कश्मीर राज्य

कश्मीर बिक्री के लिए उपलब्ध है : कश्मीरियों में भारी रोष!

प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र की बीजेपी सरकार कश्मीरियों के अधिकारों पर एक के बाद एक प्रहार कर रही है।

पिछले साल आर्टिकल 370 ख़त्म करके कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने के बाद, ग़ैर कश्मीरियों को कश्मीर में बसने की अनुमति दी गई, जिसे कश्मीरियों ने मुस्लिम बहुल क्षेत्र की जनसंख्या का अनुपात बिगाड़ने की साज़िश क़रार दिया था। अब मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर में ज़मीन ख़रीदने के क़ानून में बड़ा बदलाव करते हुए भारत के किसी भी नागरिक को जम्मू-कश्मीर में ज़मीन ख़रीदने का अधिकार दे दिया है।

मंगलवार को भारत के गृह मंत्रालय ने इस क़ानून में नए संशोधन का नोटिस जारी किया, जिसके मुताबिक़ कोई भी भारतीय नागरिक, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख़ में घर और कारोबार के लिए ज़मीन ख़रीद सकता है। इसे तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

हालांकि जम्मू-कश्मीर की जनता और अधिकांश नेताओं का कहना है कि हम भारत सरकार के कश्मीर विरोधी फ़ैसलों को नहीं मानते हैं और अपने अधिकारों के लिए आख़िरी दम तक लड़ेंगे।

भारत प्रशासित कश्मीर के लोगों में सरकार द्वारा किए जा रहे नए बदलावों से रोष व्याप्त है और उन्हें लगता है कि इस तरह से उनकी संस्कृति ख़तरे में पड़ जाएगी और वह अपने ही इलाक़े में अजनबी होकर रह जायेंगे।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्य मंत्री उमर अब्दुल्लाह ने नए संशोधनों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें ख़ारिज कर दिया है।

अब्दुल्लाह ने ट्वीट करके कहाः यहां तक कि ग़ैर-कृषि भूमि ख़रीदने के लिए डोमिसाइल की क़ैद को भी हटा दिया गया है और कृषि भूमि के हस्तांतरण को भी आसान बना दिया गया है। जम्मू-कश्मीर अब बिक्री के लिए तैयार है।

मोदी सरकार द्वारा किए गए नए संशोधन के तहत, जम्मू-कश्मीर के पूरे क्षेत्र में ज़मीन ख़रीदने के लिए अब किसी भी तरह के डोमिसाइल या स्टेट सब्जेक्ट की औपचारिकता की ज़रूरत नहीं होगी। हालांकि डोमिसाइल की ज़रीरत सिर्फ़ कृषि भूमि ख़रीदने के लिए होगी।

मोदी सरकार ने अगस्त 2019 में कश्मीर की अर्धस्वायत्ता छीन लेने के बाद, कई ऐसे क़ानून पारित कए हैं, जिससे क्षेत्र का जनसांख्यिकी ढांचा बिगड़ सकता है।

सरकार ने इस महीने की शुरुआत में कश्मीर में सभी प्रकार की ज़मीनों और इमारतों पर प्रॉपर्टी टैक्स लागू कर दिया।

मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के आबादी के अनुपात में बदलाव के प्रयासों के आरोपों को ख़ारिज कर दिया है। सरकार का दावा है कि क्षेत्र के लोगों के हित में यह क़दम उठाए जा रहे हैं।

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