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क़तर और कुवैत के बाद लीबिया ने भी फ़िलिस्तीन की जगह अरब संघ की अध्यक्षता स्वीकार करने से इन्कार किया!

क़तर और कुवैत के बाद लीबिया ने भी फ़िलिस्तीन की जगह अरब संघ की अध्यक्षता स्वीकार करने से इन्कार कर दिया है।

लीबिया की राष्ट्रीय एकता की सरकार ने मंगलवार को घोषणा की कि वह अरब संघ की वर्तमान अध्यक्षता को स्वीकार नहीं कर सकती। फ़िलिस्तीनी प्रशासन ने अरब संघ के सचिवालय और महासचिव की ओर से ज़ायोनी शासन के साथ संयुक्त अरब इमारात और बहरैन द्वारा संबंध स्थापित किए जाने का समर्थन करने पर आपत्ति स्वरूप 22 सितम्बर को कहा थ कि वह अरब लीग की वर्तमान अध्यक्षता स्वीकार नहीं करेगा। इसके बाद क़तर व कुवैत से कहा गया था कि वे अरब संघ की वर्तमान अध्यक्षता स्वीकार करें लेकिन इन दोनों देशों ने भी इससे इन्कार कर दिया था।

अरब संघ के आंतरिक संविधान के छठे अनुच्छेद में कहा गया है कि अगर संघ का वर्तमान अध्यक्ष, मंत्री स्तर पर इसकी अध्यक्षता स्वीकार न करे तो अस्थायी रूप से उस देश को अध्यक्ष बनाया जाएगा जो वर्तमान अध्यक्ष के बाद संघ का अध्यक्ष बनने वाला था। इसी आधार पर फ़िलिस्तीन द्वारा अरब संघ की अध्यक्षता स्वीकार करने से इन्कार के बाद पहले कुवैत और फिर क़तर को इसका अध्यक्ष बनाने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने भी इन्कार कर दिया जिसके बाद लीबिया को अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव दिया गया मगर उसने भी इससे इन्कार कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि अरब संघ के महासचिव ने हाल ही में ज़ायोनी शासन के साथ संयुक्त अरब इमारात व बहरैन द्वारा संबंध स्थापित किए जाने के शर्मनाक समझौते का समर्थन करते हुए दावा किया था कि इस समझौते के कारण ही ज़ायोनी शासन ने पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों को इस्राईल से जोड़ने की योजना स्थगित कर दी है। इमारात और बहरैन के विदेश मंत्रियों ने 15 सितम्बर को वाइट हाउस में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की उपस्थिति में इस समझौते पर दस्तख़त किए थे।

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