकी दे डाली थी।

सऊदी समाज को अंधकार में डुबाने के लिए बिन सलमान के प्रयासों से पूरा समाज ही धराशायी हो जाएगा और क्योंकि सऊदी समाज में जवान निरंकुश और अधर्मी हो गये हैं। इसका कारण यह है कि कुछ ही दिन पहले सऊदी अरब की एक लड़की नूरा अलअसमर ने पैग़म्बरे इस्लाम और पवित्र क़ुरआन का अनादर करते हुए ट्वीट किया था। उनके इस ट्वीट से समाज समाज में आक्रोश पैदा हो गया है।

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