दुनिया

ईरान के लिए बहुत बड़ी ख़ुशी का दिन : ख़त्म हो गया संयुक्त राष्ट्र संघ का #ईरान पर लगा हथियारों का प्रतिबंध : रिपोर्ट

ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में घोषणा की है कि पारम्परिक हथियारों के आयात और निर्यात पर संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से लगाया गया प्रतिबंध समाप्त हो चुका है और सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 के अनुसार अब ईरान के लिए किसी भी देश से हथियारों के व्यापार का रास्ता खुल गया है।

विदेश मंत्रालय के बयान को विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने अपने ट्वीटर हैंडल पर भी पबलिश किया।

सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों और अमरीका के साथ ईरान के 2015 के परमाणु समझौते के तहत सुरक्षा परिषद में पास होने वाले प्रस्ताव 2231 में कहा गया था कि पांच साल बाद 18 अकतूबर 2020 को ईरान पर लगे हथियारों के प्रतिबंध ख़ुद बख़ुद समाप्त हो जाएंगे।

अमरीका ने जो 2018 में इस समझौते से निकल गया था ईरान पर एकपक्षीय रूप से प्रतिबंध लगाकर ईरान पर लगे प्रतिबंधों की समय सीमा में विस्तार की कोशिश की लेकिन सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्य देशों ने अमरीका का विरोध कर दिया।

ईरान के विदेश मंत्रालय में कहा गया है कि आज का दिन विश्व समुदाय के लिए महत्वपूर्ण दिन है जिसने अमरीकी कोशिशों के मुक़ाबले में सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 का समर्थन किया। बयान में अमरीका से कहा गया है कि वह अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों का हनन बंद करे और पश्चिमी एशिया में शांति व सुरक्षा को नुक़सान पहुंचाने वाली गतिविधयां रोके।

नुक़सान उठाने वाले राष्ट्र क्या कभी यह अपराध भूल पाएंगे?

ब्रितानी अख़बार इंडिपेंडेंट ने ईरान के सभी क्षेत्रों पर लगाए गए अमरीकी प्रतिबंधों को अगर भयानक यातना और सरकारी आतंकवाद का नाम दिया है तो ग़लत नहीं किया है, यह वाक़ई मानवता के ख़िलाफ़ अपराध है।

इन प्रतिबंधों से जो पिछले चालीस साल से लगातार बढ़ते जा रहे हैं केवल ईरान की आम जनता को नुक़सान पहुंच रहा है। यही हाल वेनेज़ोएला, लीबिया, उत्तरी कतरिया, सीरिया, फ़िलिस्तीन और लेबनान के खिलाफ़ लगाए गए अमरीकी प्रतिबंधों का है।

अमरीकी प्रतिबंध ईरान की शासन व्यवस्था को ध्वस्त करने में नाकाम रहे और सीरिया में भी सत्ता परिवर्तन नहीं करवा सके। वेनेज़ोएला में तो राष्ट्रपति निकोलस मादोरो की लोकप्रियता और बढ़ गई जिन्होंने इन प्रतिबंधों का साहस के साथ डट कर मुक़ाबला किया जबकि उनके विरोधी ख़्वान ग्वाइडो को जनता भूलती जा रही है। उन पर देश से ग़द्दारी और विदेशों के मोहरे के रूप में काम करने के आरोप लग रहे हैं।

बिल्कुल यह प्रतिबंध अमानवीय यातना है जिनसे 8 करोड़ से अधिक ईरानी जनता को निशाना बनाया गया है जो इस समय कोरोना महामारी के दौर से गुज़र रही है।

नस्लवादी और मानसिक रूप से बीमार ट्रम्प जब यह ख़बरें सुनते हैं कि ईरान में कोरोना महामारी से तबाही हो रही है और मरने वालों की संख्या बढ़ रही है तो उन्हें आनंद आता है। ट्रम्प दावा करते हैं कि कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं तो उन्हें यह भी पता होना चाहिए कि इस वायरस से संक्रमित होने का क्या मतलब है? मगर वह संवेदनहीन व्यक्ति हैं और मानवता और मानवीय मूल्यों से उनका कोई लेना देना नहीं है, उन पर तो जातिवाद और नस्लवाद छाया हुआ है।

हमें ट्रम्प के इस फ़ैसले पर कोई हैरत नहीं है क्योंकि हम ट्रम्प की वह वीडियो देख चुके हैं जिसमें वह पूर्व अमरीकी सरकार की इसलिए आलोचना कर रहे हैं कि उसने इराक़ की तेल की दौलत को लूटने में कुछ कसर रखी। ट्रम्प ने इराक़ से दो ट्रिलियन डालर के हर्जाने की मांग की। ट्रम्प की समझ में तो यह बात आई ही नहीं कि इराक़ में जनता रहती है और अमरीका ने अपनी योजना से इराक़ को तबाह करके रख दिया।

हमारे लिए कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि अगला चुनाव ट्रम्प जीतेंगे या हारेंगे लेकिन यह अमानवीय हरकतें ट्रम्प के नाम के साथ हमेशा के लिए जुड़ जाएंगी।

