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अमरीका ईरान की ताक़त से इतना क्यों डरता है : अमरीकी पत्रिका की मज़ेदार रिपोर्ट!

द अमरीकन कन्ज़रवेटिव पत्रिका टीएसी ने लिखा है कि माइक पोम्पियो ने इस हफ्ते न्यूज़मिक्स से एक बात चीत की है और उसमें उन्होंने अपने पद के दौरान एक बेहद शर्मनाक और हास्यास्पद बयान दिया है।

पत्रिका ने लिखा है कि माइक पोम्पियो ने कहा कि “ सब से बड़ा काम जो राष्ट्रपति ट्रम्प ने किया है वह यह था कि उन्होंने ईरान के साथ परमाणु समझौते को बुरा समझौता कहते हुए उससे निकलने का फैसला किया, यह समझौता अमरीका के लिए बुरा और एक खतरा था। उसके बाद से हमने मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए बिल्कुल अलग रणनीति अपनायी। हम इस्लामी गणतंत्र ईरान को शांति के लिए सब से बड़ा खतरा बल्कि सच बात तो यह है कि हम ईरान को अपने विशाल देश अमरीका के लिए सब से बड़ा खतरा समझते हैं। “

इस अमरीकी पत्रिका ने लिखा है कि पोम्पियो को सब से अधिक इस बात का पता है कि ईरान अमरीका में अमरीकियों के लिए कभी खतरा नहीं रहा है इस आधार पर यह बिल्कुल गलत और निराधार है कि ईरान अमरीकियो के लिए अमरीका में सब से बड़ा खतरा है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि ईरान को सब से बड़ा खतरा बताने से अमरीका के लिए वास्तविक खतरों की अनदेखी भी की जा रही है। अमरीकी विदेशमंत्री इस्राईल के साथ संबंध बनाने और ईरान के सामने खड़े होने के लिए विभिन्न देशों को तैयार करने के लिए लगातार विदेश दौरे पर हैं और अमरीकी, कोरोना में हर रोज़ मर रहे हैं क्योंकि सरकार ने इस बीमारी पर नियंत्रण में लापरवाही की है।

इस अमरीकी पत्रिका ने लिखा है कि हमारे नेता अन्य देशों की ओर से खतरों को जो हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकते खूब बढ़ा चढ़ा कर पेश करते हैं लेकिन वास्तविक खतरों को खत्म करने के लिए कुछ नहीं करते जिनसे हर रोज़ हज़ारों अमरीकियों की जान जाती है। एसी हालत में जब अमरीका में कोरोना से मरने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है अमरीकी सरकार दुनिया के दूसरे कोने पर स्थित एक देश पर प्रतिबंध कड़े करने में व्यस्त है।

हमारे वरिष्ठ अधिकारी अमरीकी की सुरक्षा के लिए विश्व समुदाय के सहयोग की कोशिश के बजाए एक एसी देश को अपमानित करने पर तुले हैं जिससे हम पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। आज अमरीका का विदेश नीतियां राष्ट्रीय हितों से बहुत दूर हो चुकी हैं एसा पहले कभी नहीं हुआ है।

एक सऊदी पायलट द्वारा की गयी फायरिंग में बहुत से अमरीकी मारे गये हैं जबकि आज तक अमरीका में एक अमरीका भी किसी ईरानी नागरिक के हमले में नहीं मारा गया है। ईरान न केवल यह कि अमरीका में हमारे लिए खतरा नहीं है बल्कि वह हमारे राष्ट्रीय हितों के लिए भी खतरा नहीं है।

द अमरीकन कन्ज़रवेटिव पत्रिका टीएसी ने लिखा है कि कन्ज़रवेटिव बेहद बेशर्मी से अमरीकियों को ईरान की ताक़त से डरा रहे हैं और ईरान के बेगुनाह नागरिकों को नुक़सान पहुंचा रहे हैं। ईरान पर प्रतिबंधों की वजह से दसियों लाख लोग दुख व समस्या में ग्रस्त हैं और यह काम हमारी सरकार ने किया है।

हमारी सरकार अस्ल में अमरीकी जनता को डराना चाहती है इस लिए विदेशी खतरे की बात कर रही है। हमारी सरकार विदेशी खतरों को बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रही है ताकि भारी सैन्य बजट का रास्ता खुला रहे। झूठ बोलने की यह नीति अस्ल में किसी देश पर हमले के लिए भी इस्तेमाल की जाती है और अब हम यह सहन नहीं कर सकते।

हम अगर अमरीका और ईरान की शक्ति के मध्य पाये जाने वाले अंतर पर ध्यान दें तो हमें इस बात पर बड़ी हैरत होती है कि ईरानी, हमारे लिए खतरा बन सकते हैं। अमरीका ईरान के खिलाफ भयानक आर्थिक युद्ध कर रहा है और इसका सब से अधिक नुक़सान इस देश की जनता को हो रहा है। यह आर्थिक युद्ध उस समझौते से निकलने की वजह से है जिसे ईरान ने कई बरसों तक सदभावना के साथ लागू किया और आज भी अमरीका द्वारा उससे निकलने पर मजबूर करने की कोशिशों के बावजूद ईरान समझौते का पालन कर रहा है।

पोम्पियो ने अपने बयान के एक अन्य भाग में कहा कि ट्रम्प सरका ने मध्य पूर्व के बारे में अलग रणनीति अपनायी है। यह बात सही है लेकिन उस तरह से नहीं जैसा वह कहना चाह रहे थे बल्कि ट्रम्प सरका ने मध्य पूर्व में भडकाऊ और अस्थिरता पैदा करने वाले काम किये हैं और उनकी यह अलग रणनीति हो सकता है कि अमरीका को एक अनावश्यक युद्ध में घसीट ले।

