देश

आईएमएफ़ की रिपोर्ट ने खोली भारत में ”विकास” की पोल!

कोरोना वायरस की महामारी के चपेट में आए भारत के लिए अर्थ व्यवस्था पर पड़ने वाली भारी मार से निपटना एक बड़ी चुनौती बन गया है। आईएमएफ़ की गत मंगलवार की रिपोर्ट में जो अनुमान पेश किए गए हैं उनसे भारत के लोगों की चिंता बढ़ना तय है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत 2016 से ही आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा है जबकि कोरोना वायरस की महामारी ने समस्याओं को और भी जटिल बना दिया है।

आईएमएफ़ ने वर्ल्ड इकानामिक आउटलुक में कहा है कि मार्च 2021 तक पूरे होने वाले वित्तीय वर्ष में भारत की जीडीपी में 10.3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ जाएगी। जून में अनुमान लगाया गया था कि यह गिरावट 4.5 प्रतिशत की होगी मगर अब अनुमान लगाया गया है कि यह गिरावट इससे कहीं अधिक होगी।

कोरोना वायरस की महामारी से दुनिया की बड़ी अर्थ व्यवस्थाओं में होने वाली यह सबसे बड़ी गिरावट है इसीलिए विशेषज्ञ यह कह रहे हैं कि भारत की अर्थ व्यवस्था को निश्चित रूप से कोरोना वायरस की महामारी से नुक़सान पहुंचा है मगर इसे डिमोनिटाइज़ेशन और जीसीटी ने भी काफ़ी नुक़सान पहुंचाया है।

आईएमएफ़ ने कहा है कि भारत की जीडीपी को पहले के अनुमानों से कहीं अधिक नुक़सान पहुंच चुका है। आईएमएफ़ ने भारतीय नेतृत्व को कुछ नसीहतें भी की हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंधन निदेशक क्रिस्टिलीना जॉर्जीवा ने कहा है कि भारत की प्राथमिकता सबसे कमजोर लोगों की सुरक्षा करने, अच्छी तरह से सहायता देने और छोटे तथा मझोले उद्योगों की रक्षा करने की होनी चाहिए, ताकि एक देश के रूप में उनकी कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में हार न हो। उन्होंने कहा, ‘क्या करने की आवश्यकता है? स्पष्ट है, सबसे कमजोर लोगों की सुरक्षा, अच्छी तरह से सहायता, छोटे और मझोले उद्योगों की रक्षा, ताकि उनकी हार न हो।’

भारत ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए मार्च महीने में जो लाकडाउन किया उसने जीडीपी को बहुत बड़ा नुक़सान पहुंचा दिया। जबकि इतने कठोर लाकडाउन के बावजूद इस समय भारत पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण में बहुत ख़राब स्थिति में है। देश के 73 लाख से अधिक लोग अब तक कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं।

चीन ने भी कड़ाई से लाकडाउन किया मगर इसके साथ ही अर्थ व्यवस्था को संभालने वाले क़दम भी उठाए जिसका नतीजा यह हुआ कि इस साल चीन की अर्थिक विकास दर लगभग दो प्रतिशत के आसपास पहुंचने की संभावना है।

भारत की जीडीपी को पहुंचने वाले नुक़सान के बारे में आईएमएफ़ का अनुमान उससे भी ख़राब तसवीर पेश करता है जो विश्व बैंक की भविष्यवाणी से नज़र आई थी। विश्व बैंक ने 9.5 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान लगाया था।

भारत सरकार ने 286 अरब डालर के पैकेज का एलान किया था मगर इससे भी भारतीय अर्थ व्यवस्था ख़ुद को संभाल नहीं पायी तो हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ नए क़दम उठाने की घोषणा की है।

भारत में टीकाकार अब यह कहने लगे हैं कि देश की ख़राब आर्थिक दशा के लिए शीर्ष नेतृत्व से सवाल किया जाना चाहिए कि उसने कहां ग़लतियां की हैं जिसका नतीजा आज यह है कि भारत इस समय एशिया में चीन ही नहीं श्रीलंका, मालदीप और बांग्लादेश से भी पिछड़ता जा रहा है यही नहीं आर्थिक विकास दर के मामले में पाकिस्तान भी बेहतर स्थिति में नज़र आ रहा है।
—-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *