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असम में एक बार फिर एनआरसी के नाम पर मुसलमानों को निशाना बनाने की साज़िश, जमीयत ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा : रिपोर्ट

असम में एनआरसी की सूची से ‘अपात्र’ लोगों और उनके वंशजों के नाम हटाए जाने के फ़ैसले के ख़िलाफ़, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन (एएएमएसयू) का भी कहना है कि एनआरसी से बाहर किए गए 19 लाख लोगों में से कई वास्तविक भारतीय नागरिक हैं, लेकिन अधिकारियों ने अभी तक उनके लिए अपील की प्रक्रिया शुरू नहीं की है, जबकि और अधिक नामों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसलिए इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ वह भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए तैयार है।


ग़ौरतलब है कि एनआरसी के लिए वर्षों की प्रक्रिया के बाद, 31 अगस्त 2019 को जारी की गई, अंतिम सूची में 3.3 करोड़ आवेदनकर्ताओं में से 19 लाख से अधिक लोगों के नाम राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में शामिल नहीं थे।

जमीयत की असम इकाई के सचिव मौलाना फज़लुल करीम क़ासिमी का कहना है कि जमीयत ने इस आदेश को कई आधार पर चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यह आदेश उन क़ानूनों का उल्लंघन करता है जिन पर एनआरसी तैयार किया जा रहा है। एनआरसी प्रक्रिया को पूरा किए बिना ही और अधिक नामों को हटाने का आदेश दिया है। आदेश को वापस लिया जाना चाहिए और इस आदेश के आधार पर काम नहीं किया जाना चाहिए।

13 अक्टूबर को एनआरसी असम के समन्वयक हितेश देव शर्मा ने सभी उपायुक्तों और नागरिक पंजीयन के ज़िला पंजीयकों (डीआरसीआर) को लिखे पत्र में सूची से ‘अपात्र’लोगों के नाम हटाने के लिए आदेश जारी किया था।

शर्मा ने कहा था, ‘वेबफॉर्म के माध्यम से आपकी तरफ़ से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार डीएफ़ (डिक्लेयर्ड फॉरेनर्स यानी घोषित विदेशी)/डीवी (डाउटफुल वोटर यानी संदिग्ध मतदाता)/पीएफ़टी (पेंडिंग ऐट फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल यानी विदेशी न्यायाधिकरण में लंबित) श्रेणियों के अपात्र लोग और उनके वंशजों के कुछ नाम एनआरसी में पाए गए हैं।

पिछले साल 31 अगस्त को अंतिम एनआरसी जारी की गई थी, जिससे कुल 19,06,657 लोगों के नाम हटाए गए थे।

अंतिम एनआरसी के प्रकाशन के बाद अनेक पक्षों और राजनीतिक दलों ने इसे दोषपूर्ण दस्तावेज़ बताते हुए इसकी आलोचना की थी। उन्होंने इसमें से मूल निवासियों को हटाए जाने तथा अवैध प्रवासियों को शामिल करने का आरोप लगाया था।

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