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इस्लाम और मुसलमानों के ख़िलाफ़ एक्शन में फ़्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रां!

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां ने हालिया दिनों अपने बयानों से एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। मैक्रां ने वैसे तो लोकतंत्र बचाने और अलगाववाद को हतोत्साहित करने की बात की मगर उनके निशाने पर इस्लाम और मुसलमान थे।

मैक्रां ने फ़्रांस के मुसलमानों और इस्लाम के बारे में बयान दिया तो ख़ुद उनकी पार्टी के कई नेताओं और सांसदों ने कहा कि मैक्रां तो फ़्रांसीसियों को इस्लाम और मुसलमानों से डरा रहे हैं।

मैक्रां ने लोकतंत्र और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के नाम पर उन्हीं के शब्दों में इस्लामी अलगाववाद का मुक़बला करने पर ज़ोर दिया और मदरसों, मस्जिदों और इस्लामी संस्थाओं पर नज़र रखने की अनिवार्यता की बात की।

फ़्रांस के मुसलमानों का मानना है कि यह फ़्रांसीसी समाज के एक भाग को बुरी तरह टारगेट करने और उसके अधिकारों को सीमित करने की कोशिश है।

सत्ताधारी पार्टी की सांसद सीसील रियाक ने कहा कि इस्लामी अलगाववाद से लड़ने के लिए जिस योजना का एलान मैक्रां ने किया है उसमें हर प्रकार के अलगाववाद पर अंकुश लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि मैक्रां इस्लामी मामलों में दख़ल नहीं देना चाहते बल्कि इस्लाम में फेरबदल करने वालों पर अंकुश लगाना चाहते हैं। राजनैतिक और सामाजिक मामलों के विशेषज्ञ जूलियान टैलबन ने कहा कि मैक्रां की योजना में केवल इस्लाम और मुसलमानों का उल्लेख किया गया है, उनका पूरा भाषण इस्लाम पर हमले के अर्थ में था।

टैलबन ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि मैक्रां अपनी इस योजना के लिए संसद से कोई क़ानून पास करवा सकेंगे बल्कि इस कोशिश में वह बुरी तरह विपक्ष के निशाने पर आ जाएंगे।

फ्रांस के वामपंथी दल के नेता जान लाक मिलान्शन ने कहा कि मैक्रां का बयान सियासी ड्रामा है जिसका कोई फ़ायदा नहीं है।

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