स्रोतः रायुल यौम

दुनिया के 26 अहम देशों ने अमरीकी प्रतिबंधों की समाप्ति की मांग की

इस्लामी गणतंत्र ईरान समेत दुनिया के 26 अहम देशों ने अमरीका की ओर से विभिन्न देशों पर लगाए गए अत्याचारपूर्ण प्रतिबंधों की समाप्ति की मांग की है।

ईरान, सीरिया, रूस, चीन, उत्तरी कोरिया, बेलारूस व इराक़ और अफ़्रीक़ा के 9 देशों समेत दुनिया के 26 देशों ने इस बात की घोषणा करते हुए कि दुनिया के स्वाधीन देशों के ख़िलाफ़ अमरीका व कुछ अन्य देशों के अत्याचारपूर्ण आर्थिक प्रतिबंध, कोरोना वायरस से संघर्ष की राह में एक बड़ी रुकाट में बदल गए हैं, इस स्थिति को समाप्त किए जाने की मांग की है। इन देशों के इस संयुक्त बयान को सोमवार को संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में मानवाधिकार की तीसरी बैठक में चीन के प्रतिनिधि ने पढ़ कर सुनाया। बयान में कहा गया है कि प्रतिबंध लगाने वाले देश मानवाधिकारों का हनन करते हुए कोविड-19 की महामारी को रोकने में रुकावट डाल रहे हैं।

दुनिया के इन 26 अहम देशों ने अपने संयुक्त बयान में इस बात का उल्लेख करते हुए कि कोरोना का संकट अब भी सभी राष्ट्रों विशेष कर विकासशील देशों के पर गंभीर रूप से प्रभाव डाल रहा है, बल देकर कहा है कि इस वायरस से संघर्ष के लिए वैश्विक एकजुटता व अंतर्राष्ट्रीय सहयोग ज़रूरी है। ज्ञात रहे कि अमरीका के एकपक्षीय व अत्याचारपूर्ण प्रतिबंधों की चपेट में दवाएं व मेडिकल उपकरण भी आ रहे हैं जिसकी वजह से प्रतिबंधित देशों के लोगों विशेष कर कोरोना के मरीज़ों के समस्या अनेक समस्याएं व कठिनाइयां पैदा हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने कोरोना के दौरान भी अमरीका की शत्रुतापूर्ण नीतियां जारी रहने की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि दुनिया अब अमरीका के आर्थिक आतंकवाद के मुक़ाबले में ख़ामोश नहीं रह सकती जो अब मेडिकल आतंकवाद से भी जुड़ गया है।

Javad Zarif
@JZarif

A momentous day for the international community, which— in defiance of malign US efforts—has protected UNSC Res. 2231 and JCPOA.

Today’s normalization of Iran’s defense cooperation with the world is a win for the cause of multilateralism and peace and security in our region.

PTVBreaking
@PTVBreaking1

Iran: Any measure against UNSC Resolution 2231 will amount to material breach of resolution

The Economist
@TheEconomist

After the coronavirus hit Iran, retail investors flooded in. The number of people active in the stockmarket went from 700,000 to 5m in a matter of months


The beautiful Salt Domes of Iran.

 

अगर हमारा इलाक़ा तुम्हारे लिए सुरक्षित हो गया तो फिर भाग क्यों रहे हो? ईरानी जनरल का अमरीकी सेना से सवाल !

आईआरजीसी की कुदस ब्रिगेड के डिप्टी कमांडर ने अमरीकी राष्ट्रपति के इस बयान पर कि जनरल सुलैमानी की हत्या के बाद इलाक़ा अमरीकी सैनिकों के लिए अधिक सुरक्षित हो गया है, कहा कि अगर यह इलाक़ा तुम्हारे लिए अधिक सुरक्षित हो गया है तो फिर यहां से भाग क्यों रहे हो?

ब्रिगेडियर जनरल सैयद मोहम्मद हिजाज़ी ने तेहरान में एक कार्यक्रम के दौरान अपने भाषण में कहा कि पूरी दुनिया में अमरीकी सैनिक डरे हुए हैं।

जनरल हिजाज़ी ने कहा कि अमरीका अफगानिस्तान से जल्दी से जल्दी भाग जाना चाहता है और इस तरह से इलाक़े से भागने की वजह डर है क्योंकि यह इलाक़ा अब उनके लिए असुरक्षित हो गया है।

कुदस ब्रिगेड के डिप्टी कमांडर ने कहा कि आज अमरीकी हमेशा से कहीं अधिक अलग थलग हैं और प्रतिरोध का आंदोलन जारी था और जारी रहेगा तथा अनुभव से यह सिद्ध हुआ है कि प्रतिरोध को हमेशा सफलता मिली है और उसके दुश्मन हमेशा नाकाम ही रहे हैं।

उन्होंने कुछ अरब देशों की ओर से इस्राईल के साथ संबंध बनाने पर भी कहा कि इलाक़े के मुस्लिम राष्ट्र इस प्रकार के क़दम का कड़ा विरोध करते हैं।

परदेसी मुजाहिद नामक पांचवां सम्मेलन शुक्रवार को तेहरान में आयोजित हुआ जिसका मुख्य विषय फिलिस्तीन और आगामी विश्व व्यवस्था था।

सम्मेलन में नाइजेरिया , यमन, फिलिस्तीन, लेबनान और बहरैन के कुछ प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने विश्व साम्राज्य से युद्ध का झंडा उठा रखा है।

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