इतिहास

अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल : नोबेल पुरस्कार के बारे में जानिये!

जान अब्दुल्लाह
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अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल :
अभी नवभारतटाइम्स का समाचार था कि अमरीका एक ऐसे ट्रक पर परीक्षण कर रहा है जिसे परमाणु हथियारों को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने के काम लिया जाएगा और असावधानी की अवस्था में यह ट्रक कुछ ही क्षणों में किसी भी शहर को खाक कर सकता है, तो मुझे अचानक याद आया कि अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल का जन्म आज ही के दिन 21 अक्तूबर 1833 को हुआ था. यह शख्स आरम्भ में नाइट्रोग्लीसरीन का कारोबार करता था जो बेहद विस्फोटक बदबूदार तरल पदार्थ होता है जिसमें मामूली झटके में भी विस्फोट हो सकता है. इसके पास ढुलाई का काम करने वाले किसी भी साधन का चालक एक वर्ष से अधिक जीवित नहीं रह पाता था. अंततः सरकार ने नाइट्रोग्लीसरीन को बनाने व रखने पर प्रतिबंध लगा दिया. जब इसका धंधा चौपट होने लगा तो इसने वहां उपलब्ध एक काली मिट्टी में मिला कर नाइट्रोग्लीसरीन का पाऊडर बना लिया जो तुलनात्मक रूप से कम विस्फोटक था. उस पाऊडर को डायनामाइट नाम दिया गया जिसका पेटेंट इसके नाम था.


इसके नाम डायनामाइट सहित 355 विस्फोटक और हथियारों के पेटेंट इसके नाम थे जिनमें बोफ़ोर्स तोप भी शामिल है.

इसने अपने इस कारोबार से बहुत धन कमाया. एक बार इसका भाई फ्रांस गया था जहां उसकी मृत्यु हो गई. समाचारपत्रों ने गलती से इसको मरा समझ कर समाचार लगाया– अच्छा हुआ मौत का सौदागर मर गया.

इस समाचार को पढ़ कर इसको भारी धक्का लगा कि वास्तव में लोग उसको क्या समझते हैं. एक वर्ष सोचते रहने के बाद इसने अपनी सारी सम्पत्ति का ट्रस्ट बनाकर वसीयत कर दी कि इस सम्पत्ति से वर्ष भर में होने वाली ब्याज आय से दुनिया के उन लोगों को पुरस्कार दिया जाए जो उस वर्ष में मानव की भलाई के लिए कोई उल्लेखनीय कार्य करें जो अब उनके नाम से नोबेल पुरस्कार कहलाता है.

ट्रस्ट बनाने और वसीयत करने के एक वर्ष बाद 1896 में इसका देहांत हो गया था.

प्रताप सिंह की वाल से

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