दुनिया

इस्राईल पर फिर बरसने लगी है आसमान से आग, रिपोर्ट

फिलिस्तीनी युवाओं ने अवैध अधिकृत इलाक़ों पर आग लगाने वाले बैलून फिर से उड़ाना शुरु कर दिया है।

इस्राईली बेबसाइट, मफज़ाक राआम ने लिखा है कि इस्लामी जेहाद आंदोलन से जुड़ी ” बिजली” युनिट ने शुक्रवार की रात, गज़्ज़ा पट्टी के पास यहूदी कालोनियों की तरफ आग लगाने वाले बैलून उड़ाए।

फिलिस्तीनी युवाओं ने बताया है कि इस्राईल की ओर आग लगाने वाले बैलूनों को, फिलिस्तीनी नेता माहिर अलअखरस की गिरफ्तारी जारी रखने के विरोध के लिए उड़ाया जा रहा है।

फिलिस्तीनी इस से पहले की पंतगों और उनके शब्दों में ” कागज़ी जहाज़ ” से इस्राईल को काफी नुक़सान पहुंचा चुके हैं।

जब फिलिस्तीनियों ने पतंगों से आग लगाया था तो तत्कालीन इस्राईली युद्ध मंत्री एविग्डोर लेबरमैन ने बताया कि गज़्ज़ा से 600 कागज़ के विमान उड़ाए गये थे जिनमें से 400 को आधुनिक तकनीक द्वारा हवा में ही तबाह कर दिया गया। उन्होंने बताया था कि इन जहाज़ों की वजह से 198 जगहों पर आग लग गयी और हज़ारों एकड़ खेत जल गये।

इस्राईल के तत्कालीन आतंरिक सुरक्षा मंत्री जलआद अरदान ने कहा था कि कागज़ के पतंगों से किये जाने वाले इन हमलों को, हत्या की कोशिश समझना चाहिए इस लिए इसे उड़ाने वालों को गोली मार देनी चाहिए।

फिलिस्तीनियों की इन आग लगाने वाली पतंगों को रोकने के लिए इस्राईली सेना, कैमरों से लैस ड्रोन विमानों का प्रयोग कर रही थी लेकिन बहुत सस्ते में बनने वाली इन पतंगों को इस्राईली सेना के अत्याधुनिक ड्रोन विमान रोकने में विफल रहे थे।


इस्राईल के बारे में आयतुल्लाहिल उज़मा सीस्तानी का अहम फतवा!

इराक़ के वरिष्ठ और बेदद प्रभावशाली शिया धर्म गुुरु आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली सीस्तानी ने इस्राईल के बारे में पूछे गये एक सवाल का जवाब में इस्राईल के साथ लेन देन को हराम कहा है।

आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली सीस्तानी की वेबसाइट पर एक सवाल किया गया था जिसमें यह पूछा गया था कि उन दुकानों और व्यापारिक केन्द्रों से सामान खरीदना या बेचना कि जो अपने लाभ का एक भाग इस्राईल को देते हैं , इस्लामी लिहाज़ से कैसा ?

इस सवाल के जवाब में फतवा दिया गया है कि इस्राईली उत्पादों को खरीदना और बेचना और उन कंपनियों की चीज़ें खरीदना बेचना जिनके बारे में यह साबित हो चुका है कि वह इस्राईल की प्रभावशाली मदद करती हैं, जायज़ नहीं है।

याद रहे इस्लामी नियमों के अनुसार अगर कोई सामान खरीदना बेचना जायज़ न हो यानि हराम हो तो उससे मिलने वाला फायदा भी हराम होता है और इस्लाम में हराम की कमाई खाने वाले की बहुत अधिक आलोचना की गयी है और यह भी कहा गया है कि हराम की कमाई खाने का इन्सान के व्यवहार पर बहुत असर पड़ता है और हराम की कमाई खाकर पलने वाले बच्चे, बड़े होकर समाज के लिए बहुत सी समस्याएं पैदा करते हैं।

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