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अफ़गानिस्तान में अल-क़ायदा के नम्बर-2 की मौत, अमरीका की मोस्ट वांटेड लिस्ट में था शमिल

अफ़ग़ान नेशनल डायरेक्टोरेट ऑफ़ सिक्योरिटी (एनडीएस) का कहना है कि ग़ज़नी प्रांत में विशेष बलों के ऑपरेशन में अल-क़ायदा के दूसरे नम्बर का कमांडर मारा गया है।

एनडीएस का कहना है कि अबू मोहसिन अल-मिस्री इस क्षेत्र में अल-क़ायदा का प्रमुख कमांडर था, जिसे ग़ज़नी में एक विशेष कार्यवाही के दौरान, मौत के घाट उतार दिया गया। हालांकि एनडीएस ने अल-क़ायदा के इस आतंकवादी कमांडर के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी है।

अल-मिस्री 2018 से अमरीका की मोस्ट वांटेड आतंकवादियों की सूचि में शामिल था।

यूएस नेशनल काउंटरटेररिज़्म सेंटर के निदेशक क्रिस मिलर ने अल-मिस्री की मौत की पुष्टि करते हुए कहा है कि आतंकवादी कमांडर की मौत अल-क़ायदा के कमज़ोर होने की निशानी है।

अफ़ग़ानिस्तान के गृह मंत्रालय के प्रमुख मसूद अंदराबी ने भी ट्वीट किया कि एनडीएस के हाथों अल-क़ायदा के एक प्रमुख कमांडर की मौत, अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के आतंकवादी गुटों के साथ क़रीबी संबंध होने और सरकार व जनता के ख़िलाफ़ उनकी संयुक्त आतंकवादी गतिविधियों को दर्शाते हैं।

ग़ौरतलब है कि पिछले साल के अंत में अमरीका और तालिबान के साथ हुए कथित शांति समझौते की महत्वपूर्ण शर्तों में से एक तालिबान का अल-क़ायदा से रिश्ते तोड़ना था।

लेकिन अंदराबी का मानना है कि अल-क़ायदा समेत आतंकवादी गुटों और तालिबान के बीच आज भी सहयोग जारी है और तालिबान इस बारे में झूठ बोल रहे हैं।

अल-क़ायदा ने अभी तक अपने प्रमुख कमांडर की मौत के बारे में कोई बयान जारी नहीं किया है।

एफ़बीआई की रिपोर्ट के मुताबिक़, मारे गए अल-क़ायदा कमांडर का नाम हुसैन बिन अब्दल रऊफ़ था, जो एक मिस्री नागरिक था।

हाल ही में तालिबान ने अमरीका पर शांति समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया था, जिसे वाशिंगटन ने भड़काऊ बयानबाज़ी कहकर ख़ारिज कर दिया था।

पिछले महीने अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने दावा किया था कि अफ़ग़ानिस्तान में आज भी 200 से अधिक अल-क़ायदा आतंकवादी सक्रिय हैं।

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