ईरान और इराक़ के बीच, अरबों डॉलर के बक़ाया के भुगतान पर सहमति, अमरीकी दबाव होगा कम

तेहरान का कहना है कि अमरीकी प्रतिबंधों के कारण इराक़ में फंस जाने वाले उसके अरबों डॉलर के भुगतान पर बग़दाद के साथ सहमति बन गई है।

सोमवार को ईरानी सेंट्रल बैंक के प्रमुख अब्दुल नासिर हिम्मती की बग़दाद यात्रा के दौरान, इराक़ी बैंकों में मौजूद, ईरान के अरबों डॉलर के उपयोग पर दोनों देशों के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं।

इस समझौते के बाद, तेहरान इराक़ी बैंकों में मौजूद ऊर्जा निर्यात से संबंधित भुगतान का उपयोग कर सकेगा।

ईरान, इराक़ी बैंकों में फंसी हुए ऊर्जा भुगतान का उपयोग, इराक़ व दूसरे देशों से ज़रूरी वस्तुओं का आयात करके कर सकता है।

जून में ईरान के ऊर्जा मंत्री रज़ा अर्दकानियान ने कहा था कि बिजली निर्यात के लिए ईरान का इराक़ पर कम से कम 800 मिलियन डॉलर का बक़ाया है।

पिछले साल फ़रवरी में तेहरान ने कहा था कि गैस की ख़रीद के लिए बग़दाद पर उसका लगभग 2 बिलियन डॉलर का बक़ाया है।

2019 में चीन के बाद इराक़, ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। पिछले साल ईरान ने क़रीब 9 अरब डॉलर के मूल्य का इराक़ को निर्यात किया, जबकि आयात सिर्फ़ 58 मिलियन डॉलर का किया।

ईरानी सेंट्रल बैंक के प्रमुख का कहना था कि इराक़ी प्रधान मंत्री ने उनसे वादा किया है कि वह ख़ुद भुगतान के लिए होने वाले समझौते की निगरानी करेंगे।

ग़ौरतलब है कि अमरीका के कड़े प्रतिबंधों और कोरोना वायरस महामारी के कारण, ईरानी अर्थव्यवस्था पर अभूतपूर्व दबाव है। इराक़ और दूसरे देशों में फंसे हुए पैसे का अगर ईरान किसी तरह उपयोग कर पाता है, तो निश्चित रूप से इस दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

ईरान की विदेशी मुद्रा छुड़ाने के लिए भरपूर कोशिश की जाएः राष्ट्रपति रूहानी

इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी देश की सील विदेशी मुद्रा तक पहुंच के लिए आवश्यक कार्यवाही किए जाने पर बल दिया है।

राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी ने मंगलवार को सरकार के आर्थिक समन्वय आयोग की बैठक में कहा कि यद्यपि अमरीकी प्रतिबंधों ने ईरान के आर्थिक लेनदेन के मामले को कठिन कर दिया है किन्तु जो प्रयास हुए हैं उनके द्वारा इन स्रोतों से लाभ उठाने का मामला बढ़ गया है और इनको आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन और मूलभूत चीज़ों के लिए विशेष किया जाएगा।

राष्ट्रपति रूहानी ने इस बैठक में विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ़ की चीन यात्रा के बाद पेश की गयी रिपोर्ट के बाद कहा कि दुनिया के सभी देशों के आर्थिक विकास एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उनका कहना था कि इस चरण में चीन, यूरेशियाई क्षेत्र के देशों और पड़ोसियों के साथ प्राथमिक संबंधों को मज़बूत करके ऊर्जा और तकनीक सहित विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक संबंधों को विस्तृत करके विशेष कार्यक्रम बनाए जा सकते हैं।

उनका कहना था कि ईरान सरकार क्षेत्रीय देशों के साथ होने वाले समझौतों को व्यवहारिक बनाने के लिए बहुत तेज़ कार्यवाही कर रही है। उनका कहना था कि यूरेशियाई संघ के साथ ईरान का सहयोग विस्तार, आर्थिक लेहाज़ से बहुत ही महत्वपूर्ण है

क्षेत्रीय समस्याओं का कारण विदेशी सैनिकों की उपस्थितिः ज़रीफ़

ईरान के विदेशमंत्री ने क्षेत्रीय समस्याओं का कारण विदेशी सैनिकों की उपस्थिति को बताया है।

मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने जापान के विदेशमंत्री मूतेगी के साथ वार्ता में यह बात कही। उन्होंने बुधवार को अपने जापानी समकक्ष के साथ क्षेत्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने इस वार्ता में ईरानी जनता के लिए दवाएं और खाद्य पदार्थ ख़रीदने पर अमरीका की ओर से पैदा किये जाने वाले गतिरोध को मानवता के विरुद्ध अपराध बताया। उन्होंने कहा कि हम आशा करते हैं कि जापान की सरकार, सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव क्रमांक 2231 को लागू करते हुए इस प्रकार के अमरीका के ग़ैर क़ानूनी कामों को रुकवाए। विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने कोरोना से संघर्ष के दौरान जापान की ओर से किये गए समर्थन का आभार व्यक्त किया।

इस भेंटवार्ता में जापान के विदेशमंत्री ने कहा कि मध्यपूर्व में स्थिरता स्थापित करने के बारे में टोकिया का दृष्टिकोण बदला नहीं है। उन्होंने कहा कि जापान हमेशा परमाणु समझौते का समर्थन करता है।

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